ऑनलाइन पिंडदान, धर्म से खिलवाड़: शंभू लाल विट्ठल
प्रयागराज। श्रीविष्णुपद प्रबंधकारिणी समिति के अध्यक्ष शंभूलाल विट्टल ने ऑनलाइन पिंडदान एवं तर्पण का विरोध करते हुए धर्म के साथ खिलवाड़ बताया है। प्रयागराज, उज्जैन, हरिद्वार समेत अनेक तीर्थ स्थानों पर पितरों की मुक्ति के लिए तीर्थ पुरोहित ऑनलाइन पिंडदान एवं तर्पण करने के लिए ऑननलाइन दक्षिणा ले रहे हैं। ऑनलाइन पिंडदान एवं तर्पण का किसी भी धर्मशास्त्र में उल्लेख नहीं है। धर्म से खिलवाड़ विनाशकारी होता है। पिंडदान के लिए कई स्थानों पर तीर्थ पुरोहितों ने नामांकन कराने के लिए वेबसाइट तैयार करायीं हैं।
इंग्लैंड, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया आदि देशों में रहने वाले प्रवासी भारतीय अपने पितरों की मुक्ति के लिए तीर्थ पुरोहितों से पिंडदान और तर्पण कराने के लिए लगातार संपर्क बनाए हुए हैं। तीर्थ पुरोहित देश-विदेश में बैठे लोगों का ऑनलाइन श्राद्ध और तर्पण करा रहे हैं। पुरोहित यजमान के पूर्वजों की मृत्यु की तिथि और गोत्र पूछकर पिंडदान करते हैं। समयाभाव के कारण विदेश में बैठे वंशज वाट्सएप काल पर देखकर आत्मसंतुष्टि महसूस करते हैं।
श्रीविष्णुपद प्रबंधकारिणी समिति के अध्यक्ष शंभूलाल विट्टल ने बताया कि शास्त्रों में कहीं इसका वर्णन नहीं है इसलिए ऑनलाइन पिंडदान का कोई महत्व नहीं है। आनॅलाइन पिंडदान का यदि महत्व होता तो विदेश से पिंडदानी गयाजी में अमेरिका, रूस, अफ्रीका एवं वियतनाम से पिंडदान करने इतना पैसा खर्च कर क्यों आते। ऑनलाइन पिंडदान केवल पैसा कमाने का सुगम तरीका है।
विट्टल ने बताया कि ऑनलाइन पिंडदान धर्म विरोधी है। उन्होंने पूर्वजों का पिंडदान करने वाले लोगों को आगाह किया कि ऑनलाइन पिंडदान करने से पितरों को कोई मुक्ति नहीं मिलगी। यह सब धर्म के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। ऑनलाइन क्या किसी व्यक्ति का दाह संस्कार किया जा सकता है। यदि नहीं, तो उसका ऑनलाइन पिंडदान भी नहीं किया जा सकता। यह क्रिया पुत्र या परिवार के व्यक्ति को स्वयं अपने हाथो से करना चाहिए।
समिति के अध्यक्ष का कहना है कि ऑनलाइन पिंडदान कराने से न/न पिंडदान करने वाले को कोई लाभ मिलेगा और नहीं पितरों की आत्मा तृप्त होगी। आनॅलाइन दर्शन का लाभ उठा सकते हैं लेकिन शास्त्र के अनुसार संतान को ही पिंडदान करने का अधिकार है। पिता का पुत्र अंश होता है। अंश को ही सशरीर पिंडदान करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है।
उन्होंने बताया कि श्रद्धा का नाम श्राद्ध है। जब श्रद्धा ही नहीं है केवल लोकाचार करने का औचित्य नहीं है। पिंडदान स्वयं की शांति के लिए नहीं होता बल्कि पितरों की मुक्ति के लिए किया जाता है। कुंभ मेला-2019 के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मॉरीशस के प्रधानमंत्री प्रविंद जुगनाथ का संगम तट पर विधि विधान से पूजा पाठ कराने वाले तीर्थ पुरोहित दीपू मिश्र ने बताया कि ऑनलाइन में ‘रांग लाइन’ भी होती है। विदेशों में बैठे प्रवासी भारतीय द्वारा ऑनलाइन पिंडदान कराने पर खेद व्यक्त करते हुए इसे धर्म के साथ खिलवाड़ बताया है।
मिश्र ने कहा कि धर्म को डिजिटल बनाने का मतलब उसके साथ खिलवाड़ करना है। धर्म खिलवाड़ की चीज नहीं है। धर्म से खिलवाड़ करने का परिणाम विनाश है। उन्होंने बताया कि ह्वाट्सएप वीडियो कांफ्रेंसिंग से पिंडदान और तर्पण करने की क्रिया बतायी जा सकती है लेकिन यजमान से दक्षिणा लेकर उसके पूर्वज के नाम पिण्डदान या तर्पण करना धर्म संगत नहीं है। यह तरीका धर्म के नाम पर धन कमाने की दुकान है।
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