बेहतर रिश्तों का भरोसा
भारत के कड़े तेवरों के बाद कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने दोनों देशों के बीच रिश्ते बेहतर बनाने की बात कही है। दरअसल भारत ने कनाडा के 41 राजनयिकों को देश छोड़ने का आदेश दिया है। गौरतलब है कि प्रतिबंधित खालिस्तान टाइगर फोर्स के प्रमुख हरदीप सिंह निज्जर की जून में ब्रिटिश कोलंबिया में हत्या कर दी गई थी। कनाडा के प्रधानमंत्री ने खालिस्तानी अलगाववादी की हत्या में भारत की संलिप्तता के गंभीर आरोप लगाए थे। इसके बाद दोनों देशों के संबंधों में खटास आ गई।
देखा जाए तो कई मामलों में कनाडा दुनिया की सबसे बड़ी समस्या यानी आतंकवाद का समर्थन करने और उसे बढ़ावा देने की हर संभव कोशिश कर रहा है। इस मामले में वह पाकिस्तान की राह पर चल रहा है। जिस प्रकार से पाकिस्तान के नेता पूरी दुनिया के सामने दोमुंही बात करते हैं और भरोसा देते हैं कि वे आतंकवाद पर लगाम लगाएंगे, ठीक उसी प्रकार से आज कनाडा में ट्रूडो प्रशासन भी कर रहा है। इस सबके पीछे प्रधानमंत्री ट्रूडो की घरेलू राजनीतिक मजबूरियां हैं। इन्हीं मजबूरियों ने उन्हें कनाडा में रहने वाले खालिस्तान आंदोलन के समर्थकों के साथ खड़े होने और उन्हें प्रश्रय देने के लिए विवश किया है।
कनाडा में खालिस्तान समर्थक फिलहाल न केवल अधिक मुखर और सक्रिय हो गए हैं, बल्कि उनकी भारत विरोधी खतरनाक गतिविधियां भी बढ़ गई हैं। जी 20 सम्मेलन के के दौरान दिल्ली में रहते हुए ट्रूडो ने दावा किया था कि हम हिंसा को रोकने और नफरत व अशांति फैलाने वालों पर लगाम लगाने के लिए हमेशा तत्पर हैं लेकिन, सच्चाई इसके उलट है। अभी तक कनाडा प्रशासन की ओर से खालिस्तानियों के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
लगता है कनाडा में रहकर भारत के विरुद्ध षड़यंत्र रचने वाले आतंकवादियों का समर्थन करना कहीं न कहीं उसकी राष्ट्रीय नीति बन गई है। यह सब ऐसी हरकतें हैं, जिन्हें खालिस्तान समर्थक चरमपंथी कनाडा की धरती पर रहकर बेखौफ तरीके से अंजाम दे रहे हैं। जाहिर है कि भारत किसी भी सूरत में इन सबकी अनदेखी नहीं कर सकता है।
कनाडा ने अमेरिका समेत अपने मित्र और साझीदार देशों के साथ मिलकर भारत के खिलाफ दबाव की रणनीति अपनानी चाही, मगर असफल रहा। भारत ने अपना पक्ष वैश्विक समुदाय के समक्ष मजबूती से रखा जिसके सकारात्मक परिणाम आए। अच्छी बात है कि अब कनाडा के प्रधानमंत्री ट्रूडो का भारत के प्रति रुख नरम पड़ रहा है। ट्रूडो अपने बयानों की वजह से भारत के साथ संबंधों में आए तनाव को संभालने की कोशिश कर रहे हैं।
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