मुरादाबाद : बेसहारा घायल पशुओं काे नया जीवन दे रहे शेखर, स्वयं उठाते हैं खर्च 

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Edited By Amrit Vichar
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कोविडकाल में घायल पशुओं को देख बदल गया था जीवन का लक्ष्य

घायल कुत्ते का इलाज करते शेखर।

निर्मल पांडेय, अमृत विचार। इंजीनियर शेखर चौहान, जी हां ये वह नाम है जो घायल बेसहारा पशुओं को सहारा देने वाले के रूप में जाना जाता है। घायल बेसहारा पशुओं के संरक्षण और उनके इलाज में शेखर का जुनून देखते ही बनता है। इसके लिए वह अमरोहा, मुरादाबाद, बिजनौर समेत आसपास के कई जिलाें में चर्चित हो गए हैं। इनकी टीम में गोविंद नगर के विशाल चौधरी और वर्षा नागपाल भी हैं। 

वैसे तो शेखर इंजीनियर हैं लेकिन, कोविडकाल की एक घटना ने उनके जीवन की राह को बदल दिया। लॉकडाउन का समय था। बेसहारा पशु भी भूख से तड़प रहे थे। घायल-बीमार बेसहारा पशु इलाज के अभाव में दम तोड़ रहे थे। यह सब देखकर शेखर ने इन पशुओं को सहारा देने की ठान ली थी। एक घटना का जिक्र करते हुए शेखर बताते हैं कि लॉकडाउन में उनका पालतू कुत्ता बीमार हो गया, उसे वह डाॅक्टर के पास ले जा रहे थे। रास्ते में उन्हें कई घायल कुत्ते व गोवंशीय पशु दिखे। इससे उनका मन द्रवित हो गया और प्रत्येक घायल बेसहारा पशुओं को संरक्षण देने की ठान ली।

इनके कार्य में उनकी मां कमलेश देवी भी सहयोगी हैं। जहां कहीं पशु के घायल होने की खबर मिली, शेखर तुरंत मौके पर पहुंचकर उसका प्रारंभिक इलाज करते हैं। बस में नहीं हुआ तो उसे डॉक्टर के पास ले जाते हैं। इलाज में आने वाले खर्च को भी खुद वहन करते हैं। यही नहीं, बेसहारा भूखे पशुओं के लिए भोजन की व्यवस्था भी संभालते हैं। इस कार्य में उन्हें कई चुनौती भी मिलती है।

एक महीने पहले ही उन्होंने कुत्ते को पत्थर से कूचकर मार डालने वाले के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराई। शेखर कहते हैं कि वह घायल पशु को जहां से उठाते हैं, उस स्थल का वह जियो टैग भी करते हैं और पशु के स्वस्थ होने पर उसी स्थान पर उसे छोड़ते हैं। ऐसे में कई बार उनसे विवाद की स्थिति भी बनी। लेकिन, वह कहते हैं चुनौती तो जीवन ही है। बेसहारा पशुओं को सहारा देने में वह हर चुनौती को सामान्य मानते हैं।

सूचना के लिए इंटरनेट को बनाया माध्यम
शेखर ने बताया कि बेसहारा पशुओं के घायल होने की उन्हें अधिक से अधिक जानकारी मिले, इसके लिए वह इंटरनेट का भी प्रयोग करते हैं। इंटरनेट पर उन्होंने रैनी एनिमल रेस्क्यू फाउंडेशन नाम से पेज बना रखा है। इसमें रेस्क्यू के प्रत्येक दिन की समय-सारणी भी देख रखी है। किसी सूचना के लिए (वर्षा-पशु-बचाव-नींव-मोराड) वेबसाइट बना रखी है। इसमें सूचना देने वाले व्यक्ति का नाम, नंबर, मेल आइडी और संबंधित सूचना अंकित कर जैसे ही सबमिट किया जाता है कि वह मैसेज तुरंत शेखर के मोबाइल पर आता है। इस तरह इंटरनेट के जरिए भी शेखर को कोई 100 से अधिक घायल बेसहारा पशुओं के संबंध में सूचना मिल चुकी है। उन्होंने पशु रेस्क्यू सेवा का मुख्य कार्यालय मुरादाबाद में उत्तरांचल कॉलोनी मझोली दिल्ली रोड पर बना रखा है।

ऐसे मिली प्रेरणा
शेखर चार भाई-बहन हैं। दो बड़ी बहनें विवाहित हैं। छोटा भाई अनिल इलाहाबाद (प्रयागराज) में रहकर शिक्षक पात्रता परीक्षा की तैयारी कर रहा है। वह अमरोहा जिले में नाजिरपुर कलां के रहने वाले हैं। पिता रोहताश 20 बीघे के खेतिहर हैं। मां कमलेश देवी गृहणी हैं। इनके घर में सात कुत्ते पले हैं। जिनकी देखरेख मां करती हैं। शेखर ने बताया कि उनकी मां बेजुबान पशुओं को संरक्षण देने में पूरी मदद करती हैं।

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