काशीपुर: सर्विस ट्रिब्यूनल ने निरस्त किये एसएसपी व आईजी के आदेश

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काशीपुर, अमृत विचार। उत्तराखंड में सरकारी कर्मचारी अधिकारियों के सेवा संबंधी मामलों का निर्णय करने वाले विशेष न्यायालय (ट्रिब्यूनल) की नैनीताल पीठ ने एसएसपी ऊधमसिंह नगर और आईजी कुमाऊं नैनीताल के पुलिस कांस्टेबल विनोद खाती के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही में किये गये दंड आदेशों को निरस्त कर दिया।

ट्रिब्युनल वाइस चेयरमैन (ज्यूडिशियल) राजेन्द्र सिंह की बेंच ने कांस्टेबल विनोद खाती की याचिका पर एसएसपी के आदेश को सहायक पुलिस अधीक्षक/ पुलिस क्षेत्राधिकारी काशीपुर की द्वेष पूर्ण व गलत जांच पर आधारित और विधि विरुद्ध मानते हुए और आईजी के अपील आदेश को विवेक के इस्तेमाल किये बिना मानते हुये निरस्त किया है।

ऊधमसिंह नगर में तैनात कांस्टेबल विनोद खाती की ओर से अधिवक्ता नदीम उद्दीन एडवोकेट ने उत्तराखंड लोक सेवा अधिकरण की नैनीताल पीठ में याचिका दायर की थी। इसमें कहा गया था कि जब 2020 में वह पुलिस चौकी पतरामपुर थाना जसपुर में तैनात था तो दिनांक 7 सितंबर 2020 को गुरदीप सिंह के घर जंगली जानवर का मांस होने की सूचना मिलने पर याची द्वारा अपने कर्तव्यों का पूर्ण ईमानदारी व कर्मठता से पालन करते हुए उसके घर दबिश दी गयी परन्तु कोई वस्तु बरामद न होने पर इसकी सूचना अपने उच्च अधिकारी को दी गयी। इस प्रकरण में प्रारंभिक जांच सहायक पुलिस अधीक्षक/क्षेत्राधिकारी काशीपुर से करायी गयी।

जिन्होंने अपनी जांच आख्या में बिना स्वतंत्र साक्ष्यों और याची के पक्ष को विचार में लिये, बिना स्वतंत्र गवाहों व साक्ष्यों के याची द्वारा कोई वैधानिक कार्यवाही न करते हुए गुरदीप सिंह से रिश्वत प्राप्त कर छोड़ने का निष्कर्ष दे दिया। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने इस जांच आख्या को आधार बनाते हुये 22 अक्टूबर 2021 से कांस्टेबल की वर्ष 2021 की चरित्र पंजिका में परिनिन्दा प्रविष्टि अंकित करने का आदेश दे दिया।

कांस्टेबल द्वारा इसकी अपील आईजी कुमाऊं परिक्षेत्र नैनीताल को की गयी, लेकिन उन्होंने भी अपील पर निष्पक्ष रूप से विचार किये बगैर 14 दिसंबर 2022 से अपील को निरस्त कर दिया। अधिकरण के उपाध्यक्ष (न्यायिक) राजेन्द्र सिंह की पीठ ने नदीम के तर्कों से सहमत होते हुए सहायक पुलिस अधीक्षक/पुलिस क्षेत्राधिकारी की जांच को द्वेष पूर्ण और गलत माना। इसके आधार पर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ऊधमसिंह नगर द्वारा दिये गये दंड आदेश को विधि विरुद्ध मानते हुए निरस्त कर दिया।

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