बरेली: विधायकों में इसलिए बेचैनी… क्योंकि अब करना है सच का सामना
बरेली, अमृत विचार। एक दिन पहले प्रभारी मंत्री की बैठक में जिले के विधायकों के एकाएक बदले तेवरों ने उन अफसरों को भी हैरत में डाल दिया जिन्होंने अब तक सरकारी वादों के पीछे अपने हवाई दावों को दौड़ा रखा था। लोकसभा चुनाव ने यह सिलसिला भंग कर दिया।
चूंकि अब फिर जनता के बीच जाने का समय आ गया है जहां विधायकों को सच का सामना करना पड़ेगी, इसी आशंका ने उन्हें प्रभारी मंत्री की बैठक में उबलने को मजबूर कर दिया। यह सवाल विधायकों पर भी उठ रहा है कि सरकारी अस्पतालों की हालत इतनी ही खराब थी तो वे इतने सालों से चुप क्यों थे।
ग्रामीण क्षेत्रों में छुट्टा पशुओं और विकास कार्य न कराने की समस्याओं को लेकर ग्रामीण परेशान हैं। आईजीआरएस से लेकर संपूर्ण समाधान दिवस और अफसरों के जनता दर्शन में भी बड़ी संख्या में शिकायतें पहुंच रही हैं। अब उप स्वास्थ्य केंद्र और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में डाक्टरों की कमी भी मुद्दा बनने लगी है। शुक्रवार को कलेक्ट्रेट में प्रभारी मंत्री जयवीर सिंह की समीक्षा बैठक में भाजपा के कई विधायकों ने एक सुर में डाक्टरों की कमी के मुद्दे को जोरशोर से उठाया।
इससे साफ है कि लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए डाक्टरों की कमी से सत्ता पक्ष के विधायक अभी से चिंतित नजर आ रहे हैं। उन्हें लग रहा है कि जिस तरह से गांवों में मलेरिया, डेंगू फैल रहा है। कहीं गांवों में ग्रामीण डाक्टरों की कमी को लेकर चुनाव में न सवाल उठाने लगें। प्रभारी मंत्री जयवीर सिंह के समक्ष सांसद धर्मेंद्र कश्यप, विधायक डॉ. राघवेंद्र शर्मा, विधायक डॉ. डीसी वर्मा, विधायक डॉ. एमपी आर्य, विधायक संजीव अग्रवाल और शहर विधायक डाॅ. अरुण कुमार के भाई अनिल कुमार ने डाक्टरों की कमी से चिकित्सा सेवाएं प्रभावित होने का मामला जोरशोर से उठाया था।
वहीं, स्वास्थ्य विभाग ने प्रभारी मंत्री के समक्ष जिले में डाक्टरों के स्वीकृत पदों और कार्यरत पदों के आंकड़े प्रस्तुत किए। उन आंकड़ों के अनुसार महिला रोग विशेषज्ञों की सबसे ज्यादा कमी बनी हुई है। 19 पदों में से सिर्फ छह पदों पर महिला रोग डाक्टरों की नियमित तैनाती है। जिले में डाक्टरों के सभी लेबल के 501 पद स्वीकृत हैं। इनमें से 171 पद खाली हैं। इसके साथ पैरामेडिकल के भी 77 पद खाली हैं।
प्रभारी मंत्री को डाक्टरों की उपलब्धता के यह आंकड़े दिखाए गए थे
सीएमओ के अधीन कुल डॉक्टरों की संख्या
विशेषज्ञ नियमित-संविदा(स्वीकृत पद) नियमित-संविदा ( कार्यरत)
महिला रोग विशेषज्ञ 19-3 6-0
बाल रोग विशेषज्ञ 3-3 2-2
निश्चेतक 16-3 1-1
कुल 38-9 9-3
मुख्य चिकित्सा अधीक्षक के अधीन डॉक्टरों की संख्या
विशेषज्ञ नियमित-संविदा (स्वीकृत पद) नियमित-संविदा ( कार्यरत)
महिला रोग विशेषज्ञ 5-3 3-2
बाल रोग विशेषज्ञ 3-4 1-4
निश्चेतक 6-4 5-1
कुल 14- 11 9-7
चिकित्साधिकारियों के अधीन डॉक्टरों की संख्या
विशेषज्ञ कुल स्वीकृत पद कार्यरत पद
अपर मुख्य चिकित्साधिकारी (लेबल-4) 23 5
उप मुख्य चिकित्साधिकारी (लेबल-3) 36 15
चिकित्साधिकारी (लेबल-2) 21 19
चिकित्साधिकारी (लेबल-1) 157 118
दंत शल्यक 14 13
चिकित्साधिकारी सामुदायिक स्वास्थ्य 48 26
संविदा चिकित्साधिकारी 130 106
कुल 429 302
पैरामेडिकल स्टाफ के पदों का विवरण
पदनाम स्वीकृत पद कार्यरत रिक्त पद
चीफ फार्मासिस्ट 9 8 1
फार्मासिस्ट 111 85 26
लैब टेक्नीशियन 27 5 22
वरिष्ठ लैब टेक्नीशियन 1 1 0
एक्स-रे टेक्नीशियन 18 4 14
डाक रूम सहायक 17 2 15
ये पद बरेली में स्वीकृत ही नहीं हैं
- प्रभारी अधिकारी फार्मेसी
- ईसीजी टेक्नीशियन
- फिजियोरेपिस्ट
- आक्यूपेशनल
क्या कहते हैं विधायक बिथरी
जिले में चिकित्सकों की कमी एक माह में पूरी हो जाएगी। कोई भी सीएचसी और पीएचसी के साथ ही उपकेन्द्र भी डाक्टरों से खाली नहीं रहेगा। जो मेडिकल छात्र एमबीबीएस करने के बाद एमडी करते हैं और उसमें चयन नहीं हो पाता तो एक साल वह जॉब के साथ पढ़ाई भी करते हैं। वह डॉक्टर भी बरेली को मिलेंगे। डीएम और सीएमओ से भी इंटरव्यू करके डाक्टरों की भर्ती करने की बात उपमुख्यमंत्री ने कही है। इसलिए डॉक्टरों की कमी नहीं होगी।- डा. राघवेन्द्र शर्मा, विधायक बिथरी चैनपुर
जनता पहले ही दिखा चुकी है उग्र तेवर
जनता को सरकारी तंत्र में किस तरह के हालात का सामना करना पड़ रहा है, यह वही जानती है। अब उसका सब्र जवाब दे रहा है और हाल ही में कई वाकये हो चुके हैं, जब उसने कद्दावर जनप्रतिनिधियों का लिहाज भी नहीं किया। कुछ ही दिन पहले पशुधन मंत्री धर्मपाल सिंह को सड़क पर आवारा पशु छोड़कर किसानों ने काफी देर खड़ा रखा था। इसी तरह आंवला सांसद धर्मेंद्र कश्यप को भी एक कार्यक्रम में ग्रामीणों के भारी विरोध का सामना करना पड़ा था। एक युवक से मारपीट तक हो गई थी।
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