फिर छिड़ा युद्ध
इजराइल और फलस्तीन के बीच एक बार फिर से युद्ध छिड़ गया है। शनिवार को गाजा स्थित संगठन हमास ने पांच हजार से ज्यादा रॉकेट इजराइल पर दागे। वहीं इजराइल ने भी युद्ध का ऐलान कर दिया है। इस तरह लगभग दो साल तक शांति रहने के बाद एक बार फिर से मध्य पूर्व में खूनी संघर्ष की शुरुआत हो चुकी है। 2021 में भी हमास और इजरायल के बीच जंग हुई थी, जो 10 दिनों तक चली थी। वर्तमान में हुए हमलों की वजह से इजराइल में मरने वालों की तादाद 600 के पार जा चुकी है, जबकि 2000 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। गाजा पट्टी में 313 लोग मारे गए हैं। इस संघर्ष में दुनिया के देश गुटों में बंट गए हैं।
हमास के हमले को इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि ये महज उकसावा नहीं, बल्कि जंग है और दुश्मन को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। इजराइल पर हुए हमले के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रतिक्रिया के साथ-साथ भारत की ओर से कई तरह के कदम भी उठाए गए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि कठिन समय में भारत इजराइल के साथ है।
अमेरिका ने कहा कि गाजा में तनाव के बीच अमेरिका इजरायल को करीबी और गहरी खुफिया जानकारी साझा करना जारी रखेगा। रूस के विदेश मंत्रालय ने हमास के हमले के बाद इजरायल और फिलिस्तीनी फोर्स से सशस्त्र संघर्ष रोकने की अपील की है। चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि वो फलस्तीन और इजरायल के बीच तनाव और हिंसा बढ़ने से चिंतित है।
विशेषज्ञों के मुताबिक इजराइल और फलस्तीन संघर्ष, मध्य-पूर्व (अर्थात पश्चिम एशिया) में अस्थिरता बढ़ा देगा और इसके भयावह परिणाम हो सकते हैं। इस संघर्ष से मध्य-पूर्व में फिर से आतंकवाद गति पकड़ सकता है। हमास ने खासतौर पर दक्षिण और मध्य इजराइल को निशाना बनाया है। कहा जा रहा है कि हमास ने सुनियोजित तरीके से ये हमला किया, जिसके लिए महीनों से तैयारी की गई होगी। क्योंकि पूरे इजरायल में यहूदी शबात मना रहे हैं।
विशेषज्ञों की राय है कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को तुरंत कदम उठाना चाहिए ताकि दोनों पक्षों के बीच शांति बहाल हो सके। अमेरिका को दोनों पक्षों के बीच बातचीत की मध्यस्थता करनी चाहिए। बहरहाल, निश्चित रूप से ये विवाद तुरंत थमता तो नहीं दिख रहा है क्योंकि समर्थन को लेकर देश बंट गए हैं। पश्चिमी देशों ने इज़रायल को समर्थन देने का वादा किया है। जबकि अधिकतर अरब देश हमास के हमले को जायज ठहराने की कोशिश कर रहे हैं।
