बरेली: करंट से झुलसे लोगों को प्लास्टिक सर्जरी का खर्च नहीं दे रहा विभाग, इलाज कराने का किया था वादा

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Edited By Amrit Vichar
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अलीगंज में हाईटेंशन लाइन के करंट से झुलसे थे तीन लोग, पूरा इलाज कराने का किया था वादा

बरेली, अमृत विचार। अलीगंज इलाके में हाईटेंशन लाइन के करंट से से झुलसे तीन लोगों का पूरा इलाज कराने के वादे से बिजली विभाग के अधिकारी मुकर गए हैं। पीड़ितों का आरोप है कि इसी वादे के कारण वे प्लास्टिक सर्जरी कराने के लिए रामपुर बाग के एक अस्पताल में भर्ती हुए थे, जहां दो की सर्जरी हो चुकी है। अब अफसर पैसा देने से इन्कार कर रहे हैं। इस वजह से तीसरे युवक की सर्जरी भी अटक गई है।

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हादसे के बाद बिजली विभाग के अधिकारियों की ओर से साढ़े चार लाख रुपये दिए गए थे जिनसे घायलों का प्राथमिक इलाज कराया गया था। इसके बाद वे प्लास्टिक सर्जरी के लिए अस्पताल में भर्ती हो गए थे। पीड़ितों के परिवारों का कहना है कि अधिकारियों ने वादा किया था कि वे प्लास्टिक सर्जरी का भी खर्च देंगे लेकिन अब वे और पैसा देने से इन्कार कर रहे हैं।

बता दें कि अलीगंज में सात सितंबर को कृष्ण जन्माष्टमी शोभायात्रा के दौरान डीजे हाइटेंशन लाइन से टकरा गया था जिसके बाद अर्पित गुप्ता, उज्ज्वल गुप्ता और रोहित गोस्वामी करंट से गंभीर रूप से झुलस गए थे। तीनों कई दिन आईसीयू में भर्ती रहे। नेताओं के दबाव में बिजली विभाग ने यहां का खर्च तो उठाया लेकिन प्लास्टिक सर्जरी का खर्च देने का वादा करने के बाद भी अब तक कोई पैसा नहीं दिया है। पीड़ित परिवारों के मुताबिक दो युवकों की सर्जरी में एक-एक लाख का खर्च हुआ है।
शटडाउन में सप्लाई शुरू करने का था आरोप, जांच भी अब तक लटकी
घटना के बाद गांव के लोगों ने शटडाउन के बाद भी सप्लाई शुरु करने का आरोप लगाते हुए सबस्टेशन पर पथराव किया था। उनका कहना था कि हर साल शोभायात्रा निकलने के समय तक बिजली की सप्लाई बंद रहती थी लेकिन सात सितंबर को शटडाउन के बावजूद सप्लाई शुरू कर दी गई। घटना के कैबिनेट मंत्री धर्मपाल सिंह मौके पर पहुंचे थे। उन्होंने बिजली अधिकारियों को घायलों के इलाज और डीएम को जांच कराने के निर्देश दिए थे। एसई अशोक चौरसिया ने इसके बाद जांच समिति बनाकर 15 दिन में रिपोर्ट मांगी थी लेकिन एक महीने से ज्यादा समय होने के बाद भी जांच पूरी नहीं हो सकी है।

जांच टीम से 15 दिन में रिपोर्ट मांगी गई थी लेकिन अब तक नहीं मिली है। जांच करने वाली टीम से पता किया जाएगा कि रिपोर्ट अब तक क्यों नहीं दी गई--- अशोक कुमार चौरसिया, अधीक्षण अभियंता।

इलाज के लिए हम करीब सात लाख रुपये दे चुके हैं। अब हमारी क्षमता समाप्त हो चुकी है। आगे का इलाज अब परिवार के लोग खुद करा लें--- ओपी पाल, अधिशासी अभियंता आंवला।

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