अड़ियल रवैया
चीन भारत के खिलाफ अपनी चालबाजियों से बाज नहीं आ रहा है। पहले राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री समेत वर्तमान और पूर्व सेना प्रमुखों की जासूसी का मामला सामने आया था। अब लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर बातचीत के लिए हामी भरने के बावजूद चीन ने कमांडर स्तर की बातचीत तय नहीं की है, जबकि इस हफ्ते …
चीन भारत के खिलाफ अपनी चालबाजियों से बाज नहीं आ रहा है। पहले राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री समेत वर्तमान और पूर्व सेना प्रमुखों की जासूसी का मामला सामने आया था। अब लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर बातचीत के लिए हामी भरने के बावजूद चीन ने कमांडर स्तर की बातचीत तय नहीं की है, जबकि इस हफ्ते की शुरुआत में यह बातचीत होनी थी। वह भी तब जब दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के बीच मास्को में सीमा पर तनाव कम करने और वार्ता पर सहमति बनी थी।
वार्ता नहीं करने के पीछे चीन की रणनीति भारत की सैन्य क्षमता का आकलन करना हो सकती है ताकि उसी लिहाज से वह अपनी चाल चल सके। यह भी चीन को मालूम है कि पिछले कुछ समय में भारतीय सैनिकों ने सीमा पर अपनी मजबूत स्थिति बना ली है। भारत अब सीमा पर बोफोर्स तोप तैनात करने की तैयारी में भी जुटा है। इन सब बातों से चीन बौखलाया हुआ है और शायद इसी बौखलाहट में वह वार्ता की टेबल पर नहीं आना चाहता है।
पहले चीन वार्ता करे और फिर उस पर अमल करे इस बात पर भी संदेह है। पिछले अनुभवों को देखते हुए यह समझा जा सकता है जब कमांडर स्तर पर वार्ता के बावजूद चीनी सैनिकों ने संघर्ष विराम का खुला उल्लंघन कर भारतीय सैनिकों को नुकसान पहुंचाया है। डोकलाम में भारत और चीन के सैनिकों के बीच संघर्ष भी इसी का नतीजा था।
भारत को भी इस मुद्दे पर आक्रामक नीति अपनानी होगी ताकि चीन अपनी किसी भी चालबाजी में कामयाब नहीं हो सके। भारतीय सैनिकों की सैन्य क्षमता के बारे में भी चीन को अच्छी तरह पता है और डोकलाम संघर्ष के बाद चीनी सैनिकों को साफ तौर पर पता चल गया है कि पारंपरिक युद्ध में भारतीय सेना की क्षमता का उसके पास कोई जवाब नहीं है। लिहाजा वह मामले को उलझाए रखना चाहता है।
दूसरी तरफ चीन अन्दर ही अन्दर भारत के खिलाफ रणनीति बनाने में जुटा हुआ है। रणनीतिक मुद्दों पर वह पाकिस्तान के साथ मिलकर भारत को घेरने की कोशिश में लगा रहता है। भारत की कोशिश अब आक्रामक रवैया अपनाने की है ताकि चीन को यह बताया जा सके कि किसी भी लिहाज से भारत चीन से पीछे नहीं है। भारतीय वायु सेना के बेड़े में राफेल लड़ाकू जहाज शामिल होने के बाद से भी चीन बौखलाया है। उसकी यह बौखलाहट सीमा पर आए दिन छोटी-मोटी झड़प के रूप में नजर आती रहती है, लिहाजा भारत को सतर्क रहने की जरूरत है।
