हल्द्वानी: तराई के जंगलों में वन गुर्जरों के खेती पर पाबंदी

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

हल्द्वानी, अमृत विचार। जंगलों के खत्तों में अवैध ढंग से संचालित हो रहे मदरसों के खुलासे के बाद जंगलात सख्त हो गया है। जंगलों में वन गुर्जरों के खेती के नियम को भी सख्ती से लागू कर दिया गया है। 

तराई केंद्रीय वन डिवीजन के भूढ़ खत्ता और नहर खत्ता में अवैध ढंग से मदरसा व मस्जिद संचालित होने का खुलासा हुआ था। तब वन अधिकारियों में खलबली मची हुई थी। बाद में वन विभाग ने बुलडोजर चलाकर इन भवनों को ध्वस्त कर दिया था। अब वन विभाग वन गुर्जरों पर शिकंजा कस दिया है।

वन डिवीजन में 7 खत्ते हैं। इन खत्तों में गुर्जर पशुपालन के साथ-साथ खेती करते हैं। इससे तकरीबन 10 एकड़ से अधिक भूमि पर खेती होती थी। वहीं वन कर्मचारियों को वनीकरण में परेशानी होती है। वन विभाग के नियमानुसार में जंगलों में गैरवानिकी काम नहीं हो सकते हैं। अब वन विभाग ने इस नियम को सख्ती से लागू कर दिया है। सभी खत्तों में गुर्जरों को खेती करने से मना कर दिया है। इस तरह बची 10 एकड़ भूमि पर अलग-अलग प्रजाति के पौधे रोपने की योजना है। 

5 से 55 बीघा हो जाती है जमीन 
वन अधिकारियों की मानें तो उदाहरण के तौर पर शुरुआत में एक गूर्जर रहता था। तब 5 बीघा जमीन पर खेती करता था। बाद में इस गुर्जर के 10 बच्चे हो गए। इन बच्चों ने बड़े होकर खेती के लिए 5-5 बीघा जमीन और हथिया ली। इस तरह 10 बच्चों ने कुल 50 और पुरानी 5 बीघा जमीन मिलाकर 55 बीघा भूमि पर खेती शुरू कर दी। इससे जंगलों के अंदर जंगल खत्म होते जा रहे हैं और कृषि भूमि बढ़ती जा रही है। 

तराई केंद्रीय वन डिवीजन में तकरीबन सात खत्ते हैं। सभी खत्तों के गुर्जरों पर खेती करने पर रोक लगा दी गई है। वन बीट से लेकर रेंज अधिकारियों को इस नियम का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए हैं।
= शशि देव, उप प्रभागीय वनाधिकारी, तराई केंद्रीय वन डिवीजन हल्द्वानी


वन गूर्जरों के समर्थन में भारतीय किसान महासभा ने सौंपा ज्ञापन 
हल्द्वानी। भारतीय किसान महासभा ने वन गुर्जरों को उजाड़े जाने के विरोध में एसडीएम दफ्तर में ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में उन्होंने कहा कि तराई केंद्रीय वन प्रभाग के भूढ़ा खत्ता, नहर खत्ता, टांडा, ढिमरी, तिलपुरी में बच्चों के बने स्कूलों को तहस-नहस किया गया है। इनमें 100 से अधिक बच्चे अध्ययनरत थे।

आरोप लगाया कि सरकार स्कूल की सुविधा उपलब्ध कराना तो दूर रहा निजी प्रयासों से बनाए स्कूलों को भी तोड़ दे रही है। टांडा व नहर खत्ता में गुर्जरों की तारबाड़ तोड़ कर साग-सब्जी व चारा रौंद दिया। ढिमरी खत्ता में गूर्जर को घर को तहस-नहस किया।  यह संविधान के तहत मिले नागरिकों के अधिकार का उल्लंघन है। आरोप लगाया कि भाजपा सरकार वनों से लेकर गांव-शहर तक गरीबों को उजाड़ने का काम कर रही है। इस दौरान बहादुर सिंह जंगी, डॉ. कैलाश पांडेय, मो. यामीन, मो. शफी, शमशाद मौजूद रहे।

 

 

संबंधित समाचार