Israel Hamas War: चर्म निर्यातकों की घरेलू बाजार पर टिकी उम्मीद, युद्ध के कारण ऑर्डर निरस्त होने से हो रहा घाटा
कानपुर के चर्म निर्यातकों की घरेलू बाजार पर टिकी उम्मीद।
कानपुर के चर्म निर्यातकों की घरेलू बाजार पर टिकी उम्मीद। इजराइल-हमास युद्ध के कारण लगातार ऑर्डर निरस्त हो रहे। त्योहार के मौके पर बड़े शहरों में बिक्री के लिए उत्पाद तैयार हो रहे।
कानपुर, अमृत विचार। इजराइल और हमास के बीच छिड़ी जंग से शहर के चमड़ा निर्यातकों के करोड़ों के ऑर्डर निरस्त हो रहे हैं। निर्यातकों के अनुसार चार सौ करोड़ का निर्यात प्रभावित हो सकता है। ऐसे में चमड़ा करोबारियों ने घरेलू बाजार की ओर रुख किया है। त्योहार के मौके पर लगभग सौ करोड़ का व्यापार करने की योजना बनाई गयी है।
चमड़ा निर्यातकों के आर्डर रुकने से छोटे व्यापारियों ने घरेलू बाजार में तेजी दिखानी शुरू कर दी है। देश के बड़े शहरों में रिटेल के व्यापारियों से संपर्क साधा जा रहा है। चमड़ा कारोबारियों का कहना है कि घरेलू बाजार में सर्वाधिक खपत छोटे आइटम की होती है।
इनमें चमड़े के लैपटॉप बैग, बेल्ट, लेदर माउस पैड, लेदर कोस्टर, जूता, चप्पल, सैंडिल, गिफ्ट आइटम और की-चेन जैसे उत्पाद हैं। चमड़ा कारोबारियों ने एक दर्जन ऐसे उत्पादों का चयन किया है, जिनकी मांग घरेलू बाजार में अधिक है। वैश्विक परिस्थितियों के कारण होने वाले घाटे को त्योहार के मौके पर इन उत्पादों की बिक्री बढ़ाकर कुछ कम करने की तैयारी है।
एक हजार करोड़ तक का हो सकता नुकसान
शहर में चमड़ा कारोबार से जुड़े लगभग तीन सौ छोटे व्यापारी हैं। यह व्यापारी बड़े कारोबारियों के निर्यात ऑर्डर पूरे करने के साथ घरेलू बाजार के लिए भी उत्पाद बनाते हैं। चर्म निर्यातकों ने बताया कि सिर्फ इजराइल और खाड़ी देशों में शहर से करीब आठ सौ करोड़ का निर्यात होता है। इसके अलावा क्रिसमस पर यूरोप के बाजारों में भी शहर से काफी चमड़े का सामान जाता है। रूस-यूक्रेन युद्ध और अब इजराइल-हमास जंग से लगभग एक हजार करोड़ रुपये का निर्यात प्रभावित हो सकता है।
वैश्विक बाजार में हलचल है। निर्यात ऑर्डर कैंसिल हो रहे हैं। ऐसे में चमड़ा उद्योग के पास अब घरेलू बाजार ही विकल्प है। जब तक निर्यात पटरी पर नहीं आएगा, कोई नहीं बता सकता कि शहर के चमड़ा कारोबारियों को कितना नुकसान होगा।- डॉ. जफर नफीस, निदेशक, सना इंटरनेशनल एक्जिम
छोटे कारोबारी के सामने घरेलू बाजार के अलावा कोई दूसरी उम्मीद नहीं है। व्यापारी काम नहीं करेगा तो करेगा क्या, किसी को अंदाजा नहीं था कि अचानक चमड़े का वैश्विक बाजार इस तरह से टूट जाएगा। तीन सालों से लगातार घाटा उठा रहे हैं।- मोहम्मद जुबेर, निदेशक, अलीशा इंटरनेशनल
