Ramleela 2023: मेघनाथ के शीश को गोद में रख सती हो गई सुलोचना... यहाँ रावण का पुतला जलाया नहीं गिराया जाता

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Edited By Amrit Vichar
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इटावा में मेघनाथ के शीश को गोद में रख सती हो गई सुलोचना।

इटावा में मेघनाथ के शीश को गोद में रख सुलोचना सती हो गई। कुंभकरण ने नगर की सड़कों पर उत्पाद मचाया। राम लक्ष्मण द्वारा दुर्मुख, कुंभकरण, मेघनाथ का वध हुआ।

इटावा, अमृत विचार। मैदानी रामलीलाओं में अपनी अमिट छवि बना चुकी यहां की ऐतिहासिक मैदानी रामलीला में आज कुंभकर्ण ने दोपहर से ही अपने भतीजे मेघनाद सहित नगर की सड़कों पर कोहराम मचाते राम-लक्ष्मण के विश्राम स्थल नरसिंह मंदिर पर हमला बोल दिया। दुर्मुख और अतिकाय जैसे राक्षसराज भी उसके साथ थे।

रामदल की ओर से वानर दल ने राम-लक्ष्मण की अगुआई में मोर्चा संभाल लिया। इसके साथ ही भीषण संग्राम शुरू हो गया और परंपरागत तरीके से इसका प्रदर्शन नगर की भीड़ भरी सड़कों पर धनुष-बाण, तीर -तलवारों, भाला-बरछी आदि प्राचीन अस्त्र-शस्त्रों से हुआ।

युद्ध करते दोनो दल करीब चार घंटे में रामलीला मैदान पहुंचे। शंखवार समाज द्वारा निकाले जाने वाले जवारे शोभा यात्रा का मेघनाद और कुंभकर्ण ने नगर के बड़ा चौराहा पर पूजन किया गया। मैदान पहुंचते ही भगवान राम से युद्ध करता हुआ दुर्मुख मारा गया। इसके बाद लकाधिपति रावण की आज्ञा पर कुंभकर्ण राम से सीधा युद्ध छेड़ देता है।

फरसे, भाले, बरछी, तीर, तलवारों से लगभग डेढ़ घण्टे तक युद्ध करते हुए कुम्भकर्ण का राम के हाथों प्राणान्त होता है।जब रावण अपने छोटे भाई कुंभकर्ण का शव लंका में देखता है तो रावण विलख उठता है। तब रावण पुत्र अतिकाय सौगंध लेकर अपने पिता से कहता है जैसे आप अपने छोटे भाई के दुःख में तड़प रहे हो ,उसी तरह मैं लक्ष्मण को मारकर राम को दुःख के सागर में डुबो दूंगा।

अतिकाय अग्निआस्त्रों की बरसात करते हुए लक्ष्मण को ललकारता है। राम की आज्ञा पर लक्ष्मण अतिकाय से युद्ध करने लगते हैं, लेकिन अतिकाय मायावी शक्तियों के प्रभाव से अपना शरीर विशाल कर लेता है ।तब हनुमान लक्ष्मण को अपने कंधे पर बैठाकर अतिकाय के बराबर कर लेते हैं और लक्ष्मण के तीक्ष्ण वाण से अतिकाय का वध हो जाता है।

इसके बाद लक्ष्मण व मेघनाद के बीच घमासान युद्ध आरंभ हुआ। शेषनाग अवतारी लक्ष्मण ने ब्रह्मास्त्र का प्रयोगकर मेघनाद का वध कर दिया। मेघनाद की मौत की खबर सुनते ही रावण का गुस्सा सातवें आसमान पर चढ़ गया और उसने राम को ललकारा। उधर मेघनाद की पत्नी सुलोचना अपने पति की मृत्यु की जानकारी होने पर विलाप करने लगी।

कुछ समय के बाद पति मेघनाद के शीश को गोद में रखकर सुलोचना अग्नि में बैठ सती हो गई। सती सुलोचना का मार्मिक दृश्य देख लीला प्रेमियों की आंखें छलछला गईं। इस दौरान भगवान श्रीराम के जयकारे से वायुमंडल गूंज उठा। देर रात तक बड़ी संख्या में लीलाप्रेमी जमे रहे।स्थानीय कलाकारों द्वारा बहुत ही आकर्षक तरीके से लीलाओं का प्रदर्शन किया गया।

यहाँ रावण का पुतला जलाया नहीं गिराया जाता 

जसवंतनगर,  मधुसूदन यादव। यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर के रूप में घोषित जसवंतनगर की ख्याति प्राप्त मैदानी रामलीला अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी अलग पहचान रखती हैl  सामान्यतः सभी जगह रामलीला के कार्यक्रम मंचो से होते हैं किंतु भारतवर्ष के उत्तर प्रदेश राज्य के इटावा जिले में स्थित जसवंतनगर की रामलीला की लीलाएं सिर्फ मैदान में होती हैं जो देश के लोगों को ही नहीं अपितु विदेशी दर्शकों को भी अपनी और आकर्षित करती हैंl

यहां की मैदानी रामलीला के पात्रों को इस तरह सजाया सवारा जाता है कि जब वो अपनी लीला दिखाते हैं तो ऐसा महसूस होता है कि मानो हम सभी त्रेता युग में हैंl प्रभु श्री राम लक्ष्मण हनुमान के स्वरूप को देखकर दर्शक अपने को धन्य समझते हैंl रामदल और रावण दल के मैदानी युद्ध में आधुनिक लाइटों से सुसज्जित अस्त्र शस्त्र का प्रयोग लीलाओं को रूचिकर व आकर्षक बनाता ही है बल्कि अपनी अलग पहचान दिलाता हैl

उत्तर प्रदेश संस्कृत विभाग द्वारा यहां की रामलीला पर कई शोध हुए l नगर के लोग जहां मर्यादा पुरुषोत्तम राम को अपने जीवन का आदर्श मानते हैं वही लोगों के मन में रावण की महत्वा भी कम नहीं है क्योंकि यहां रावण की विदुता पराक्रम और ज्ञान को पूजा जाता है l

रावण के पुतले के अवशेषों को पाने की रहती है होड़ 

जसवंतनगर की रामलीला में रावण का विशालकाय पुतला बांस की लकड़ियों खपच्चे से तैयार किया जाता है lयहां रावण वध के दौरान रावण के पुतले को जलाया नहीं जाता बल्कि गिराया जाता है lप्रभु श्री राम जैसे ही रावण की नाभि पर धनुष से तीर छोड़ते हैं रावण का पुतला गिर जाता है और लोगों में उसके अवशेषों को पाने होड़ लग जाती है lऐसी मान्यता है कि रावण के अवशेष को घर लाने से प्रेत बाधा व्याधि बुरी नजर से बचाव बीमारी दूर होती हैl

यूं ही नहीं होती रावण की पूजा 

नगर के वासी रावण को महान विद्वान, प्रकांड पंडित महाज्ञानी, कुशल राजनीतिज्ञ महाप्रतापी, महापराक्रमी योद्धा और अत्यंत बलशाली मानते हैंl  जब नगर की सड़कों पर राम दल और रावण दल युद्ध करते हुए रामलीला मैदान की तरफ जाते हैं तब जगह जगह रावण की पूजा लंकेश की जय नारों के साथ होती है lवही रावण युद्ध में विजय की कामना के साथ रास्ते में मिलने वाले मंदिरों में पूजा अर्चना कर आगे बढ़ता हैl

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