Kanpur Chandra Grahan: शरद पूर्णिमा और चंद्रग्रहण आज, शाम 4.05 बजे से सूतक, मंदिरों के पट रहेंगे बंद, यह अवश्य करें
कानपुर में शरद पूर्णिमा और चंद्रग्रहण शनिवार को है।
कानपुर में शरद पूर्णिमा और चंद्रग्रहण शनिवार को है। सूतक के दौरान मंदिरों के पट बंद रहेंगे। शरद पूर्णिमा का पूजन भी सूतक से पहले होगा।
कानपुर, अमृत विचार। साल का आखिरी चंद्र ग्रहण 28 अक्टूबर को आश्विन मास की पूर्णिमा तिथि पर लगेगा। इस मास की पूर्णिमा तिथि को शरद पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। इस चंद्र ग्रहण को भारत में देखा जा सकेगा। इसलिए इसका सूतक काल मान्य होगा।
ज्योतिषाचार्य मनोज कुमार द्विवेदी के मुताबिक वैदिक पंचांग के अनुसार यह चंद्र ग्रहण भारत में शनिवार रात 01. 06 बजे लगेगा जो रात के 2 बजकर 22 मिनट पर समाप्त होगा। इस चंद्र ग्रहण का सूतक काल ग्रहण के 9 घंटे पहले शुरू हो जाएगा। इस तरह शाम 4 बजकर 5 मिनट से सूतक लग जाएगा जो ग्रहण की समाप्ति तक चलेगा। सूतक के समय से ही मंदिरों के पट बंद हो जाएंगे जो ग्रहण के बाद खुलेंगे।
आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि का विशेष महत्व होता है। इस पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा या कोजागरी पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है। इस दिन देवी लक्ष्मी की पूजा और खीर बनाकर चंद्रमा की रोशनी में रखने का खास महत्व होता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शरद पूर्णिमा की रात देवी लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और घर-घर जाकर यह देखती हैं कि शरद पूर्णिमा पर कौन जाग रहा है। इस कारण से शरद पूर्णिमा को कोजागर पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है।
सूतक शुरू होने से पहले पूजा-पाठ कर लें
शरद पूर्णिमा पर देवी लक्ष्मी की पूजा और खुले आसमान के नीचे खीर रखने और फिर उसे अगली सुबह खाने का विशेष महत्व होता है। लेकिन इस बार शरद पूर्णिमा पर चंद्र ग्रहण का साया रहेगा ऐसे में चंद्र ग्रहण का सूतक शुरू होने से पहले पूजा-पाठ जरूर कर लेना चाहिए। ग्रहण की समाप्ति के बाद मंत्रों का जाप करें और दान-पुण्य करें।
ग्रहण की समाप्ति के बाद खीर बनाएं
धार्मिक मान्यता है क्या शरद पूर्णिमा पर खीर बनाने और उसे चांद की रोशनी में रखने से कई तरह के औषधि गुण आ जाते हैं लेकिन इस बार शरद पूर्णिमा पर चंद्र ग्रहण भी लगेगा। इस वजह से ग्रहण की समाप्ति के बाद खीर बनाना ज्यादा शुभ रहेगा। ऐसी मान्यता है कि ग्रहण और सूतक काल के दौरान न तो खाना बनाया जाता है और न ही खाना खाया जाता है। ग्रहण के दौरान खाने की सभी चीजों में तुलसी के पत्ते जरूर डालें।
मंत्रों का जाप अवश्य करें
ग्रहण काल में मंत्रों का जाप करना चाहिए। हालांकि सूतक काल और ग्रहण काल में मूर्ति का स्पर्श नहीं करना चाहिए। इस दौरान घर के मंदिर के पट बंद कर दें।
