Kanpur News: टेफ्को के पास से बनेगा गंगा पर पुल, शासन को प्रस्ताव, UPSIDA ने लिखा NHI के चेयरमैन को पत्र

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कानपुर में टेफ्को के पास से गंगा पर पुल बनेगा।

कानपुर में सरसैया घाट की जगह टेफ्को के पास प्रस्तावित फोरलेन पुल का प्रस्ताव शासन को भेज दिया गया है। शासन स्तर से हरी झंडी मिलने के बाद उप्र सेतु निर्माण निगम डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनाएगा।

कानपुर, अमृत विचार। सरसैया घाट की जगह टेफ्को के पास प्रस्तावित फोरलेन पुल का प्रस्ताव शासन को भेज दिया गया है। शासन स्तर से हरी झंडी मिलने के बाद उप्र सेतु निर्माण निगम डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनाएगा। साथ ही वित्त पोषण कहां से होगा, इस पर भी मंथन शुरू हो गया है।  

इस प्रोजेक्ट के लिए उप्र राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण यानि यूपीसीडा को बजट देना था लेकिन अभी तय नहीं हुआ कि बजट देगा या नहीं। बजट न देना पड़े इसीलिए प्राधिकरण के सीईओ ने एनएचएआई के चेयरमैन को पत्र लिखा है और प्रोजेक्ट को पुल का हिस्सा मानते हुए बजट देने का आग्रह किया है। इस पुल के निर्माण की योजना प्राधिकरण ने आठ साल पहले तैयार की थी। तब इसे सरसैया घाट पर बनाया जाना था।

विधानसभा चुनाव से पहले इसका शिलान्यास होना था, लेकिन किन्हीं कारणों से नहीं हो सका। सेतु निर्माण निगम ने इसका एस्टीमेट तैयार किया था। तब लागत 5, 03, 75,51,000 रुपये थी जो अब बढ़कर 5,38,10,42,000 रुपये हो गई। हालांकि अब नए सिरे से डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनेगी क्योंकि टेफ्को के पास से निर्माण होने पर ट्रांसगंगा सिटी के पास उतारने पर लंबाई बढ़ जाएगी।

इसके बन जाने से सिविल लाइंस, गुमटी, दर्शनपुरवा, जरीब चौकी, घंटाघर, चमनगंज, प्रेम नगर आदि इलाकों के लोग आसानी से लखनऊ और उन्नाव आ जा सकेंगे। उन्हें जाजमऊ या फिर नवाबगंज से बैराज होते हुए नहीं जाना पड़ेगा। ट्रांसगंगा सिटी की वीआईपी रोड से सीधी कनेक्टिविटी होने पर वहां औद्योगिक विकास भी खूब होगा।

वैसे तो प्राधिकरण ने पहले इस पुल के निर्माण के लिए भूमि के मूल्य में इसकी लागत जोड़ दी थी। तब अनुमान 450 करोड़ रुपये का लगाया गया था, लेकिन लागत बढ़ गई। यही वजह है कि वहां भूखंड लेने वाले लोग चाहते हैं कि प्राधिकरण ही पुल बनाए, लेकिन सीईओ की कोशिश है कि इसे रिंग रोड का हिस्सा मानते हुए बजट एनएचएआई दे दे।

अब शासन स्तर से ही तय होगा कि प्राधिकरण पूरा पैसा देगा या एनएचएआई से मांगा जाएगा। अगर एनएचएआई नहीं देता है तो पीडब्ल्यूडी, केडीए और यूपीसीडा मिलकर इसका निर्माण करा सकते हैं। सांसद सत्यदेव पचौरी का कहना है कि एस्टीमेट बन गया है। इसे मंजूरी दिलाने के लिए पीडब्ल्यूडी मंत्री से बात करेंगे।

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