Allahabad High Court: बांके बिहारी मंदिर कॉरिडोर मामले में एक और याचिका दाखिल
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट में वृंदावन बांके बिहारी मंदिर के लिए सार्वजनिक शौचालयों, उद्यान-फव्वारों, वीआईपी प्रतीक्षालय आदि के निर्माण के लिए विभिन्न मंदिरों और कुंज गलियों को नष्ट करने की प्रस्तावित योजना के खिलाफ एक जनहित याचिका दाखिल की गई है।
कुंज गलियों को करोड़ों हिंदुओं की धार्मिक विरासत मानते हुए अधिवक्ता प्रियंका मिश्रा, अरुशी बिड़ला और उत्कर्ष बिड़ला के माध्यम से पंकज सारस्वत द्वारा वर्तमान याचिका दाखिल की गई है, जिसमें कुंज गलियों को ध्वस्त कर नवनिर्माण करने की योजना को संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत हिंदुओं के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन माना जा रहा है।
जनहित याचिका में कहा गया है कि कुंज गलियां भगवान कृष्ण और राधा जी की किशोरावस्था की लीलास्थल है। याचिका में आगे तर्क दिया गया है कि बांके बिहारी महाराज के मंदिर के लिए एक विशाल कॉरिडोर बनाने की योजना कुंज गलियों के अस्तित्व सहित पूरे वृंदावन के स्वरूप के लिए भी गंभीर खतरा है।
याचिका में आगे यह बताया गया है कि ठाकुर श्री राधावल्लभ लाल जी महाराज और ठाकुर मदन मोहन जी महाराज के दो मंदिर हैं जो अधिनियम के तहत संरक्षित स्मारक हैं। प्रस्तावित गलियारा उक्त संरक्षित स्मारकों के 100 मीटर के भीतर स्थित है, इसलिए उक्त क्षेत्र में कानून के अनुसार कोई भी निर्माण गतिविधि नहीं हो सकती है।
इसके अलावा याचिका के माध्यम से यह भी कहा गया है कि राज्य सरकार बिना कोई सामाजिक प्रभाव मूल्यांकन किए, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण से पूर्व मंजूरी प्राप्त किए बिना और पर्यावरणीय मंजूरी के बिना मंदिर को ध्वस्त करने का निर्णय लिया है जो 100 वर्षो से अस्तित्व में हैं। इस तरह से सैकड़ों परिवारों की आजीविका को नष्ट किया जा रहा है जो अतार्किक और अनुचित है।
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