यूपीसीडा की विफलता : ट्रांसगंगा सिटी के लिए एक भी बड़ा निवेशक नहीं आगे आया, इन समस्याओं से उद्यमी डरे
कानपुर में ट्रांसगंगा सिटी के लिए एक भी बड़ा निवेशक नहीं आगे आया।
कानपुर में ट्रांसगंगा सिटी के लिए एक भी बड़ा निवेशक आगे नहीं आया। आधी-अधूरी सुविधाओं के कारण निवेशक कतरा रहे है। सबस्टेशन तक शुरू नहीं हुआ।
कानपुर, अमृत विचार। गंगा बैराज पर बसाई जा रही जिस ट्रांसगंगा सिटी से शहर की तस्वीर बदलने का दावा किया जा रहा है, उसमें अब तक कोई बड़ा औद्योगिक समूह निवेश के लिए आगे नहीं आया है। यहां सिर्फ तीन औद्योगिक इकाइयों और एक दर्जन आवासों का ही निर्माण हो रहा है।
ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के समय शहर के बड़े चर्म उत्पाद निर्यातक ने यहां सौ करोड़ से कांप्लेक्स बनाने का एमओयू किया था, लेकिन अभी तक भूखंड आवंटित नहीं कराया है। फूड प्रोसेसिंग यूनिट के लिए शीतल पेय बनाने वाली कंपनी 25 एकड़ भूमि लेने से पीछे हट रही है, कंपनी के लोगों ने कई बार दौरा किया, लेकिन यूपीसीडा प्रबंधन की नाकामी से बात नहीं बनी।
ट्रांसगंगा सिटी को बसाने की योजना सपा शासन में बनी थी। बड़े- बड़े सपने दिखाए गए थे। दावा किया गया था कि यहां कांच की इमारतें बनेंगी। यह सिटी दुबई और शंघाई जैसे शहरों को टक्कर देगी। लेकिन वर्तमान में हालात उन्नाव से भी बदतर हैं। बमुश्किल यहां एक दर्जन लोग मकान बना रहे हैं और तीन औद्योगिक इकाइयों का निर्माण हो रहा है।
प्रोजेक्ट मैनेजर के रूप में अजय दीप की तैनाती की गई है। उनके पास लखनऊ क्षेत्रीय कार्यालय के क्षेत्रीय प्रबंधक का भी चार्ज है। इस कारण वह समय नहीं दे पा रहे हैं। इस सिटी के विकास के लिए सौ से अधिक शहरों में रोड शो व विभिन्न कार्यक्रम किए गए। विदेशों तक में ब्रांडिंग की गई पर नतीजा ढाक के तीन पात है।
1151 एकड़ में बस रही इस सिटी में जानवर घास चरते दिखाई देते हैं। छह सौ करोड़ रुपये से अधिक राशि इसके विकास पर खर्च की जा चुकी है। लेकिन जो हालात हैं उससे नहीं लगता कि यहां निकट भविष्य में निवेश बढ़ेगा, क्योंकि प्राधिकरण प्रबंधन के झूठे वादे निवेशकों के विश्वास में बाधा बन रहे हैं। यहां ट्रांसफार्मर भी लगे हैं और बिजली घर भी बन गए हैं, लेकिन चालू नहीं होने से शो पीस बने हैं।
मिट्टी का भराव है ज्यादा खनन में तमाम दुश्वारियां
यह सिटी जलभराव वाले क्षेत्र में बसाई जा रही है। ऐसे में यहां जो उद्योग इकाई का निर्माण करा रहे हैं, उन्हें मिट्टी का भराव बहुत कराना पड़ रहा है। मिट्टी खनन में दिक्कत से एक तो उन्हें मिट्टी मिल नहीं रही है जो मिल रही है, उसकी कीमत बहुत ही ज्यादा है।
सरसैया घाट पुल भूल गए अफसर
सरसैया घाट से ट्रांसगंगा सिटी तक चार लेन का पुल बनाने की योजना बनी थी। इस पुल की लागत को सिटी के भूखंडों की दर में जोड़ दिया गया, लेकिन पुल निर्माण के लिए एक ईंट तो रखना दूर, अभी तक यही स्थान तय नहीं हो सका है कि उसे बनाया कहां जाएगा। कभी बाबा घाट तो कभी सरसैया घाट के पास से निर्माण की बात की जाती है अब टेफ्को के पास से निर्माण का प्रस्ताव किया जा रहा है।
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