राहत की बात

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
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दुनिया के दूसरे देश इस समय मंदी के साये में जी रहे हैं। वहीं भारत के लिए राहत की खबर है कि रेटिंग एजेंसी फिच ने मध्यम अवधि के लिए भारत का वृद्धि दर अनुमान बढ़ाकर 6.2 प्रतिशत किया है। अमेरिकी रेटिंग एजेंसी का कहना है कि भारत की आर्थिक वृद्धि दर शीर्ष-10 उभरती अर्थव्यवस्थाओं में सबसे ज्यादा रहने वाली है।

एक तरफ भारत की जीडीपी की दर बढ़ रही है, वहीं दूसरी तरफ पड़ोसी मुल्क चीन की हालत खस्ता है। एजेंसी ने दस उभरते देशों के ग्रोथ अनुमान को पहले के 4.3 फीसदी से घटाकर 4 फीसदी कर दिया है। इसके लिए फिच ने चीन की अर्थव्यवस्था में गिरावट को जिम्मेदार ठहराया है।

फिच ने कहा है कि 2023-24 के लिए भारत की विकास दर 6.3 प्रतिशत रहने की उम्मीद है। ध्यान रहे इससे पहले मूडीज ने भी अपनी रेटिंग में बदलाव किया था। फिच ने भारत में रोजगार की स्थिति में सुधार तथा कामकाजी आयु की आबादी में हल्की वृद्धि की संभावना को देखते हुए वृद्धि अनुमान बढ़ाया है।

फिच की मानें तो हालिया महीनों में भारत में रोजगार दर में सुधार हुआ है। जबकि इसी सप्ताह आई सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (सीएमआईई) की रिपोर्ट के मुताबिक देश में बेरोजगारी दर 10 प्रतिशत को पार कर गई है। रिपोर्ट के मुताबिक देश में नौकरी खोजने वालों की संख्या दिन ब दिन बढ़ती ही जा रही है। हालांकि सीएमआईई की कार्यप्रणाली के बारे में बहुत चर्चा, बहस और आलोचना की गई है।

यह कहना पर्याप्त है कि सीएमआईई के अनुमान, खासकर युवाओं के बीच बेरोजगारी की अधिक निराशाजनक तस्वीर पेश करते हैं। फिच की रिपोर्ट के अनुसार मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में चीन का प्रदर्शन बेहद खराब रहा है। पिछले साल तक चीन इस मामले में सबसे आगे रहता था। पर इस बार मैन्युफैक्चरिंग में भारत ने बढ़त  हासिल की है।

मेक इन इंडिया के साथ भारत आत्मनिर्भर बन रहा है। बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के लिए उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना (पीएलआई) का फायदा छोटे कारोबारी उठा रहे हैं। फिच ने रूस के लिए ग्रोथ अनुमान 1.6 प्रतिशत से घटाकर 0.8 प्रतिशत, कोरिया के लिए 2.3 प्रतिशत से घटाकर 2.1 प्रतिशत और दक्षिण अफ्रीका के लिए 1.2 प्रतिशत से घटाकर 1 प्रतिशत कर दिया है।

 ऐसे में भारत को लेकर एजेंसियों के ये अनुमान जहां खुशी देते हैं, वहीं चिंता भी बढ़ाते हैं। निश्चित ही भारत की विकास की रफ्तार आशाजनक है, परंतु वैश्विक भू-राजनैतिक कारणों से यदि दुनिया लंगड़ाती अर्थव्यवस्था से प्रभावित रहने वाली है तो तेज विकास के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था पर भी दबाव बना रहेगा।