Diwali 2023: दीया नए जीवनशैली की शुरुआत करने की प्रेरणा है

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Edited By Amrit Vichar
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प्रयागराज। रोशनी के पर्व दीपावली पर दीयों का विशेष महत्व होता है। कुम्हार के चाक पर बनकर दीपावली के दिन यह दीये घर घर को रोशन करते हैं। यह दीये न केवल अंधकार पर उजाले की विजय मात्र का प्रतीक हैं बल्कि यह मानव की सुषुप्त चेतना को जगाने का भी प्रतीक हैं।

दीपावली पर दीयो के विशेष महत्व पर चर्चा करते हुए ज्योतिर्विद विकास त्रिपाठी ने शुक्रवार को बताया कि जिस प्रकार दीया के बुझने पर उसे फिर से ज्योति के लिए प्रकाशित किया जाता है उसी प्रकार जीवन में भूल को सुधारकर नए सिरे से उसे प्रगति का संकल्प लेकर आगे बढ़ना चाहिए।

दीये का स्वभाव स्वत: जलकर दूसरों को प्रकाश देना है। भारतीय परंपरा हमारे वेद ज्ञान का स्रोतपूंज हैं। वेदों में अग्नि को देव रूप में माना गया है। अग्नि के तेज में देवताओं का निवास होता है। दीपक एकता का प्रतीक भी माना जाता है। यह किसी में भेद न/न कर समता को प्रदर्शित करता है।

त्रिपाठी ने बताया कि तन रूपी दीपक में मन रूपी बाती को स्थापित करके प्रेम रूपी घी से मानव जीवन और समाज को प्रकाशित करना यही दीपक का अर्थ है। अहंकार का त्याग कर हम जीवन की सत् मार्ग पर हो यही दीपक का सही मायने में अर्थ है। दीपक का प्रकाश नकारात्मक ऊर्जाओं को भी समाप्त करता है।

दीपावली पर्व की सार्थकता के लिए जरूरी है कि दीये बाहर के ही नहीं, दीये मन के भीतर भी जलने चाहिए। दीया कहीं भी जले, उजाला ही देता है। दीये का संदेश है- हम जीवन से कभी पलायन न करें, जीवन को परिवर्तन दें, और परिवर्तन जीवन के सार्थक विकास की मार्ग खोज लेती हैं।

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