पीलीभीत: बवाल बनकर फूटा गुस्सा, जिम्मेदारों की लापरवाही बढ़ा गई आक्रोश!
पीलीभीत, अमृत विचार। जंगल के बाहर घूम रहे बाघों की समस्या को लेकर जिम्मेदारों की लापरवाही ने आखिरकार बवाल करा ही दिया। ग्रामीण की मौत के बाद गुस्साई भीड़ ने पुलिस चौकी को घेर लिया और घंटों हंगामा चलता रहा। पुलिसकर्मी भीड़ के आगे बेबस दिखाई दिए। इसके बाद मुख्य मार्ग पर हंगामा करते हुए पथराव और मारपीट की जाती रही। पूरनपुर समेत अन्य थानों की पुलिस भी पहुंची लेकिन उसे भी भीड़ खदेड़ती रही।
बता दें कि जमुनिया खास गांव निवासी ग्रामीण ओमप्रकाश की बाघ के हमले में हुई मौत पर शनिवार देर रात तक पुलिस के लिए शांति व्यवस्था बनाए रखना चुनौती बना रहा। मगर इस घटना को लेकर ग्रामीणों के आक्रोश के बीच पीलीभीत टाइगर रिजर्व एवं सामाजिक वानिकी के जिम्मेदारों की लापरवाही भी उजागर हुई।
बताते हैं कि कई दिनों से बाघ की दस्तक क्षेत्र में बनी हुई थी। हमले का डर भी ग्रामीण जता रहे हैं। कई बार कहने के बाद भी ठोस कदम नहीं उठाए गए तो नौ नवंबर को पीलीभीत में एक कार्यक्रम से शामिल होकर लौट रहे भाजपा के पूरनपुर विधायक बाबूराम पासवान को घेरकर समाधान की मांग की थी।
विधायक के घेराव की सूचना पर प्रशासन और वन विभाग के अधिकारी मौके पर गए थे लेकिन उस खाबड़ आदि लगाकर कर्तव्यों से इतिश्री कर ली गई। इसके बाद बाघ की समस्या के समाधान को लेकर गंभीरता नहीं बरती गई। नतीजतन वही हुआ जिसका डर ग्रामीणों को सता रहा था। एक और ग्रामीण खेत पर काम करते वक्त बाघ का निवाला बन गया।
इसके बाद पहले से पनप रहा आक्रोश बवाल बनकर फूटा। पीलीभीत टाइगर रिजर्व के नवीन खंडेलवाल, एसडीएम कलीनगर आशुतोष गुप्ता, सीओ पूरनपुर आलोक सिंह भारी पुलिस बल के साथ पहुंच गए। आक्रोशित लोगों ने जमकर खरी खोटी सुनाई। डीएम को मौके पर बुलाने की मांग पर भी अडिग रहे।
भीड़ ये सवाल पूछती रही कि आखिर कब तक ग्रामीणों को वन्यजीव हमला कर निवाला बनाते रहेंगे। तार फेंसिंग समेत अन्य इंतजाम दुरुस्त न होने को लेकर भी सवाल उठाए। इस पर डीएफओ आश्वासन देकर शांत कराने का प्रयास करते रहे। इसके बाद एडीएम वित्त एवं राजस्व राम सिंह गौतम और एएसपी अनिल कुमार यादव भी मौके पर गए और बातचीत कर शांत कराने का प्रयास करते रहे। मगर सवाल एक ही था कि आखिर कब तक जिम्मेदारों की लापरवाही का खामियाजा ग्रामीण भुगतेंगे।
घंटों रहा दहशत का माहौल, पीएसी भी बुलाई
प्रदर्शन कर रहे ग्रामीण खासा आक्रोशित थे। शव रोड पर रखकर जाम लगा दिया था। जमुनिया पुलिस चौकी को भी घेर लिया था। माधोटांडा एसओ की गाड़ी में पथराव कर तोड़फोड़ की जा चुकी थी। इसके अलावा कुछ पुलिसकर्मियों से भी अभद्रता की गई।
बवाल बढ़ने पर जब पूरनपुर समेत आसपास के थानों की फोर्स पहुंची तो भीड़ ने उसे भी वापस कर दिया था। इतना ही नहीं भीड़ में शामिल कुछ लोग तो चौकी परिसर में आपस में ही झगड़ा करने लगे थे। मगर पुलिस उन्हें शांत कराने की भी हिम्मत नहीं जुटा पा रही थी। राहगीर भी जाम और बवाल को देख भयभीत रहे।
दूर खड़े रहे।बाद में कई थानों का फोर्स बुला लिया गया। जिसके बाद माधोटांडा रोड पर जमुनिया गांव के पास छावनी दिखाई दी। पुलिस अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए। हालांकि कई घंटे तक मौके पर दहशत का माहौल बना रहा। भीड़ बार-बार सड़क आकर हमला करती रही। कई थानों का फोर्स मौके पर होने के बाद भी घंटों भीड़ पर काबू नहीं किया जा सका। जिसके बाद पीएसी भी मौके पर बुला ली गई थी।
खोखा लगाए व्यक्ति का सिर फोड़ा
बता दें कि ग्रामीणों की भीड़ उग्र हो चुकी थी। इस दौरान कुछ ही दूरी पर चंद दुकानें और खोखे खुले हुए थे। गांव जमुनिया खास गांव के ही हरि गुप्ता भी खोखे पर बैठे हुए थे। भीड़ में शामिल कुछ लोग लाठी डंडे लेकर पहुंचे और हमला कर दिया। सिर में वार कर लहूलुहान कर दिया। उन्हें किसी तरह पुलिस बचाकर ले गई। इसके बाद आसपास की अन्य दुकानें भी बंद हो गई। राहगीर भी डरी सहमी हालत में दूर जाकर खड़े हो गए। कईयों ने तो वाहन बैक कर दूसरे रास्ते से निकलने में ही भलाई समझी।
48 दिन पहले भी ली थी एक जान
टाइगर रिजर्व की महोफ रेंज के जंगल के नजदीक जमुनिया खास गांव बसा हुआ है। इस साल बाघ हमले में मौत की यह पांचवी घटना है। अभी 48 दिन पहले ही पुरैना दीपनगर गांव में बाघ के हमले में मौत हुई थी। उस वक्त जान गंवाने वाले तोताराम भी जमुनिया खास गांव के ही रहने वाले थे। वह घास काटने गए थे और बाघ ने हमला कर दिया था।
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