ASI ने भेजा कर्नाटक सरकार को नोटिस, जानें पूरा मामला

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Edited By Amrit Vichar
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बेंगलुरु। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने यूनेस्को संरक्षित कर्नाटक के हंपी स्थित विरुपाक्ष मंदिर में एक कील ठोकने के मामले का दोषी मानते हुए कर्नाटक के बंदोबस्ती विभाग को नोटिस भेज दिया है। नोटिस में कहा गया है कि कोई भी व्यक्ति जो धारा 25 की उप-धारा (1) के तहत जारी अधिसूचना के उल्लंघन में किसी भी पुरावशेष को स्थानांतरित करता है, उसे जुर्माने से दंडित किया जाएगा जो एक लाख रुपये तक बढ़ाया जा सकता है। अदालत आदेश द्वारा ऐसे किसी भी उल्लंघन के लिए व्यक्ति को दोषी ठहरा सकती है। 

ऐसे व्यक्ति को प्राचीनता को उस स्थान पर पुनर्स्थापित करना होगा जहां से इसे स्थानांतरित किया गया था। यह जानकारी के लिए और मामले में जरूरी कार्रवाई के लिए है। मामला दो नवंबर को कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के मंदिर आगमन का है । एएसआई के अनुसार मुख्यमंत्री की इस यात्रा के दौरान व्यवस्था बनाने के लिए मंदिर में दक्षिण की ओर से आने वाले और उत्तर की ओर से निकलने वाले भक्तों को नियंत्रित करने के लिए खंभे में कील ठोक दी गई थी। 

बयान में कहा गया कि सीढ़ियों पर बैरिकेडिंग करके विरुपाक्ष मंदिर गर्भगृह के वास्तविक उत्तरी निकास को बंद कर दिया है और भक्तों के लिए एक अलग रास्ता बनाया है। कार्यालय ने निकास को बंद करने की कोई अनुमति नहीं ली है और खंभों के बीच में छेद करके और सजावटी खंभों में लोहे के टुकड़े डालकर एमएस खोखले पाइप लगाए गए हैं, जो एएमएएसआर अधिनियम (संशोधन और सत्यापन अधिनियम) 2010 की धारा 30 का स्पष्ट उल्लंघन है। 

इसमें यह भी आरोप लगाया गया कि कर्नाटक बंदोबस्ती के अधिकारियों ने विरासत स्थल में एक कील लगाने की अनुमति नहीं मांगी। एएसआई ने स्पष्ट किया कि एएमएएसआर अधिनियम के तहत, किसी संरक्षित स्मारक को अपवित्र करने पर 2 साल तक की कैद और 1 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। 

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