बरेली: आतिशबाजी से जहरीली हुई शहर की हवा, जानिए...कितना पहुंचा AQI?

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सिविल लाइंस और राजेंद्रनगर में इस बार दिवाली के बाद प्रदूषण पिछले साल की तुलना में 50 से भी ज्यादा अंक नीचे लुढ़का

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बरेली, अमृत विचार। इस दिवाली पर भी शहरवासियों ने वायु प्रदूषण के खतरों से आगाह होने का संकेत दिया है। लोगों ने भरपूर जोश से दिवाली तो मनाई लेकिन पटाखों का शोर उतना नहीं गूंजा जितना पहले गूंजता रहा है। दूसरे, ग्रीन पटाखों की खरीदारी पर भी लोगों का जोर ज्यादा रहा। इस वजह से दिवाली के बाद शहर में वायु प्रदूषण बढ़ा तो लेकिन पिछले सालों की तुलना में उसका स्तर कम रहा। लिहाजा शहर के लोग अपनी जागरूकता की वजह से शाबासी के हकदार हो गए।

दिवाली के बाद इस बार सर्वाधिक वायु प्रदूषण राजेंद्रनगर में रिकॉर्ड हुआ है। यहां एक्यूआई 216 रिकॉर्ड हुआ लेकिन यह भी पिछले साल की तुलना में कम है। पिछले साल राजेंद्रनगर में ही एक्यूआई 270 रिकॉर्ड हुआ था। घनी आबादी वाले इलाकों में शामिल सिविल लाइंस में वायु प्रदूषण के आंकड़े और ज्यादा राहत महसूस कराने वाले हैं।

यहां इस बार एक्यूआई 184 रिकॉर्ड हुआ है। पिछले बार यहां एक्यूआई 255 था। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के मुताबिक पीएम 2.5 का अधिकतम स्तर राजेंद्रनगर में पांच सौ और सिविल लाइंस में 212 रहा। यह भी पिछले साल की तुलना में कम है।

सिविल लाइंस में दिवाली के बाद वायु प्रदूषण के आंकड़ों पर इसलिए और ज्यादा सुकून महसूस किया जा सकता है क्योंकि इस इलाके में लगातार निर्माण कार्यों की वजह से पहले से काफी वायु प्रदूषण है। दिवाली से पहले ही यहां एक्यूआई 212 रिकॉर्ड हो चुका था, इससे साफ है कि दिवाली पर आतिशबाजी के बाद इसके स्तर पर बहुत ज्यादा फर्क नहीं पड़ा है। राजेंद्रनगर में भी पिछले एक सप्ताह के दौरान एक्यूआई 98 से दो सौ के बीच रहा है।

दस सालों से दिवाली के बाद चार सौ एक्यूआई तक पहुंचता रहा है प्रदूषण
वायु प्रदूषण के खिलाफ लड़ाई में शहर ने कितनी बड़ी बाजी मारी है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 2021 में दिवाली के बाद शहर में वायु प्रदूषण का स्तर 415 एक्यूआई तक पहुंच गया था। यह स्थिति सांसों में जहर घोलने जैसी होती है। इससे पहले के सालों में भी अंधाधुंध आतिशबाजी की वजह से प्रदूषण इसी स्तर पर पहुंचता रहा है।

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के रिकॉर्ड के मुताबिक वर्ष 2020 में शहर में दिवाली बाद एक्यूआई 392 रहा था और 2019 में 398। वर्ष 2018 में 435 था तो 2017 में 410। इसके अलावा 2016 में 396, 2015 में सर्वाधिक 442, 2014 में 421, 2013 में 398 और 2012 में 378 रिकॉर्ड हुआ था। पिछले साल भी दिवाली के एक दिन पहले और एक दिन बाद के एक्यूआई में सौ-सौ अंकों का अंतर आया था लेकिन इस बार यह अंतर बहुत ज्यादा नहीं है। कम आतिशबाजी के साथ लोगों का ग्रीन पटाखों पर ही जोर रहने को इसका कारण माना जा रहा है।

...मगर इतना वायु प्रदूषण भी खतरनाक
शहर में इस बार दिवाली के बाद वायु प्रदूषण पिछले सालों से कम तो रहा लेकिन इतना भी लोगों के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है। पहले से बीमार लोगों की दिक्कतें तो और ज्यादा बढ़ सकती हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मुताबिक एक्यूआई शून्य से 50 तक हो तभी हवा को शुद्ध माना जाता है।

51 से सौ तक एक्यूआई होने का मतलब वायु में हल्का (सामान्य) प्रदूषण है। इसके बाद 101 से 150 तक तक वायु प्रदूषण को संवेदनशील और 151 से दो सौ तक मध्यम प्रदूषित माना जाता है। 201 से तीन सौ तक स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है। इसके बाद 301 से पांच सौ तक वातावरण को अत्यधिक प्रदूषित माना जाता है। एक्यूआई स्तर तीन सौ के पार पहुंचने पर हवा को जहरीला माना जाता है। दिल्ली में पिछले दिनों ऐसे ही हालात थे।

ज्यादा कोहरा न होने से भी मिली राहत
पिछले सालों में दिवाली की रात कोहरा होने की वजह से भी प्रदूषण बढ़ता था लेकिन इस बार अब तक ज्यादा कोहरा शुरू नहीं हुआ है। कोहरा पटाखों से निकले धुएं को वायुमंडल में ऊपर नहीं जाने देता, इस वजह से निचली सतह पर प्रदूषण बढ़ जाता है। इस बार ऐसा नहीं हुआ।

त्योहारों के दौरान में वाहनों की आवाजाही औसत से ज्यादा रही है। वायु प्रदूषण बढ़ने का यह भी एक कारण है लेकिन एक-दो दिन के अंदर यह सामान्य हो सकता है। इसके लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं--- रोहित सिंह, क्षेत्रीय अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड।

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