बरेली: दिवाली का उत्साह...12 करोड़ के पटाखे फूंक डाले, पटाखा एसोसिएशन ने जिला प्रशासन पर लगाए ये आरोप
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बरेली, अमृत विचार। पटाखा एसोसिएशन के आशीष सिंघल ने बताया कि इस बार पटाखों की सेल पिछले सालों की तुलना में काफी कम हुई। उन्होंने इसके लिए जिला प्रशासन की मनमानी को जिम्मेदार ठहराया। आरोप लगाया कि जिला प्रशासन ने सौ फुटा रोड और मिनी बाईपास पर तमाम साल पुरानी पटाखों की दुकानों को हटाकर रामलीला ग्राउंड हार्टमैन, इस्लामिया ग्राउंड, एमबी कॉलेज समेत कई और जगह शिफ्ट करा दिया।
इस वजह से दूरदराज के लोग पटाखों की खरीदारी नहीं कर सके। उन्होंने बताया कि लोगों की मांग को देखते हुए इस बार इको फ्रेंडली पटाखों का काफी स्टॉक मंगाया गया था। उनकी सेल भी साधारण पटाखों से काफी ज्यादा हुई।
पटाखों पर महंगाई को भी धन्यवाद
कम आतिशबाजी का एक कारण महंगाई भी रही। इस बार पटाखे डेढ़ गुना कीमत तक बढ़ गई। पटाखा कारोबारी कृष्णदेव सूद ने बताया कि इस बार पटाखों की कीमत में काफी वृद्धि हुई। पटाखों की चटाई तीन हजार रुपये तक की थी। चरखी का पैकेट पांच सौ रुपये से कम नहीं था। अनार और रॉकेट की कीमत 50 रुपये पीस तक थी।
फुलझड़ी का भी पैकेट साढ़े तीन सौ रुपये तक का था। तमाम ऐसे पटाखे मार्केट में थे जिन्हें खरीदना ही आम आदमी के बस की बात नहीं है। मिर्ची बम की लड़ी पिछले साल 10 हजार रुपये की थी लेकिन इस बार उसकी कीमत 14 हजार रुपये थी। इसके अलावा योगा बम, भूचाल बम, टर्मिनेटर रॉकेट, डांस एंड डांस, ड्रोन, नया नया प्यार, टिवस्टर, वर्ल्ड वार जैसे नए नामों से मार्केट में आए पटाखों की कीमत भी हजारों में थी।
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