मृत्यु के बाद लागू होने वाली योजना के आधार पर अनुकंपा नियुक्ति के मामले को हाईकोर्ट ने पूर्णपीठ के पास वापस भेजा

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Edited By Amrit Vichar
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प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मृत्यु के बाद लागू होने वाली योजना के आधार पर अनुकंपा नियुक्ति दिए जाने के मामले में कहा कि सीमा की गणना का प्रश्न तब उठेगा, जब किसी याची का मामला योजना के मूल भाग के अंतर्गत कवर किया गया हो।

न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति डोनाडी रमेश की खंडपीठ ने एकलपीठ द्वारा पारित आदेश को चुनौती देने वाली अपील पर सुनवाई कर रही थी जिसमें अपीलकर्ता (बैंक) को डाईंग इन हार्नेस योजना के तहत नियुक्ति के लिए विपक्षियों के आवेदन पर विचार करने का निर्देश दिया गया था।

याचिका के अनुसार विपक्षी के पति की 19 जनवरी 2018 को नौकरी के दौरान मृत्यु हो गई थी। प्रासंगिक समय में अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति की कोई योजना नहीं थी। यह योजना एक मार्च 2019 को लागू हुई। बैंक ने मृतक के पत्नी को सूचित कर बताया कि अनुकंपा नियुक्ति के लिए उसके अनुरोध पर विचार करना संभव नहीं होगा, क्योंकि 1 मार्च 2019 को योजना शुरू होने से पहले उसके पति की मृत्यु हो गई थी। विपक्षी ने उक्त आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी जिसे एकलपीठ ने स्वीकार कर लिया था।

उक्त आदेश में कोर्ट ने कहा था कि योजना के खंड 8 के तहत अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किसी कर्मचारी की मृत्यु के 5 साल के भीतर दायर किया जा सकता है, इसलिए भले ही मृत्यु योजना शुरू होने से पहले हुई हो, लेकिन आवेदन 5 साल के भीतर तैयार किया गया था। मृत्यु की तारीख से इस योजना के अंतर्गत माना जाएगा। वर्तमान पीठ के समक्ष यह मुद्दा था कि क्या योजना के लागू होने की तारीख से पहले 5 साल की समय अवधि के भीतर बैंक के मृत कर्मचारी के आश्रितों द्वारा अनुकंपा नियुक्ति के लिए दिए गए प्रत्यावेदन पर योजना के तहत मान्य होंगे या नहीं?

कोर्ट ने उपरोक्त प्रश्न को स्पष्ट करते हुए कहा कि अनुकंपा नियुक्ति कभी भी किसी कर्मचारी की सेवा शर्त या निहित अधिकार का हिस्सा नहीं है। इस संबंध में जारी नियमों या विनियमों के अभाव में इसे नहीं दिया जा सकता है। यह अधिकार पहली बार कार्य के दौरान कर्मचारी की मृत्यु पर अस्तित्व में आता है। यदि मृत्यु की तारीख पर अनुकंपा नियुक्ति की कोई योजना लागू नहीं है तो ऐसा कोई अधिकार नहीं मिलता है।

सिवाय उन मामलों के जहां भविष्य की योजना स्पष्ट रूप से घोषित करती है कि यह पूर्वव्यापी रूप से लागू होगी। कोर्ट ने आगे कहा कि खंड 8 आवेदनों पर विचार करने की समय सीमा से संबंधित है। यह मृत्यु की तारीख से 5 वर्ष है, लेकिन असाधारण परिस्थितियों में 5 वर्ष से अधिक की अवधि के दावे पर भी पूरी जांच के बाद विचार किया जा सकता है। उपरोक्त तथ्यों के साथ कोर्ट ने बृहद पीठ के गठन के लिए वर्तमान मामले को मुख्य न्यायाधीश के पास वापस भेज दिया।

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