मुख्यमंत्री योगी को रास्ते में दिखा अंधेरा तो अफसरों को लगी फटकार, मौके पर पहुंचे डीएम और कमिश्नर

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Edited By Amrit Vichar
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अमृत विचार लखनऊ। यूपी विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन बुधवार को जहां विपक्ष प्रदेश सरकार को बिजली व्यवस्था पर चौतरफा घेरने का प्रयास कर रहा था वहीं दूसरी ओर देर शाम को ही एक मार्ग पर मुख्यमंत्री योगी को अंधेरा दिखा तो उन्होंने जिम्मेदार अफसरों को फटकार लगा दी।  मुख्यमंत्री की नाराजगी के बाद रात्रि में मौके पर पहुंचे जिलाधिकारी, मंडलायुक्त और एलडीए वीसी सहित कई अधिकारियों ने लाइट को दुरुस्त कराया। मुख्यमंत्री  दरअसल एयरपोर्ट के लिए निकले थे। वहां उन्होंने देखा अहिमामऊ के निकट पूरे मार्ग पर अंधेरा है। सीएम ने इस पर कड़ी नाराजगी जाहिर की तो उनके कार्यालय से जिम्मेदार अफसरों को भी फोन पहुंचा तो हड़कंप मच गया। बताया जा रहा है अधिकारी जरूरी मीटिंग कर रहे थे इस दौरान वह मीटिंग छोड़कर भागे। हालांकि इस अधिकारी कोई भी बयान देने से बचते रहे। 

एलडीए और वीसी और नगर आयुक्त से भी हुआ जवाब तलब
इस मामले में एलडीए वीसी इन्द्रमणि त्रिपाठी और नगर आयुक्त इन्द्रजीत सिंह से भी जवाब तलब किया गया है। वहीं मार्ग प्रकाश विभाग टीम ने मौके पर सभी लाइटों को सही कराया है। इसके अलावा पूरे शहीदपथ की लाइटों को भी चेक करने का निर्देश दिया है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक सीएम की नाराजगी के बाद अब कुछ अधिकारियों पर गाज गिरना तय माना जा रहा है। 

लखनऊ के अक्सर मार्गों पर दिखती हैं खराब लाइटें
अहिमामऊ में मुख्यमंत्री ने जमीनी हकीकत को देख लिया तो तत्काल सुधार किया गया। लेकिन मार्ग प्रकाश लाइटे अक्सर सड़कों पर खराब दिखती हैं। कई बार ऐसा भी होता है जब दिन में लाइटे जलती रहती हैं। इस स्थिति में जहां बिजली की बर्बादी होती है वहीं दूसरी ओर जिम्मेदार अधिकारी भी नहीं ध्यान देते हैं। इससे पहले भी मुख्यमंत्री ने अफसरों की लापरवाही पर नाराजगी जाहिर कर चुके हैं। 

सदन में आज उर्जा मंत्री ने बिजली व्यवस्था को लेकर दिया है ये बयान
बता दें कि विधानसभा शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन बुधवार को सपा विधायकों की ओर से बिजली व्यवस्था पर खड़े किए सवालों पर जवाब देते हुए उर्जा मंत्री एके शर्मा ने कहा कि बिजली व्यवस्था पर जो लोग सवाल उठा रहे हैं, उनके ही कार्यकाल में बिजली व्यवस्था का कितना विकास हुआ था यह आंकड़े देखे जा सकते हैं। ऊर्जा मंत्री ने सदन में बताया 2017 से पहले डेढ़ लाख मजरे ऐसे थे, जहां पूर्व सरकारों ने कभी भी विद्युतीकरण करने को नहीं सोचा। उन्होंने बताया 2017 के बाद अधिकांश बड़े मजरों में बिजली पहुंचाई गई।

इसके अलावा गरीबों के घर-घर कनेक्शन दिए गए। ऊर्जा मंत्री ने कहा कि अभी पूरे प्रदेश में 22,339 मजरे ऐसे हैं जहां पर विद्युतीकरण होना है। यह बहुत बड़े-बड़े मजरे नहीं हैं यह छोटे मजरें हैं। इन पर ज्यादा बजट खर्च भी नहीं आएगा। जल्द ही यहां विद्युतीकरण किया जाएगा। ऊर्जा मंत्री ने यह भी बताया केंद्रीय मंत्री से भी मेरी इस संबंध में बात हुई है। इस पर अनुमोदन केंद्र से मिल गया है, बहुत जल्दी इन मजरों में भी विद्युतीकरण किया जाएगा। ऊर्जा मंत्री ने यह भी जानकारी देते हुए बताया कि छूटे हुए मजरों में विद्युतीकरण के लिए भारत सरकार ने उसमें अपना अंशदान 203 करोड रुपए का मंजूर किया है।

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