केजीएमयू : प्रो.अविनाश अग्रवाल बोले- सटीक डायग्नोसिस में अल्ट्रासाउंड जांच का अहम रोल
लखनऊ, अमृत विचार। गंभीर रूप से बीमार गर्भवती महिला, गंभीर बीमारी से पीड़ित मरीज या फिर किसी दुर्घटना में घायल शख्स को जल्द से जल्द इलाज की जरूरत होती है। इनका जितनी जल्दी इलाज शुरू होगा, स्वास्थ्य भी उतनी जल्दी अच्छा होगा और उनकी जान बच सकेगी। यह तब होगा जब मरीज को समय पर इलाज मिलना शुरू होगा वह भी सटीक जांच और डायग्नोसिस के साथ। यह कहना है केजीएमयू में क्रिटीकल केयर मेडिसिन विभाग के एचओडी प्रो. (डॉ.) अविनाश अग्रवाल का। वह केजीएमयू के ट्रामा सेंटर स्थित क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग में शुक्रवार को आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने बताया कि यह कार्यशाला चिकित्सकों को आईसीयू और आपातकालीन स्थित में इलाज का प्रशिक्षण देने के लिए आयोजित की गई है।
प्रो. अविनाश अग्रवाल के मुताबिक मरीज को समय पर इलाज मिले इसके लिए एक डॉक्टर को सही और जल्द डायग्नोसिस बनाने की जरूरत होती है, लेकिन कई बार संसाधनों और रेडियोलॉजिस्ट के आभाव में सही डाइग्नोसिस नहीं बन पाती है। जिससे मरीज की जान को खतरा हो सकता है। समय पर सटीक जांच कर सही डाइग्नोसिस बनने से इमरजेंसी में मरीज का बेहतर इलाज होता है।
उन्होंने बताया कि सटीक और समय रहते डाइग्नोसिस बनाने के लिए आज दो दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई है। जिसमें यूपी के करीब 97 डॉक्टरों को प्रशिक्षित किया गया है। इस प्रशिक्षण में रेडियोलॉजिस्ट के न होने पर भी अल्ट्रासाउंड करने की भी जानकारी साझा की गई। साथ ही अल्ट्रासाउंड जांच के फायदे भी बताये गये हैं।
उन्होंने बताया कि अल्ट्रासाउण्ड की जांच करने से बीमारी की सही स्थित का पता चलता है। जिससे बीमारी की सटीक डाइग्नोसिस बनाने में आसानी होगी। इतना ही नहीं सीटी स्कैन और एक्स-रे से होने वाले दुष्प्रभाव भी नहीं होंगे।
इस कार्यशाला में केजीएमयू के सीएमएस प्रो.बीके.ओझा, रेडियोडॉयग्नोसिस विभाग के प्रो. अनित परिहार,डॉ.साई सरन, डॉ. सौमित्र मिश्रा, मुंबई के महात्मा गांधी मेडिकल कॉलेज के प्रो.विवेक कुमार,एसजीपीजीआई के डॉ. जितेंद्र चहर समेत कई डॉक्टर उपस्थित रहे।
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