अमेठी: एसडीएम की फटकार के बाद स्वास्थ्य उपकेंद्र की जमीन पर बनी अवैध दुकान पर चला बुलडोजर

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जायस/अमेठी। सरकार कहती है कि विवाद खत्म करने के लिए राजस्वकर्मी गांव-गांव जाकर सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराकर उसे सुरक्षित रखें। लेकिन यहां तो राजस्वकर्मी अतिक्रमणी को नोटिस थमाने के डेढ़ महीने बाद भी अतिक्रमण मुक्त नहीं करा पा रही थी। जबकि स्वास्थ्य उपकेंद्र के आंशिक भूमि पर हुए अतिक्रमण को खाली कराने के लिए 5 सितंबर को सीएमओ ने एसडीएम को पत्र लिखकर आग्रह किया था। 

सीएमओ के आग्रह पत्र पर एसडीएम ने राजस्वकर्मी को जांचकर अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए निर्देश दिया था। लेकिन राजस्वकर्मी ने नोटिस थमाने के बाद अपनी इतिश्री कर ली थी। तहसीलदार न्यायालय से बेदखली के आदेश के बाद भी लेखपाल, नायब तहसीलदार भी अतिक्रमणी के समर्थन में लगे रहे, एसडीएम से मिली फटकार के बाद नायब तहसीलदार ने जेसीबी वापस बुलाकर अवैध निर्माण को जमीदोज करा दिया।

जायस क्षेत्र के बहादुरपुर चौराहे पर स्वास्थ्य सुविधाओं को और बेहतर बनाने के लिए शासन से मंजूरी मिलने के बाद विभाग में स्वास्थ्य उपकेंद्र का निर्माण कराया था। जिस भूमि पर स्वास्थ्य उपकेंद्र का निर्माण कराया गया है, वह भूमि पहले राजस्व अभिलेखों में गाटा संख्या 7716/0.093 बंजर के रूप में दर्ज थी। जिसमें 0.051 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण परिवार कल्याण उपकेंद्र बहादुरपुर के नाम से हुआ था। 

परिवार कल्याण उपकेंद्र के आंशिक भूमि पर स्वास्थ्य उपकेंद्र बहादुरपुर के भवन का निर्माण कराया गया है। उसी भूमि के कुछ आंशिक भूमि पर स्थानीय एक भूमाफिया ने कंक्रीट पिल्लर खड़ा कर दीवार बना ली थी। इसकी सूचना जब मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. अंशुमान सिंह को हुई तो उन्होंने भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए बीते माह 5 सितंबर को एसडीम तिलोई को पत्रांक संख्या मु.चि.अ./उपकेंद्र/अतिक्रमण/2023-24/3618 के माध्यम से अतिक्रमण को हटाए जाने का अनुरोध किया था।

एसडीएम के निर्देश पर राजस्वकर्मी शिवओम ने अतिक्रमित भूमि की पैमाइश कर 18 सितंबर को बहादुरपुर निवासी अतिक्रमणी विनोद मौर्या को नोटिस जारी कर निर्देश दिया था कि दो दिन के भीतर यानी 20 सितंबर तक स्वयं अतिक्रमण मुक्त कर दें, अन्यथा की स्थित में विधिक कार्यवाही करते हुए अतिक्रमण हटाया जाएगा। 

उसके बाद अतिक्रमण हटाने में व्यय खर्च को अधिकार स्वरूप वसूला भी जाएगा। नोटिस चस्पा होने के बाद अतिक्रमणी विनोद मौर्या ने 10 दिन के भीतर अपना पक्ष रखने का का समय मांगा था। लेकिन चस्पा नोटिस की समयावधि डेढ़ महीने से ज्यादा बीत जाने के बाद भी अपनी ही नोटिस को राजस्वकर्मी अमल में नहीं ला पा रहे थे। 

बाद में तहसीलदार के यहां से 7 नवंबर को ही बेदखली का आदेश पारित हुआ था। फिर भी राजस्व कर्मी अतिक्रमण हटाने की जहमत नहीं ले रहे थे। हालांकि आईजीआरएस द्वारा मांगी गई आख्या में लेखपाल शिवओम ने अधिकारियों को गुमराह करते हुए रिपोर्ट लगा दी कि अभी बेदखली का वाद तहसीलदार न्यायालय में लंबित है जबकि बेदखली का आदेश 7 नवंबर को ही हो गया था। 

मंगलवार को नायब तहसीलदार अशोक कुमार कुशवाहा, राजस्व निरीक्षक उग्रसेन सिंह, राजस्व कर्मी शिवओम व मनोज गौतम ने पुलिस बल के साथ अतिक्रमण हटाने के लिए बुल्डोजर लेकर गए। स्वास्थ्य उपकेंद्र की भूमि पर अवैध निर्माण न ढहाकर खानापूर्ति कर वापस जाने लगे। 

इसकी सूचना एसडीएम दिग्विजय सिंह को हुई तो उन्होंने कड़ी फटकार लगाते हुए निर्मित अवैध दुकान को जमीदोज करने को कहा। एसडीएम की फटकार के बाद नायब तहसीलदार ने फिर से बुल्डोजर को वापस बुलाकर दुकान ढहा दिया।

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