खतरों पर अंकुश रहे

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
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कृत्रिम बुद्धिमता (एआई) को लेकर दुनिया की सोच आज एक जैसी हो रही है। तकनीक की ताकत और उसके सकारात्मक प्रभावों से हर कोई प्रभावित है। पूरा विश्व यह भी चाहता है कि इससे उभरने वाले खतरों पर कुछ अंकुश अवश्य रहे। जीपीएआई शिखर सम्मेलन 2023 के उद्घाटन अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि एआई परिवर्तनकारी है, लेकिन इसे अधिक से अधिक पारदर्शी बनाना हम पर निर्भर है।

उन्होंने एआई के नकारात्मक पहलुओं की ओर ध्यान खींचते हुए कहा कि भले ही इसमें 21 वीं सदी में विकास का सबसे मजबूत उपकरण बनने की क्षमता है, लेकिन यह इसके विनाश में भी अपनी भूमिका निभा सकता है। डीपफेक, साइबर सुरक्षा, डेटा चोरी और आतंकवादी संगठनों द्वारा एआई उपकरणों पर हाथ डालने की चुनौतियों की ओर इशारा करते हुए,प्रधानमंत्री ने जवाबी उपायों की आवश्यकता पर बल दिया। नई दिल्ली में आयोजित तीन दिवसीय जीपीएआई सम्मेलन में ऐसे उपाय खोजने पर खास ध्यान दिया जा रहा है जिनसे टिकाऊ विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में एआई का प्रयोग करने में मदद मिल सके।

जीपीएआई एक बहुपक्षीय पहल है जिसके हित धारकों का उद्देश्य इससे जुड़े प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में अत्याधुनिक शोध और अनुप्रयोग संबंधी गतिविधियों को बढ़ावा देकर एआई के सिद्धांत और व्यवहार के बीच की दूरी को पाटना है। यानि एआई के क्षेत्र में असाधारण काम करने वाले विश्व के दिग्गज इस सम्मेलन में दुनिया के एआई का भविष्य तय कर रहे हैं। सम्मेलन में कुल 29 देश भाग ले रहे हैं और यह जानने का अवसर प्रदान करेगा कि दुनिया एआई पर क्या सोच रही है और भारत क्या पेशकश कर रहा है। वास्तव में दुनिया आज प्रौद्योगिकी समाधानों के लिए भारत की ओर देख रही है। 

भारत एआई प्रतिभा और एआई से संबंधित विचारों के क्षेत्र में अग्रणी है। एआई नए भविष्य को गढ़ने का सबसे बड़ा आधार बन रहा है। इस सम्मेलन से पहले इसी तरह का यूकेएआई सम्मेलन बैलेचले पार्क में आयोजित हो चुका है। वर्ष 2020 में अस्तित्व में आए जीपीएआई में अमेरिका, ब्रिटेन, यूरोपीय संघ, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, मैक्सिको,न्यूजीलैंड,कोरिया और सिंगापुर आदि शामिल हैं।

भारत इसका संस्थापक सदस्य है। जब प्रमुख कंपनियां तेजी से उन्नत एआई सिस्टम विकसित करने की होड़ में लगी हुई है। ऐसे में इसका उपयोग आतंकवादी समूहों द्वारा डिजिटल बुनियादी ढांचे पर साइबर हमले करने या नए जैव रासायनिक हथियार बनाने के लिए किया जा सकता है। उम्मीद है कि सम्मेलन के माध्यम से एआई की क्षमता को अधिकतम करते हुए इसके जोखिमों को कम करने के लिए रूपरेखा तैयार हो सकेगी।