कानपुर देहात: नहीं दिख रहा दुर्लभ काले हिरणों का कुनबा, जानें वजह
सुरक्षा के अभाव में शिकारी व कुत्ते हिरणों को बना रहे नेवाला, फाइलों में कैद है हिरणों के संरक्षण की 1.37 करोड़ की योजना
कानपुर देहात। असालतगंज के जंगल में डेरा जमाए दुर्लभ प्रजाति के काले व चित्तीदार हिरणों के संरक्षण का इंतजाम कागजों में सीमित है। सुरक्षा की अनदेखी से यह दुर्लभ हिरण कुत्तों के हमले के साथ का बेलगाम शिकारियो का भी निशाना बन रहे हैं, इससे दुर्लभ प्रजाति के इन हिरणों के अस्तित्व खतरे में पड़ रहा है। इनके संरक्षण के लिए शासन को भेजे गए 1.37 करोड़ की कार्ययोजना को शासन की हरी झंडी मिलने का इंतजार है।
रसूलाबाद तहसील क्षेत्र के असलतगंज का यह जंगल बिल्हौर-रसूलाबाद मार्ग के समानांतर 6 किमी लंबाई में 173 हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैला है।इस वन की 80 हेक्टेयर भूमि में विलायती बबूल खड़े है। जंगल में दुर्लभ काले व चित्तीदार 250 हिरणों का कुनबा डेरा जमाए हुए है। इन हिरणों को नर्म घास अधिक पसंद होती है,लेकिन जंगल में इन हिरणों की पसंदीदा नर्म घास पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं है।
इन दुर्लभ हिरणों की मौजूदगी के बाद भी इनके चारे पानी का समुचित इंतजाम नहीं होने तथा सुरक्षा की अनदेखी से जंगल में कुलाचें भरने वाले इन हिरणों की जहां शिकारी अक्सर निशाना बनाते रहते हैं। वहीं चारे व पानी की तलाश में निकलने वाले यह दुर्लभ हिरन कुत्तों के हमले का भी शिकार हो रहे हैं। इससे इन दुर्लभ प्रजाति के इन हिरणों का अस्तित्व संकट में पड़ रहा है।
मौसम के अनुरूप रंग बदलता है यह दुर्लभ प्रजाति का हिरण
भारतीय मृग के नाम से पहचान रखने वाले यह एन्टीलोप (चैसिंगा) मृग मौसम के अनुरूप रंग बदलते रहते हैं। बरसात के मौसम में इन हिरणों के शरीर का ऊपरी हिस्सा काले रंग का नजर आता है, जबकि निचले हिस्से में सफेद रंग पर काले रंग के धब्बे दिखते हैं। सर्दियों के मौसम में काला हिरण अपना रंग खोने लगते हैंऔर अप्रैल तक यह भूरे रंग के हो जाते हैं।
हिरणवास स्थल सुधार व विकास को1.37 करोड़ की योजना
काला हिरण एक दुर्लभ प्रजाति है तथा संरक्षित वन्य जीव के अन्तर्गत आता है। जंगल में इनके लिए अनुकूल माहौल चारा, पेयजल की उपलब्धता के साथ ही सुरक्षा इंतजाम जरूरी हैं। इसके तहत वन अफसरों ने मुख्य वन संरक्षक की सहमति से हिरण वास स्थल के विकास, संरक्षण व सुरक्षा कार्य के लिए 1.37 करोड़ रुपये की कार्ययोजना शासन को प्रेषित की है, इसको शासन की मंजूरी का इंतजार है।
बोले जिम्मेदार...
असालतगंज के कटीले बबूल के जंगल में स्वछंद होकर विचरण कर रहे इन दुर्लभ हिरणों के लिए शेल्टर देना संभव नहीं है।जंगल में इनको आश्रय देने वाले पेड़ सुरक्षित रहे इसके लिए गश्त बढ़़ाई गई है। हिरण वास स्थल सुधार के लिए पानी की उपलब्धता के लिए तालाब बनाने, घास का मैदान विकसित करने, रिक्त स्थल पर हरियाली उगाने और चारा उपलब्ध कराने के लिए बेर के पौधे लगाने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। साथ ही शिकार प्रतिबंधित होने के बोर्ड भी लगाए गए हैं...एके द्विवेदी, डीएफओ।
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