हल्द्वानी: चिकित्सक ने लिखी बाहर की दवा, मरीज ने प्राचार्य से की शिकायत
हल्द्वानी, अमृत विचार। सुशीला तिवारी अस्पताल के चिकित्सक कमीशन का मोह नहीं छोड़ पा रहे हैं। मेडिकल कॉलेज प्राचार्य और चिकित्सा अधीक्षक के बाहर की दवा न लिखने के सख्त आदेशों के बावजूद चिकित्सक मरीजों को बाहर की दवा लिख रहे हैं।
ऐसा ही मामला गुरुवार को सामने आया है। जनपद के रामगढ़ ब्लॉक के ग्राम किलौर निवासी मनोज सिंह नेगी ने बाहर की दवा लिखने पर प्राचार्य डॉ. अरुण जोशी को एक शिकायती पत्र दिया है। जिसमें उसने कहा है कि पिछले कुछ दिनों से उसके चेहरे पर दाग धब्बे हो रहे थे। आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण वह हल्द्वानी एसटीएच में दिखाने आया था। यहां ओपीडी में पर्चा बनवाने के बाद वह त्वचा रोग विभाग में पहुंचा।
जहां चिकित्सक ने जांच के बाद पर्चे पर दवा लिखी और बाहर से लेने को कहा। जिसकी कीमत 1500 रुपये है। पत्र में मनोज ने कहा है कि उसे बड़ी उम्मीद थी कि त्वचा की परेशानी के इलाज के लिए अस्पताल से निशुल्क दवा मिलेगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उसने सवाल किया कि एक तरफ सरकार सरकारी अस्पतालों में निशुल्क दवा मिलने का वादा करती है, दूसरी तरफ पहाड़ के लोगों को नि:शुल्क दवा नहीं दी जा रही है। इधर, उत्तराखंड बेरोजगार संघ के कुमाऊं सहसंयोजक कार्तिक उपाध्याय ने सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य का मौलिक अधिकार को लेकर सरकार से राज्य में राइट टू हेल्थ बिल लाने की मांग की है।
मरीज की शिकायत के आधार पर मामले की जांच की जा रही है। सभी चिकित्सकों को पत्र लिखकर बाजार से दवा न लिखने को कहा गया है। त्वचा संबंधी जरूरी दवाओं की लिस्ट मांगी गई है, ताकि मरीजों को बाजार से दवा न खरीदनी पड़े और अस्पताल से ही उन्हें दवा उपलब्ध हो जाए।
- डॉ अरुण जोशी, प्राचार्य राजकीय मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी
