SGPGI 28th Convocation : समारोह में राज्यपाल ने बांटी उपाधि, कहा- माता-पिता और बड़े भाई को भूलना नहीं

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लखनऊ,अमृत विचार। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि जिंदगी में कभी भी अपने माता-पिता को भूलना नहीं, बड़े भाई को भी भूलना नहीं चाहिए, क्योंकि आपकी सफलता में पूरे परिवार का हाथ है। उन्होंने कहा कि होनहार स्टूडेंट अपने माता-पिता को दुखी मत करना। उन्होंने यह बातें संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान स्थित श्रुति सभागार में शनिवार को आयोजित 28वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुये कहीं। वह दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता कर रहीं थीं। इस अवसर पर उन्होंने 265 मेधावी छात्रों को डिग्री प्रदान की। वहीं 9 डॉक्टरों को अवार्ड देकर सम्मानित किया है।

राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने दीक्षांत समारोह के अवसर पर उपाधि और मेडल देते समय कहा कि यह सफलता आपकी है, लेकिन इसमें विशेष सहयोग मां का है,इसलिए मां को दुखी मत करना। इस अवसर पर उपाधि पाने वाली बेटियों को संबोधित करते हुये कहा कि मैं करीब 20 विश्वविद्यालयों के दीक्षांत समारोह में जा चुकी हूं, वहां सभी जगह बेटियों का दबदबा रहा है। ऐसे में बेटों को भी सोचना चाहिए कि कम से कम 50 प्रतिशत उपाधि वह भी प्राप्त करें। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि एसजीपीजीआई में और जगहों की अपेक्षा बेटियों की संख्या उपाधि पाने में कम रही है। यहां भी 50 फीसदी अवार्ड बेटियों को लेना चाहिए। आज मंच पर पुरुषों की संख्या अधिक है, लेकिन दस साल बाद मंच पर महिलाओं की संख्या अधिक होगी। दीक्षांत समारोह के दौरान डॉक्टर नारायण प्रसाद, एसजीपीजीआई अस्पताल विभाग के अध्यक्ष डॉक्टर राजेश हर्षवर्धन,सर्जिकल गैस्ट्रो एन्टेरोलॉजी विभाग के अध्यक्ष पद्मश्री डॉक्टर राजन सक्सेना, पीआरओ कुसुम समेत कई डॉक्टर और स्टाफ सदस्य उपस्थित रहे।        

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चिकित्सा व्यापार नहीं सेवा है : डॉ मनसुख मांडविया
कार्यक्रम में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने कहा हमारे समाज में यानी कि हिंदुस्तान में चिकित्सा पेशे को सेवा भाव के रूप में देखा जाता है, जबकि विदेशों में ऐसा नहीं है। आपका हॉस्पिटल मंदिर और मरीज नारायण है। यह सोचकर आप सभी को कम करना है। आपके कार्य से स्वस्थ समाज का निर्माण होगा और स्वस्थ समाज से समृद्ध भारत बनेगा। डा मनसुख मांडविया ने इस अवसर पर यह भी कहा कि आपकी सफलता में एसजीपीजीआई के चिकित्सकों का भी बड़ा हाथ है। ऐसे में आप सभी डॉक्टरों को अपने टीचर्स को भूलना नहीं चाहिए और आप दुनिया में कहीं भी रहे और कामयाबी हासिल करें, लेकिन अपने इस चिकित्सा संस्थान के प्रति आप की भी जिम्मेदारी बनती है।केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डा मनसुख मांडविया ने कहा कि अमीर और गरीब में कभी अंतर नहीं समझना चाहिए। हमें अमीर और गरीब के बीच की खाई को खत्म करना है। क्योंकि गरीब और मजदूर भी देश के निर्माण में अहम भूमिका निभाता है। हम जहां भी रहे देश के प्रति समर्पित रहे इस देश में ब्रेन और पावर दोनों मौजूद है।

आज पूरी दुनिया में चरक, सुश्रुत और धन्वंतरि की मूर्तियां लगाई जा रही हैं ।विश्व की सबसे बड़ी यूनिवर्सिटी में भी धन्वंतरि की फोटो लगाई गई है। ऐसे में हमें अपने इतिहास और पूर्वजों पर गर्व होना चाहिए।

विकसित भारत के लिए स्वस्थ भारत जरूरी : ले. जनरल डॉ. माधुरी कानितकर
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि ले. जनरल डॉ. माधुरी कानितकर ने कहा कि उपाधि और अवार्ड पाना यह सफलता आपकी है,लेकिन इस सफलता में आपके परिवार के साथ ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस अवसर पर उन्होंने उपाधि और अवार्ड पाने वाली महिलाओं से कहा कि आपको आगे बढ़ना चाहिए आपकी देश को जरूरत है। विकसित भारत के लिए सक्षम और स्वस्थ भारत का होना अति आवश्यक है। बीमार स्वास्थ्य व्यवस्था को ठीक करने की जिम्मेदारी हमारी है। जिस तरह से एसजीपीजीआई में काम हो रहा है ठीक उसी प्रकार का काम देश के मेडिकल कॉलेजों में आप जाकर कर सकते हैं। उन्होंने ने कहा कि भारत में तकनीक की कमी नहीं है। आप मरीजों की सेवा कर विकसित भारत बना सकते हैं।

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नई चुनौती के लिए रहें तैयार : ब्रजेश पाठक 
इस अवसर पर डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने कहा कि दीक्षांत समारोह हमें नई चुनौतियों के लिए तैयार करता है। जिन्हें आज डिग्रियां मिली हैं उन्हें नई चुनौती के लिए तैयार रहना चाहिए। उन्होंने बताया कि हमें 157 के करीब नर्सिंग कॉलेज खोलने का प्रस्ताव मिला है। वहीं राज्यमंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह ने कहा कि आप लोगों को डिग्रियां मिली है, ऐसे में आप से अपील है कि आप सभी सरकारी अस्पतालों से जुड़ें। मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्र ने कहा कि उपाधि पाने वाले सभी डॉक्टरों को जब भी मौका मिले, उस समय अपने आप को साबित करें। इसके अलावा जिंदगी सीखने के लिए है। इसलिए सीखना कभी मत छोड़ना।

इस अवसर पर एसजीपीजीआई के निदेशक प्रो.आरके धीमन ने संस्थान की उपलब्धियां गिनाई। साथ ही यह भी बताया कि हमें स्वास्थ्य सेवा प्रणाली को बेहतर बनाना है। जिससे किसी भी मरीज को इलाज के लिए बाहर न जाना पड़े। फरवरी 2024 में एडवांस डायबिटीज सेंटर की शुरूआत हो जायेगी। पीडियाट्रिक सेंटर को लेकर उन्होंने कहा कि  जल्द ही इसकी भी शुरूआत हो जायेगी। जिसमें 500 बेड से अधिक होंगे। उन्होंने बताया कि आज कुल 273 डिग्री दी गई है। वहीं उत्कृष्ट शोध के लिए 9 डॉक्टरों को पुरस्कार दिया गया है।

स्नातक डिग्री - 77

परास्नातक डिग्री - 185

स्नातक बीएससी (सीएमटी) 40

स्नातक बीएससी (नर्सिंग) 37

पीएचडी -3

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