संशय में किसान

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Edited By Amrit Vichar
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संसद से पास तीन कृषि विधेयकों के विरोध के बीच किसानों ने देशव्यापी प्रदर्शन किया है। हालांकि प्रदर्शन के केंद्र में हरियाणा, पंजाब व पश्चिमी उत्तर प्रदेश हैं मगर देशभर का किसान संशय में जरूर है। संसद में भी विधेयकों को लेकर विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच काफी तकरार देखने को मिली। किसानों की …

संसद से पास तीन कृषि विधेयकों के विरोध के बीच किसानों ने देशव्यापी प्रदर्शन किया है। हालांकि प्रदर्शन के केंद्र में हरियाणा, पंजाब व पश्चिमी उत्तर प्रदेश हैं मगर देशभर का किसान संशय में जरूर है। संसद में भी विधेयकों को लेकर विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच काफी तकरार देखने को मिली।

किसानों की इस बिल को लेकर भी जो आशंकाएं हैं उनका सरकार की तरफ से अभी सही जवाब नहीं आया है। अलबत्ता कृषी मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने विधेयकों को लेकर कांग्रेस पर किसानों को गुमराह करने का आरोप जरूर लगाया है। कृषि उपज को आवश्यक वस्तु अधिनियम से हटाने और इन विधेयकों के प्रावधानों को लेकर विपक्ष सरकार पर आक्रामक है।

हालांकि सरकार का कहना है कि खुद कांग्रेस पूर्व में किसानों के पक्ष में आवश्यक वस्तु अधिनियम की पैरवी कर चुकी है। बहरहाल, इन विधेयकों को लेकर अगर विपक्ष राजनीति कर रहा है तो वह गलत है, मगर किसानों के विरोध का सरकार को उचित जवाब तो देना ही होगा। दिख रहा है कि किसान आंदोलन का नेतृत्व किसी दल के हाथों में नहीं है और किसान स्वेच्छा से ही आंदोलन की रणनीति बनाकर उसे अंजाम दे रहे हैं। विपक्ष का इन आंदोलनों को समर्थन है।

अगर किसान राजनीति से इतर विधेयकों को लेकर आंदोलित है तो सरकार को उचित जवाब देना ही चाहिए। वैसे भी लोकतंत्र का नियम है कि विपक्ष सरकार से सवाल-जवाब जरूर करे ताकि सरकार का कोई भी निर्णय एकतरफा अथवा मनमानी लिए हुए न हो। विधेयकों को लेकर संसद में हालांकि विपक्ष के विरोध का जो तरीका था उसे कतई स्वीकार नहीं किया जा सकता है।

विपक्षी सांसदों ने राज्यसभा में खूब हंगामा किया, नतीजतन कुछ सांसदों को सत्र से निलंबित भी करना पड़ा। विपक्ष को समझना होगा कि संसद के भीतर विरोध का लोकतांत्रिक तरीका अपनाया जाना चाहिए और संसद के बाहर अगर धरना-प्रदर्शन की बात आती है तो उसका तरीका ऐसा हो कि आम जनता को कोई परेशानी न हो।

विरोध प्रदर्शन के रूप में फिलहाल तो ऐसा होता नहीं दिख रहा है क्योंकि किसान आंदोलन के चलते कई ट्रेनें आंशिक रूप से निरस्त कर दी गई हैं। किसान रेल पटरियों पर लेटकर आंदोलन कर रहे हैं।

किसी निर्णय के विरोध करने के अन्य लोकतांत्रिक तरीके भी हो सकते हैं, मगर जनता की परेशानी के साथ किए जा रहे आंदोलन से आम जन दूर ही रहता है यह विपक्ष को मालूम होना चाहिए। बहरहाल, सरकार को विपक्ष और किसानों की आशंकाओं का विस्तारपूर्वक समाधान करते हुए इस मामले का जल्द से जल्द पटाक्षेप करना चाहिए।