Allahabad High Court: 17 वर्षों से गुमशुदा पीड़िता के संबंध में हाईकोर्ट ने सचिव गृह से मांगा जवाब
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एससी/ एसटी एक्ट के तहत दर्ज मामले में अभियुक्त को सशर्त जमानत देते हुए 17 वर्षों से गुमशुदा पीड़िता के संबंध में निबंधक (अनुपालन) को आदेश की प्रति 48 घंटों के अंदर सचिव(गृह) उत्तर प्रदेश को उपलब्ध कराने के लिए कहा है। उक्त आदेश न्यायमूर्ति संजय कुमार सिंह की एकलपीठ ने बबलू की याचिका को स्वीकार करते हुए पारित किया है। मामले के अनुसार वर्ष 1995 में पीड़िता ने अपीलकर्ता व पांच अन्य के खिलाफ गाजियाबाद के पुलिस स्टेशन कोतवाली में आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज करवाया था।
पीड़िता का आरोप था कि अभियुक्त ने सह अभियुक्तों के साथ मिलकर उसके साथ दुष्कर्म किया। हालांकि याची के अधिवक्ता का तर्क था कि याची को मामले में गलत रूप से फंसाया गया है। मालूम हो कि पीड़िता वर्ष 2005 से लापता है। याची के अधिवक्ता का यह भी कहना है कि 17 वर्षों से अधिक समय बीत जाने के बाद भी पुलिस द्वारा पीड़िता का पता नहीं लगाया जा सका है, इसलिए मुकदमा लंबित है, जिसके कारण याची को अनावश्यक जेल यातना झेलनी पड़ रही है।
अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि अक्टूबर 2021 से आरोपी जेल में निरुद्ध है। पिछली सुनवाई के दौरान कोर्ट द्वारा जानकारी तलब करने पर सहायक पुलिस आयुक्त, गाजियाबाद ने अपने हलफनामे में बताया था कि पीड़िता का पता लगाने के लिए पुलिस विभाग की ओर से हर संभव प्रयास किया जा रहा है।
सोशल मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के सहारे उसे ढूंढने की कोशिश की जा रही है। इसके साथ ही गाजियाबाद, बदायूं और बरेली के रेलवे स्टेशनों तथा बस स्टैंडों व नारी निकेतन, बरेली में पीड़िता की गश्ती तलाश हो रही है। अंत में कोर्ट ने मामले की परिस्थितियों पर विचार करते हुए आरोपी को सशर्त जमानत दे दी। मौजूदा मामले की अगली सुनवाई आगामी 15 फरवरी 2024 को सुनिश्चित की गई है।
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