मुरादाबाद : छुट्टा पशु बर्बाद कर रहे खेतों की हरियाली, किसानों को हो रहा है नुकसान

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Edited By Amrit Vichar
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दुधारू पशुओं को नहीं मिल पा रहा हरा चारा, दुग्ध उत्पादन पर पड़ रहा असर,समस्या के समाधान की मांग

मुरादाबाद, अमृत विचार। इन दिनों किसानों के खेतों में बरसीम आदि हरे चारे की फसल लहलहाया करती थी। लेकिन इस बार छुट्टा पशु इन फसलों को बर्बाद कर रहे हैं। जिस वजह से दूध देने वाले पशुओं को हरा चारा खाने को नहीं मिल रहा है। जिसका असर दुग्ध उत्पादन पर पड़ रहा है और किसानों को भी काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है।

किसान खेतों में फसलों की पैदावार से लेकर देखभाल तक के लिए दिनरात पसीना बहाता है। ऐसे में अगर उसकी फसल को एक दिन में कोई बर्बाद कर दे, तो उसके सामने परेशानी खड़ी हो जाएगी। यह किसी को बताने की आवश्यकता नहीं है। लेकिन, आजकल किसानों के साथ कुछ ऐसा ही हो रहा है। इस समय किसान खेतों में दुधारू पशुओं के लिए बरसीम आदि हरे चारे की फसल बोते हैं।

 जिससे पशु को गन्ना अगोला व भूसा में मिलाकर खिलाया जाता है। लेकिन क्षेत्र के किसान इन दिनों छुट्टा पशुओं से काफी परेशान हैं। ये छुट्टा पशु कुछ ही घंटों में खेतों से हरियाली चटकर जाते हैं। जिससे किसान पशुओं को हरा चारा नहीं खिला पा रहे हैं। जिसका सीधा असर पशु के दूध के उत्पादन पर पड़ रहा है। पशुओं का दूध उत्पादन घट रहा है। इससे किसानों को दोहरा नुकसान हो रहा है। पहले किसान की फसल बर्बाद हो गई, दूसरा उसके पशु दूध भी कम दे रहे हैं। वहीं जिम्मेदारों ने समस्या को अनदेखा कर रखा है।

पहले तो सिर्फ गन्ना तौल पर्ची समय से नहीं आ रही थी। अब एक बार में सिर्फ ट्रिपलर की पर्ची पर 40 क्विंटल गन्ना तौल सकते हैं। ये इससे भी बड़ी परेशानी है। इसमें भी ज्यादा वजन के नाम पर पर्ची काट लेते हैं।- यशपाल सिंह, किसान नेता

मैंने अभी तक कुल पांच बीघा गेहूं बुआई की है। मिल पर्ची दे नहीं रहा। कोल्हू वाले दाम बहुत कम दे रहे हैं। वैसे तो जनवरी के आखिर तक गेहूं बुआई करेंगे। लेकिन, अब देर हो गई। इसका असर उत्पादन में दिखाई देगा।-सुदेश मुखिया, किसान

छुट्टा पशु की परेशानी को लेकर कई बार जिलाधिकारी से शिकायत कर चुके हैं। मगर अभी तक समाधान नहीं निकाला गया है। रोज किसान आखों के सामने अपनी फसल की बर्बादी देख रहा है।-चरन सिंह, किसान नेता

किसान का परिवार उसकी फसल से होने वाली कमाई पर निर्भर रहता है। ऐसे में अगर फसल ही न रहे, तो उसके परिवार का पालन-पोषण कैसे होगा। कुछ ऐसे ही हालात किसानों के सामने खड़े हैं।-चौधरी चरण सिंह, किसान

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