Farrukhabad News: रेड रॉट रोग लगने से खेतों में सूख गया गन्ना, कुदरत की दोहरी मार से टूट गया अन्नदाता
फर्रुखाबाद में रेड रॉट रोग लगने से खेतों में सूख गया गन्ना।
फर्रुखाबाद में रेड रॉट रोग लगने से खेतों में सूख गया गन्ना। कुदरत की दोहरी मार से अन्नदाता टूट गया।
फर्रुखाबाद, अमृत विचार। गंगा पार क्षेत्र में गंगा, राम गंगा नदी में आई बाढ़ से तबाह हुए किसान कुदरत की दोहरी मार से पूरी तरह टूट गए है। बाढ़ से ख़रीफ की फसलों के नष्ट हो जाने के बाद किसानों को गन्ना की फसल पर एक जून की रोटी मिलने की आस बंधी थी। गन्ना में रेड राट रोग लगने से खेतो में ही सूख गया है। जिससे अन्न दाता खून के आंशू रोने को मजबूर हो गया है।
अमृतपुर तहसील क्षेत्र में पिछले तीन महीने पूर्व आई भीषण बाढ़ से पूरा गंगापार क्षेत्र लगभग दो महीने तक जलमग्न रहा था। जिसका सबसे ज्यादा बुरा असर क्षेत्र के अन्नदाताओं पर पड़ा। अन्नदाताओं की उस समय खरीफ की फसलें पूरी तरह नष्ट हो गई थीं। मूंगफली, मक्का,उर्द,मूंग,शिवाला की फसलों के ऊपर दो महीने तक पानी नहीं उतरा। जिससे सारी फसलें पानी के अंदर ही सड़ गयीं थीं।
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पूरी तरह से तबाह अन्नदाताओं की आखिरी उम्मीद गन्ने की फसल पर टिकी थी। उन्हें उम्मीद थी कि गन्ना की फसल तैयार होने के बाद उनके बच्चों के एक जून की रोटी का इंतजाम हो जाएगा। उनकी यह आस उस समय टूट गई जब गन्ना की फसल में रेडराट रोग लग गया। नतीजतन गन्ना खेतो में हीसूख गया।
38 प्रजाति के गन्ने की फसल रेड रॉट रोग जिसे आम भाषा में गन्ने का कैंसर कहते है रोग के लगने से जिस खेत मे 400 सौ कुंतल गन्ना निकलना था, वहां 100 कुंतल ही निकल रहा है। जिससे किसानों की लागत तक निकलना मुश्किल हो रहा है। गन्ना किसान रामनिवास कड़ाहर निवासी बताते हैं कि हम लोग पहले ही पूरी तरह बाढ़ में अपनी फसलें नष्ट हो जाने से कर्जदार हो गये, अब रही सही कसर गन्ना में रोग लग जाने से पूरी हो गई।
गन्ना की फसल में कैंसर रोग लग जाने से वो भी नष्ट हो गई है। छविराम राजपूत कुमरपुरा निवासी बताते हैं कि उन लोगों की गन्ने की फसल 25 फीसदी ही बची है 75 फीसदी फसल कैंसर रोग होने से खराब हो गई है। अब बैंको का लोन कहां से चुकाएगा जो उसने फसल तैयार करने के लिये लिया था। कड़हर के रहने वाले जागेश्वर बताते हैं कि उसने उगाही पर 20 बीघा जमीन लेकर गन्ना बोया था। उसमें कैंसर रोग लग गया।
जिससे पूरी तरह से गन्ने की फसल चली गई। अब कहां से खेत मालिक को उगाही का पैसा देगा। कहां से साहूकारों से लिया उधार चुकाएगा। फखरपुर के रहने वाले रघुनंदन लाल तिवारी, पप्पू तिवारी, ओमप्रकाश तिवारी, शिवदत्त तिवारी, रामदत्त तिवारी बताते हैं लगभग 20-25 एकड़ जमीन में गन्ने की फसल करते हैं।
इन लोगों का कहना है हम लोगों का बहुत बड़ा नुकसान हुआ है। जिसकी भरपाई आने वाले दो तीन वर्षों में नही हो पाएगी। उनका कहना है कि सरकार की तरफ से भी कोई इमदाद मिलने कीउम्मीद नहीं है। उधर बैंकों से जो लोन लिया है उसकी भरपाई करना हम लोगों के लिए बहुत मुश्किल हो जाएगा।
क्या कहते हैं जिम्मेदार
गन्ना में लगे रोग के बारे मे गन्ना विभाग के सुपरवाइजर राजीब कुमार मिश्रा ने बताया अधिक दिनों तक गन्ने की फसल में पानी भरे रहने से ये रोग लगा है। इस रोग को लाल सड़ा भी कहते हैं। अंग्रेजी में रेड रॉट कहा जाता है। इसे आम भाषा में गन्ने का कैंसर भी कहते हैं। इसका कोई इलाज नहीं हो पाता है । यह रोग लगने के बाद गन्ना खराब हो जाता है। आज तक इस रोग की रोक थाम के लिए कोई कीट नाशक नही बना है।
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