Video- भोलेनाथ को अर्पित की जाती है BHU में बनने वाली औषधि, प्रोफेसर ने दान लेकर बनवाया था ये मंदिर 

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Published By Jagat Mishra
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प्रहलाद पाण्डेय / वाराणसी, अमृत विचार। काशी हिंदू विश्वविद्यालय की स्थापना भारत रत्न पंडित मदन मोहन मालवीय ने लोगों से दान देकर की थी। इसी बात को आत्मसात करते हुए विज्ञान संस्थान आर्युवेद संकाय के रस शास्त्र विभाग के प्रोफेसर आनंद कुमार ने दान से ही रसेश्वर महादेव मंदिर की स्थापना की। ये मंदिर 2018 में बनकर तैयार हुआ। भगवान भोलेनाथ को औषधियों के जनक कहा जाता है इसी उद्देश्य से "रसेश्वर महादेव मंदिर" का निर्माण कराया गया। मंदिर में भगवान शिव, मां पार्वती, कार्तिकेय और गणेश जी की प्रतिमा के साथ ही महामना जी की प्रतिमा स्थापित किया गया है। प्रोफेसर आनंद कुमार ने बताया कि रस शास्त्र विभाग में जो भी औषधि दवा बनती है उसे सर्वप्रथम औषधि के देवता भगवान भोलेनाथ और भगवान धन्वंतरि को समर्पित किया जाता है। इसके बाद ही यह लोगों को कष्ट निवारण के लिए दिया जाता है। 

बता दे की महामना पं मदनमोहन मालवीय समाज को शिक्षित करने के साथ ही लोगों को स्वस्थ रखने के लिए आर्युवेद चिकित्सा की स्थापना 1922 से 1932 के बीच बीएचयू में की थी। महामना अपनी दैनिक दिनचर्या के तहत आर्यवेदिक फार्मेसी का निरिक्षण भी करते थे। आर्यवेदिक औषधियों के निर्माण प्रक्रिया के तहत भस्मों के पाक के क्रम में अघोरेश्वर शिव की आराधना के लिए 1950-60 में प्रो दत्तात्रेय अनंत कुलकर्णी ने पुराने आर्युवेदिक फार्मेसी विभाग में रस शास्त्रीय प्रक्रियाओं के लिए शिव आराधना के लिए मंदिर का निर्माण कराया था। यह मालवीय जी के द्वारा स्थापित परंपरा में से एक परंपरा है जिसका निर्वहन आज भी किया जा रहा है। प्रोफेसर आनंद ने बताया कि कोविड काल में जिस समय देश परेशान था उसे समय हम लोगों द्वारा औषधि काढ़ा बनाया गया था जो लोगों को प्राण दान दे रहा था।

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