Bareilly: तो डिस्टलरी के जहरीले पानी से हुई मछलियां की मौत...अग्रिम कार्रवाई को टीम गठित
बरेली, अमृत विचार। रामगंगा नदी में प्रदूषित पानी के कारण हजारों मछलियों की मौत मामले में नया खुलासा है। विभाग की प्रारंभिक जांच में संकेत मिला है कि एक डिस्टिलरी बिना ट्रीटमेंट के गंदा पानी नाले में बहा रही है, जो कोसी नदी के रास्ते रामगंगा में मिल रहा है। इसकी वजह से बड़े पैमाने पर मछलियां मर गईं थीं। उप निदेशक मत्स्य गायत्री पांडेय ने मामले में एसडीएम मीरगंज को पत्र लिखा। इसके बाद एसडीएम ने प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए अग्रिम कार्रवाई के लिए टीम गठित कर दी है।
यह मामला 6 से 8 दिसंबर तक का है, जब रामगंगा नदी में हजारों मछलियों की मौत हुई थी। मरी हुई मछलियां पानी पर तैरती देखकर ग्रामीण और मछली कारोबारी बड़ी संख्या में मौके पर जुट गए थे। इस दौरान ट्रकों में मछलियां भरकर ले जाने की बात सामने आई। सूचना पर पहुंची मत्स्य विभाग की प्राथमिक जांच में खुलासा हुआ कि रामपुर की तरफ से आ रहा काला पानी, जिसमें झाग भी दिखाई दे रहे थे, सीधे मछलियों के लिए जानलेवा साबित हुआ। विभाग की जांच में संकेत मिला कि एक डिस्टिलरी बिना ट्रीटमेंट के गंदा पानी नाले में बहा रही है, जो कोसी नदी के रास्ते रामगंगा में मिलकर पानी को जहरीला बना रहा है।
वहीं, विभाग के जानकारों का कहना है कि प्रदूषण का कारण केवल डिस्टिलरी ही नहीं, बल्कि उत्तराखंड के काशीपुर की फैक्ट्रियां भी हैं। काशीपुर की फैक्ट्रियों से निकलने वाला गंदा पानी बहल्ला नदी में जमा होकर जहरीला हो गया है और यह पानी रामपुर शहर से करीब 10 किमी पहले कोसी नदी में मिलकर रामगंगा में प्रवेश करता है। इस श्रृंखला से रामगंगा नदी का पानी मछलियों के लिए काल बन गया। उप निदेशक मत्स्य गायत्री पांडेय का कहना है रामगंगा में जहरीला पानी होने से मछलियों की मौत के साथ ही लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी और इलाके की पारिस्थितिकी को भी गंभीर नुकसान पहुंचाया है। स्थानीय समुदाय का मछली पालन पर भी संकट गहराया है।
