बरेली: छुट्टा पशु... रात-रात भर जागे किसान, नहीं जागा सिस्टम
बरेली, अमृत विचार। छुट्टा पशु ग्रामीणों के लिए बड़ी समस्या हैं। पशु फसलें उजाड़ने के साथ ग्रामीणों पर हमले कर रहे हैं। सांड़ों के हमले में साल भर में आधा दर्जन से अधिक लोगों की जान गई और कई लोग घायल हो गए। फसलों को बचाने के लिए किसान रात-रात भर जागे। मुख्यमंत्री तक अपनी बात पहुंचाने के लिए आईजीआरएस को माध्यम बनाया। संपूर्ण समाधान दिवसों में भी शिकायतें कीं लेकिन सिस्टम नहीं जागा।
प्रभारी मंत्री जयवीर सिंह की बैठकों से लेकर दिशा की बैठक में भी छुट्टा पशुओं से फसलों को बचाने के मामले खूब उठे हैं लेकिन ग्रामीणों के लिए गंभीर बन चुकी इस समस्या से निजात दिलाने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए। आंवला तहसील क्षेत्र के पिपरिया उपराला गांव के ग्रामीण फसलों की बर्बादी देख इतना आक्रोशित हो गए थे कि 7 अगस्त को बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने पशुपालन मंत्री धर्मपाल सिंह, अपर मुख्य सचिव डा रजनीश दुबे आदि अफसरों के काफिले को छुट्टा पशुओं को सड़क पर खड़ाकर रोक दिया था। इस घटना का शोर प्रदेशभर में मचा।
सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी एक्स (ट्विटर) के जरिए राज्य सरकार पर निशाना साधा था। घटना की गंभीरता को देखते हुए मंत्री धर्मपाल ने पशुपालन विभाग के अफसरों को छुट्टा पशुओं काे पकड़ने के निर्देश जारी किए थे। कई दिनों तक जिले की तहसीलों में छुट्टा पशुओं को पकड़ने का अभियान भी चलाया लेकिन फिर सब शांत हो गए। आज भी छुट्टा पशु फसलों को बर्बाद कर रहे हैं और जिले में सांड राह चलने वाले लोगों पर हमलावर हैं।
छुट्टा पशुओं के कारण आंवला में खराब होने से बचा था माहौल
पशुपालन मंत्री धर्मपाल सिंह आंवला से ही विधायक हैं। आंवला क्षेत्र में छुट्टा पशुओं से ग्रामीण बहुत परेशान रहे। 17 अगस्त को मंत्री धर्मपाल सिंह, अपर मुख्य सचिव डॉ. रजनीश दुबे आंवला तहसील के गुरगांवा में पशु पॉली क्लीनिक का भूमि पूजन करने जा रहे थे, तभी सिरौली क्षेत्र में पिपरिया उपराला गांव की सड़क पर ग्रामीणों ने छुट्टा पशुओं को खड़ाकर मंत्री का काफिला रोक लिया था। काफिला करीब 40 मिनट तक फंसा रहा। ग्रामीणों ने मंत्री के सामने प्रदर्शन किया था। छुट्टा पशुओं से निजात दिलाने का आश्वासन देने के बाद ग्रामीणों ने उन्हें जाने दिया था। आंवला के नायब तहसीलदार और सीओ को भी ग्रामीणों के गुस्से का सामना करना पड़ा था।
सांडों के हमले में इन लोगों ने गंवाई जान
- 6 जुलाई: भुता थाना क्षेत्र के गांव फैजनगर निवासी नन्हे शाह उर्फ साकी 60 वर्ष अपने निजी काम के लिए घर से निकले थे गांव के चौराहे पर ही आवारा सांड ने उन्हें पटक पटक कर मार डाला था।
- 1 दिसंबर: बिशारतगंज में शाहजहांपुर निवासी प्रहलाद को एक सांड ने टक्कर मारी थी, जिससे उनकी मौत हो गई थी।
- 7 नवंबर : भमोरा के गांव सिरसा निवासी देवेंद्र को दो सांडों ने मारकर घायल किया था, जिनकी इलाज के दौरान मौत हो गई थी।
- 5 सितंबर : आंवला के सिरौली के गांव बसंतपुर में सांड ने 65 वर्षीय रूपपाल को खेत से भगाने के दौरान घायल कर दिया था, जिनकी इलाज के दौरान मौत हो गई थी।
- 10 मार्च: उत्तराखंड बार्डर के समीप स्थित गांव पृथ्वीपुर के भीमसेन को खेत में काम करने के दौरान सांड ने हमला कर बुरी तरह घायल कर दिया था। इलाज के दौरान मृत्यु हुई थी।
-30 दिसंबर: क्योलड़िया में घर से सुबह फज्र की नमाज अदा करने मस्जिद जा रहे मुतवल्ली को सांड ने पटककर मार दिया था।
शहर में सैकड़ों गोवंशों के साथ लोग भी घायल, मालिकों पर नहीं कार्रवाई
शहर की सड़कों पर जनवरी से दिसंबर तक सड़क हादसों में 900 गोवंश घायल हुए हैं। इन हादसों में गोवंशों की वजह से दोपहिया वाहन चालक भी घायल हुए लेकिन पशु विभाग ने छुट्टा गोवंशों की वजह से घायल होने वाले लोगों का डाटा नहीं रखा है।
शहर के डेलापीर चौराहे पर मंडी के पास दिनभर गोवंश और सांड सड़क घेरे खड़े रहते हैं, इन्हें सड़क से हटाने के लिए पशुपालन विभाग की ओर से कोई कार्रवाई नहीं गई। इसमें अधिकतर वे गोवंश हैं जो लोगों के घरों में पाले जाते हैं। गोवंश के कान में लगे टैग को काटकर लोग हटा देते हैं। ऐसे में उस गाय की जानकारी अधिकारी भी नहीं कर पाते हैं। यही वजह है कि पशु के मालिकों पर भी कोई कार्रवाई नहीं हो पाती है।
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