कासगंज: परिवार परामर्श केंद्र में बीते साल टूटने से बचाए 52 परिवार, नए साल में प्रयास तेज
कासगंज, अमृत विचार: बदलते परिवेश में दंपतियों के रिश्तों में दरार आने के मामले तेजी से बढ़े हैं। परिवार परामर्श केंद्र (प्राजेक्ट दीदी) और जनपद न्यायालय में बड़ी संख्या में पति पत्नी के बीच मनमुटाव और रार के मामले पहुंच रहे हैं। इन मामलों में बहुत कम ही मामले ऐसे होते हैं, जिनमें दंपति फिर से साथ रहने को राजी होते हैं। अधिकांश मामलों में उनके रिश्ते टूटने की कगार पर ही होते हैं।
परिवार परामर्श केंद्र में पिछले वर्ष कुल 168 मामले दंपति के बीच के विवाद के पहुंचे। इनके बीच प्रोजेक्ट दीदी के सदस्यों ने सुलह कराने के काफी प्रयास किए, लेकिन मात्र 52 मामलों में ही समझौता कराने में सफलता मिल सकी।
तमाम मामलों में सुलह के लिए एक पक्ष के प्रार्थना पत्र को दूसरा पक्ष तवज्जो ही नहीं देता। काउंसलिंग के दौरान भी किसी एक पक्ष के राजी न हो पाने की स्थिति में पत्रावली बंद हो जाती हैं। पिछले वर्ष आए एक कुछ मामले में तो पति पत्नी के बीच सात महीने से एक साल के बीच ही दरार आ गई। हांलाकि प्रोजेक्ट दीदी के काउंसलरों की मेहनत से नो टूटते परिवार बचाये गए उनमें खुशियां हैं।
चार मई 2008 को हुई प्रोजेक्ट दीदी की पहली बैठक
परिवारों के बीच उलझे रिश्तों को सुलझाने के लिए और उनके बीच की दूरियां खत्म करने के लिए जनपद में प्रोजेक्ट दीदी का गठन हुआ। दंपतियों की समस्याओं को निस्तारण के लिए पहली बैठक चार मई 2008 को हुई थी।
परिवार परामर्श केंद्र में दंपतियों के बीच दरार वाले जो भी मामले आते हैं, उन्हें पूरी गंभीरता के साथ लिया जाता है। दंपति के बीच आपसी सुलह कराकर परिवार को टूटने से बचाने का पूरा प्रयास किया जाता है--- सुधा रानी मुख्य आरक्षी, परिवार परामर्श केंद्र।
महिलाओं को अपने अहम को छोड़कर सहनशीलता का परिचय देना चाहिए। अक्सर विवाद महिलाओं के बीच अहम को लेकर हुए मतभेद उनके दांपत्य जीवन के दरकने का कारण बनते हैं। दूसरों को अपने से अधिक महत्व देने से परिवार उनका स्थान बढ़ता है और रिश्तों में मधुरता और मजबूती आती है। पुरुषों को भी सहनशीलता का परिचय देना चाहिए --- डा. मनोज शर्मा, प्रोजेक्ट दीदी सदस्य।
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