लखीमपुर खीरी: देशी घी में फॉरेन फैट की मिलावट मिली, दूसरी जांच में भी नमूना फेल
तीन अलग-अलग ब्रांडों का पान मसाला भी खतरनाक गैंबियर के कारण असुरक्षित घोषित
लखीमपुर खीरी, अमृत विचार। जनपद में मिलावटखोरी के मामले कम नहीं हो रहे हैं, बल्कि देशी घी समेत तीन अलग-अलग बांड के पान मसाला के नमूने लैब जांच में असुरक्षित (मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक) करार दिए गए हैं। देशी घी में फॉरेन फैट (विजातीय वसा) की मिलावट पाई गई है, यानि इसमें दूध का फैट नहीं है। इसी तरह पान मसाला के तीनों नमूनों मंे खतरनाक केमिकल गैबिंयर की मिलावट पाई गई है, जो मानव स्वास्थ्य के लिए काफी हानिकारक है।
जांच में नमूनों को स्वास्थ्य के लिए असुरक्षित बताए जाने पर इस मामले में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग (एफएसडीए) के सहायक आयुक्त खाद्य ने चारों दुकानदारों समेत संबंधित निर्माता कंपनियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा, जिसके बाद अब संबंधित आरोपियों के खिलाफ सिविल न्यायालय में वाद दायर करने के लिए आयुक्त एफएसडीए से अनुमति मांगी है।
एफएसडीए के खाद्य सुरक्षा अधिकारियों द्वारा मई-जून 2023 में दुकानों से खाद्य पदार्थों के नमूने भरकर जांच के लिए लैब भेजे गए थे, जिनमें से चार नमूने असुरक्षित पाए गए हैं। दिल्ली में निर्मित डेयरी महक ब्रांड देशी घी का नमूना गोला गोकर्णनाथ स्थित एक दुकान से लिया गया था, जिसकी लैब जांच में फॉरेन फैट की मिलावट पाई गई है। इससे लैब विश्लेषक ने इस नमूने को मानव स्वास्थ्य के लिए असुरक्षित बताया है। इस मामले में नोटिस दिए जाने के बाद दुकानदार ने अपने पैसे खर्च कर गाजियाबाद की लैब से रेफरल जांच कराई, तो उसमें भी नमूना असुरक्षित करार दिया गया है। इससे दुकानदार समेत निर्माता कंपनी के खिलाफ एफएसडीए ने सिविल न्यायालय में वाद दायर करने के लिए आयुक्त एफएसडीए से अनुमति मांगी है।
इसके अलावा गोला स्थित एक दुकान से दिल्ली निर्मित पान बहार नामक पान मसाला का नमूना लिया गया था, जबकि कानपुर निर्मित एक दुकान से गगन ब्रांड पान मसाला का नमूना लिया गया था। वहीं नेपाल बार्डर स्थित कस्बा भीरा से नेपाल में निर्मित मेघा श्री नामक पान मसाला का नमूना भरकर लैब जांच के लिए भेजे गए थे। सहायक आयुक्त खाद्य कौशलेंद्र शर्मा ने बताया कि तीनों ब्रांड के पान मसाला में खतरनाक केमिकल गैंबियर की मिलावट पाई गई है, जो मानव स्वास्थ्य के लिए काफी हानिकारक होता है। इन तीनों पान मसालों को लैब विश्लेषक द्वारा स्वास्थ्य के लिए असुरक्षित बताया गया है। इसलिए पान मसाला बेचने वाले तीनों दुकानदारों समेत निर्माता कंपनियों को नोटिस भेजकर जवाब मांगा, जिसमें संतोषजनक उत्तर न मिलने पर आगे की कार्रवाई की जा रही है।
संदिग्ध वसा से पाचन तंत्र होगा खराब
खाद्य सुरक्षा अधिकारी कुलदीप दीक्षित ने बताया कि दूध में प्राकृतिक वसा होती है और वही देशी घी में भी होनी चाहिए। वसा युक्त पदार्थ पेट में पचने में समय लेते हैं, लेकिन फॉरेन फैट जैसे वनस्पति या एनिमल फैट (पशु का वसा) जल्दी हजम नहीं होता है। इससे पाचन तंत्र को गंभीर क्षति पहुंच सकती है। ऐसे वसायुक्त दूध, मिठाई या देशी घी का सेवन करने से आमाशय, लिवर, आंत आदि को क्षति पहुंच सकती है। ये दिक्कतें पैदा होने पर भूख भी कम हो सकती है।
देशी घी में फॉरेन फैट पाया गया है, जो स्वास्थ्य के लिए असुरक्षित है। तीन अलग-अलग ब्रांड के पान मसाला के नमूनों में भी खतरनाक केमिकल गैंबियर की मिलावट पाई गई है, जिसे कत्थे के स्थान पर प्रयोग किया जाता है। इससे पान मसाला को भी स्वास्थ्य के लिए असुरक्षित पाया गया है। इसलिए चारों दुकानदारों समेत संबंधित निर्माता कंपनी के खिलाफ एसीजेएम कोर्ट में मुकदमा दायर किया जाएगा। मुकदमे में आरोप सिद्ध होने पर विक्रेता व निर्माता को कारावास की सजा के साथ अधिकतम पांच लाख रुपये जुर्माना देना पड़ सकता है- कौशलेंद्र शर्मा, सहायक आयुक्त (खाद्य) एफएसडीए।
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