गलत रस्म-ओ-रिवाज से खुद को दूर रखे मुसलमान : मुफ्ती अफ्फान

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Edited By Amrit Vichar
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जामा मस्जिद में दो दिवसीय इज्तिमा शुक्रवार मुक्कमल, 25 जोड़ों का हुआ निकाह, 30 जमातें हुईं रवाना

अमरोहा, अमृत विचार। शहर की जामा मस्जिद के मैदान में दो दिवसीय इज्तिमा शुक्रवार सुबह मुक्कमल हो गया। इस दौरान मुल्क में अमन-चैन और कौम की तरक्की की दुआ मांगी गई। आखिरी दिन हाथ में तस्बीह और जुबां पर अल्लाह के जिक्र के बीच हजारों लोगों ने बारगाहे इलाही में अपने गुनाहों से तौबा की और बाकी जिंदगी अल्लाह की राह में गुजारने का अहद किया। इस दौरान  30 जमातों की रवानगी के साथ ही इज्तिमा में 25 जोड़ों का निकाह भी कराया गया।

इज्तिमा के आखिर दिन सुबह फज्र की नमाज के बाद मुफ्ती मोहम्मद अरमान ने तकरीर में जिंदगी को दीन के मुताबिक गुजारने का तरीका बताया। उन्होंने कहा कि हमारे पास जो बेहतर है वह लोगों तक पहुंचे और उसको भी इससे फैज हासिल हो। इससे बेहतर कोई दूसरी बात नहीं हो सकती। जमात का भी यही काम है। उन्होंने कहा कि मौजूदा दौर इस काम के लिए बेहद आसान हो चुका है। अब टेक्नोलॉजी से अपनी बात बहुत जल्द दूसरे लोगों तक पहुंचाई जा सकती है, लेकिन इससे पहले नबियों को इस काम में बड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ा था।

 अच्छी बातों को दूसरे लोगों तक पहुंचाने के लिए उन्हें मीलों का सफर पैदल करना पड़ता था। जमातों, मुलाकातों और इज्तिमा के जरिये इसी बात पर मेहनत की जा रही है। निकाह के बाद और दुआ से पहले मदरसा जामिया अरबिया जामा मस्जिद के सदर मुदर्रिस एवं विख्यात आलिमेदीन मुफ्ती सैय्यद मोहम्मद अफ्फान मंसूरपुरी ने इज्तिमा को खिताब किया। कहा कि गलत रस्म-ओ-रिवाज से खुद को दूर रखे। उन्होंने कहा कि अल्लाह के तरीकों और कुरान की तालीम के साथ हम नबी के बताए रास्तों पर चलेंगे तो दुनिया की कोई ताकत और साजिश कुछ नहीं बिगाड़ पाएगी। इसके साथ ही दुनिया में भी कामयाबी मिलेगी और इस अमल से आखिरत में भी आसानियां होंगी। 

उन्होंने शादियों में फिजूलखर्ची से बचते हुए निकाह को आसान बनाने पर जोर दिया। गरीबों से हमदर्दी और मजलूम का साथ देने की बात कही। यह ही अल्लाह का पैगाम है। आखिर में नमाज और कुरान की तिलावत की ताकीद करते हुए दीन के रास्ते पर जिंदगी गुजारने का दर्स दिया। मुफ्ती मोहम्मद शाहिद ने दुआ कराई तो पंडाल में लोगों की आंखे नम हो गईं। सन्नाटे के बीच सिर्फ सिसकियों की आवाज सुनाई देती रही। आखिरी दिन इज्तिमा में बड़ी संख्या में शहर के साथ-साथ अन्य जनपदों से आए लोगों ने शिकरत की।

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