रक्षा का अचूक मोर्चा

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Edited By Amrit Vichar
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पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर हमारी सेना ने जब युद्धक विमान और भीष्म टी-72 टैंकों की तैनाती की तो यह इस बात का साफ संकेत है कि अपनी विस्तारवादी नीतियों के लिए जाने जाना वाला चीन पूर्वी लद्दाख में अब हमारी तरफ आंख उठाकर नहीं देख सकता। चीन के लिए यह कड़ा …

पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर हमारी सेना ने जब युद्धक विमान और भीष्म टी-72 टैंकों की तैनाती की तो यह इस बात का साफ संकेत है कि अपनी विस्तारवादी नीतियों के लिए जाने जाना वाला चीन पूर्वी लद्दाख में अब हमारी तरफ आंख उठाकर नहीं देख सकता। चीन के लिए यह कड़ा संदेश इसलिए भी जरूरी है कि कई बार बातचीत के बहाने उसने हमें धोखा दिया है। मगर अब उस तक यह बात साफ तौर पर पहुंच गई है कि उसकी किसी भी चाल से निपटने के लिए हमारी सेना सीमा पर उसकी एक-एक गतिविधि पर निगाह रखते हुए उसके हर हमले का जवाब देने में सक्षम है।

उसे यह साफ संदेश गया है कि पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) अब सीमा पर किसी भी गैर जरूरी हरकत की तरफ गया तो उसे मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। इस बारे में कोई दो राय नहीं कि चीन के मोर्चे पर भारत ने न केवल सैन्य बल्कि कूटनीतिक स्तर पर भी बढ़त हासिल की है। इस बीच भारतीय सैनिकों ने गलवान मुद्दे के बाद एलएसी की तमाम ऐसी पोस्टों पर अपना कब्जा जमा लिया है जहां चीनी सैनिकों से उनकी गुत्थमगुत्था होती थी। महत्वपूर्ण बात यह है कि ऊंचाई वाली इन पोस्ट पर कब्जे के लिए चीनी सैनिक कभी भी स्थानीय स्तर पर गलवान जैसी घटना दोहरा सकते हैं।

लिहाजा रक्षा का यह अचूक मोर्चा जरूरी था। चीन पहले ही अपनी सीमा पर तमाम युद्धक सामग्री, टैंक, विमान आदि तैनात कर चुका है। हालांकि उसे इस बात का अच्छी तरह से पता है कि भारत पर हमले की वह गलती नहीं कर सकता है। उसे भारत की सैन्य क्षमताओं के बारे में अब ठीक ढंग से मालूम हो चुका है। इसके अलावा आमने-सामने की भिड़ंत में भारतीय सैनिकों ने पीएलए के सैनिकों का जो हाल किया उससे भी चीन को अंदाजा हो चुका है कि पारंपरिक युद्ध और बॉर्डर पर सैनिकों के साथ झड़प उसके हित में नहीं है।

चूंकि अपनी सैन्य क्षमता का उसे प्रदर्शन करना है लिहाजा सीमा पर युद्ध की तरह तैयारियां उसकी मजबूरी है। भारत ने अब उसे उसकी ही भाषा में जवाब देते हुए 14 हजार 5 सौ फुट की ऊंचाई पर भी पीएलए की हर हरकत का जवाब देने के लिए पूरी तैयारी कर ली है। तैयारियां ऐसी हैं कि शून्य से नीचे 40 डिग्री तक कम तापमान में भी सीमा पर चीन हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकता है। चीन के साथ भले ही अभी कमांडर स्तर की वार्ता में सीमा पर शांति के लिए तमाम बिंदुओं पर सहमति बनी हो, मगर चीन की धोखा देने वाली नीति से हमें सावधान रहते हुए अपनी रक्षा तैयारियों को इसी तरह दुरुस्त करना ही होगा।