बरेली: 'आत्मदाह ही बचा है आखिरी रास्ता, समाधान नहीं हुआ तो लाशें उठेंगी', किसानों ने दी चेतावनी...जानिए मामला
अखिल भारतीय किसान महासभा अध्यक्ष और किसानों ने 18 को आत्मदाह की दी चेतावनी
बरेली, अमृत विचार: कई साल से बड़ा बाईपास के निर्माण में अधिग्रहित की गई जमीन के मुआवजे की मांग कर रहे किसानों के सब्र का बांध अब टूट चुका है। तमाम प्रयासों के बाद भी अब तक मुआवजे के लिए उचित रास्ता नहीं निकलने से परेशान किसानों ने अब आत्मदाह की चेतावनी दी है। कहा कि अब उनकी लाशें ही उठेंगी।
सोमवार को अखिल भारतीय किसान महासभा अध्यक्ष की अगुवाई में पहुंचे काफी किसानों ने जिला प्रशासन और एनएचएआई के अफसरों को दस दिन का समय दिया है। किसानों ने एडीएम प्रशासन दिनेश को सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को संबोधित मांग पत्र भी सौंपा है।
यह भी पढ़ें- बरेली: ठंड का असर... जिला अस्पताल की ओपीडी में उमड़े मरीज, बुखार-त्वचा रोगियों की संख्या ज्यादा
अखिल भारतीय किसान महासभा के जिलाध्यक्ष हरिनंदन सिंह पटेल ने कहा कि जिला प्रशासन और एनएचएआई काे 10 दिन का समय दे रहे हैं। इस बीच उन्होंने समाधान का रास्ता नहीं निकाला तो 18 दिसंबर को कलेक्ट्रेट में ही एक बजे किसानों के साथ वह खुद आत्मदाह करेंगे। कहा कि इसके अलावा किसानों के पास कोई रास्ता नहीं बचा है।
एनएचएआई के अफसर तानाशाह बने हुए हैं। उन्हें किसानों की पीड़ा नहीं दिख रही। उनकी रोड तो बन गई और टोल भी वसूल रह रहे हैं। किसानों को जितना पैसा देना है, उससे ज्यादा का तो टोल ले चुके हैं। अध्यक्ष ने एडीएम से कहा कि यहां से उनकी और किसानों की लाशें उठेंगी।
किसानों की बात सुनने के बाद एडीएम प्रशासन ने उन्हें आश्वासन दिलाया। कहा कि उनकी पीड़ा समझ सकते हैं। बात जिलाधिकारी के सामने रखेंगे। इस दौरान कलावती, सर्वेश कुमार, सूरज कुमार, भीमसेन, चेतराम, रामकिशोर, दुर्गेश कुमार, अमर सिंह, सत्यपाल, रामस्वरूप, विमला, पिंकी, लक्की, श्यामलाल, सुरेंद्र सिंह, केदार सिंह, अकबर खां, तौसीफ, अजीम खां, सूरज कुमार, छत्रपाल, रहमान खां, कैलाश, राममूर्ति समेत काफी संख्या में किसान मौजूद रहे।
यह है पूरा मामला
दरअसल, वर्ष 2013 में रजऊ परसपुर से परसाखेड़ा तक करीब 32.5 किलोमीटर लंबा बड़ा बाईपास बनाया गया था। इसमें 33 गांवों के करीब हजारों किसानों की जमीन अधिग्रहित की गई थी। बाकियों को मुआवजा मिल चुका है, लेकिन छह सो किसानों को कई विसंगतियों की वजह से मुआवजा नहीं मिल सका है। किसान 10 साल से मुआवजा अधिक सर्किल रेट के अनुसार मांग रहे हैं।
मुआवजे के लिए किसानों ने जिला प्रशासन, एनएचएआई के अफसरों से लेकर कोर्ट का भी दरवाजा खटखटाया। मंत्री, सांसद से लेकर दिल्ली जाकर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के सामने भी अपना दुखड़ा सुनाया, लेकिन फिर भी अभी कोई ठोस निष्कर्ष नहीं निकल सका।
पिछले दिनों केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के आदेश पर भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के सदस्य प्रशासन एवं वरिष्ठ आईएएस विशाल चौहान बरेली पहुंचे थे। उनकी मौजूदगी में अधिग्रहण हुई जमीन के मुआवजे को लेकर सर्किट हाउस में बैठक हुई थी। किसान नेता ने तीन गांवों के समान छह सौ किसानों काे मुआवजा देने की मांग उठाई थी, इस पर अभी सहमति नहीं बन सकी है।
यह भी पढ़ें- बरेली: युवती के साथ दुष्कर्म मामले में सुनाया फैसला, आरोपी को सात साल कैद
