पीलीभीत: धरातल पर बढ़ रहे कमर्शियल निर्माण, पालिका के रिकॉर्ड से गायब
आमदनी बढ़ाने के लिए अब सर्वे कराएगी नगर पालिका, टीमें बनाई
पीलीभीत, अमृत विचार: शहर में तेजी से कमर्शियल इलाकों की संख्या बढ़ रही है। चारों तरफ दुकान, कंपलैक्स, बिग बाजार आदि मार्ट खुल चुके हैं। मगर नगरपालिका के रिकॉर्ड में यह सभी मार्ट और अन्य कमर्शियल एरिया दाखिल नहीं है। जहां सालों पहले कमर्शियल निर्माण हो चुका है।
नगरपालिका के अभिलेखों में वह जगह आज भी खाली दिख रही है। ईओ, चेयरमैन और टैक्स विभाग ने रणनीति बनाते हुए नवनिर्माण वाले कमर्शियल इलाकों का सर्वे कराकर उनकी सूची बनाने की रणनीति बनाई है। इसको लेकर संग्रह अमीनों की ड्यूटी लगाई गई है। उन्हें 10 दिन के भीतर सूची तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। ताकि उन पर भी टैक्स लागू कर वसूला जा सके।
शहर का दायरा बढ़ने के साथ ही हर साल नए मकान निर्माण हो रहे हैं, कॉलोनियां विकसित हो रही है। साथ ही प्रमुख जगहों पर कमर्शियल हब भी बन रहे हैं। जहां कई दुकानें, मॉल मार्ट बिग बाजार आदि का संचालन हो रहे हैं। लेकिन अभी तक यह सब नगरपालिका के रिकॉर्ड से गायब है।
जिनसे टैक्स नहीं वसूला जा रहा है। तो वहीं सूत्रों की मानें तो कुछ कर्मचारी उनसे शुल्क वसूल रहे हैं। अभी तक नगरपालिका की ओर से 26500 आवासीय मकान से गृह और जलकर वसूल रहा है। वहीं करीब एक हजार कमर्शियल में दर्ज हैं। जिनसे टैक्स वसूला जा रहा है। अभी तक कमर्शियल इलाकों में नौ मीटर चौड़ी सड़क पर 31 पैसे, 12 मीटर चौड़ी सड़क वाले इलाके में 85 पैसे स्क्वायर फिट के हिसाब से टैक्स वसूला जाता था।
आवासीय इलाकों में 11 से 25 पैसे स्क्वायर फिट टैक्स लगाया जा रहा था। मगर पूर्व में टैक्स में बढ़ोत्तरी कर दी गई है। जिसके हिसाब से टैक्स रिवाइज कर टैक्स लागू किया जा रहा है। ऐसे लापता कमर्शियल इलाकों से टैक्स वसूलने के लिए नगरपालिका के टैक्स विभाग की ओर से सर्वे कराया जा रहा है।
यह टीम सबसे पहले स्टेशन रोड, छतरी चौराहा, मौर्या मार्केट, गैस चौराहा, चावला चौराहा, छिपियान मस्जिद, ड्रमंडगंज चौराहा, कोतवाली रोड, चौक बाजार समेत कई इलाकों में सर्वे कराया जा रहा है। जिसके लिए संग्रह अमीन की ड़्यूटी लगाई गई है।
सर्वे करके उनका नाम टैक्स की सूची में शामिल किया जाएगा। इनको शामिल करने के बाद नगरपालिका की आमदनी बढ़ेगी। चेयरमैन डॉ. आस्था अग्रवाल ने बताया कि कमर्शियल इलाकों का सर्वे कराकर टैक्स की वसूली कराई जाएगी। जो सूची में शामिल नहीं है। उनको पंजीकृत कर उन पर टैक्स लागू किया जाएगा।
