विश्वास की नई किरण 

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
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भारत आजादी के 75 साल पूरे कर रहा है। एक ऐसे समय में जब विश्व अनेक अनिश्चितताओं से घिरा हुआ है तब भारत दुनिया में विश्वास की एक नई किरण बनकर उभरा है। भारत की अर्थव्यवस्था ने गति पकड़ ली है और सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक बनने की राह पर है। प्रमुख रेटिंग एजेंसियों की राय है कि भारत अगले कुछ साल में दुनिया की तीन सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वाइब्रेंट गुजरात की सफलता के 20 वर्ष पूरे होने पर आयोजित दसवें शिखर सम्मेलन में बुधवार को कहा कि दुनिया आज भारत को स्थिरता के एक ‘महत्वपूर्ण स्तंभ’ के रूप में देख रही है और वह एक ऐसे मित्र के रूप में उभरा है, जिस पर भरोसा किया जा सकता है। इस बार के सम्मेलन का विषय है-भविष्य का प्रवेश द्वार। सम्मेलन कई अर्थों में अदभुत है।

उद्योगपति गौतम अडाणी ने गुजरात में दो लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश की घोषणा की। इसमें मुख्य रूप से एक हरित ऊर्जा पार्क का निर्माण शामिल है, जो अंतरिक्ष से भी दिखाई देगा। उद्योगपति मुकेश अंबानी ने कहा कि उनकी कंपनी रिलायंस हजीरा में भारत की पहली तथा विश्व स्तरीय कार्बन फाइबर सुविधा स्थापित करेगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत एक ऐसा साझेदार है, जो जन-केंद्रित विकास में विश्वास करता है और एक ऐसी आवाज है, जो वैश्विक भलाई में विश्वास करता है और वह ‘ग्लोबल साउथ’ की भी एक आवाज है।

वास्तव में कुछ वर्षों के भीतर भारत की घरेलू और विदेशी स्थिति में जबरदस्त बदलाव आया है। पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शक्ति रणनीति सपने से हकीकत की ओर बढ़ चुकी है। रूस-यूक्रेन युद्ध के संदर्भ में भारत ने अपने को पश्चिम से दूर कर लिया है और विकासशील देशों के साथ निकटता बनाई है। साथ ही, पश्चिमी ताकतों के बारे में भारत की आशंकाएं काफी कम हो गई हैं।

भारत के 1.4 अरब लोगों की प्राथमिकताएं और आकांक्षाएं, मानव केंद्रित विकास पर उनकी आस्था, समावेशिता और समानता के लिए प्रतिबद्धता, विश्व समृद्धि और विश्व विकास का एक प्रमुख आधार है। आज मौजूद वैश्विक स्थिति में भारत की अर्थव्यवस्था में इतनी मजबूती और गति है तो इसके पीछे बड़ा कारण पिछले दशक में संरचनात्मक सुधारों पर हमारा ध्यान केंद्रित करना है।

देश में हो रहे बदलाव नागरिकों के जीवन में सुगमता ला रहे हैं और उन्हें सशक्त बना रहे हैं। निसंदेह भारत उपनिवेश वाले इतिहास से आगे बढ़कर राजनीतिक और सांस्कृतिक रूप से विश्व गुरु बन रहा है।