हल्द्वानी: नाम का अंतरराष्ट्रीय स्विमिंग पूल, बंद रहता है आधा साल
हल्द्वानी, अमृत विचार। कहने को गौलापार स्थित स्विमिंग पूल अंतरराष्ट्रीय पूल है लेकिन सुविधाओं के नाम पर यहां कुछ नहीं है। हीटिंग प्लांट (पानी को गर्म करने की सुविधा) नहीं होने से पूल साल में 6-7 महीने बंद रहता है।
साधारण टाईल्स पर फिसलने से कई बार दुर्घटनाएं होने के बावजूद तालाब के चारों ओर मैट नहीं बिछाई गई। बिजली की सुचारू व्यवस्था न होने से शावर में पानी नहीं आता व खिलाड़ियों को अंधेरे में कपड़े बदलने पड़ते हैं।
पूल के रख-रखाव के लिए कोई तकनीकी स्टाफ नहीं है।
सिर्फ एक केयरटेकर के ऊपर पूरे अंतरराष्ट्रीय स्विमिंग पूल की सारी जिम्मेदारियां हैं। खेल विभाग पिछले दो दशकों से एक स्थाई तैराक कोच की नियुक्ति नहीं कर पाया है।
जब वर्ष 2022 में यह पूल बनकर तैयार हुआ तो खिलाड़ियों ने खुशी व्यक्त की लेकिन अब वे निराश हैं। वजह है, स्विमिंग पूल का साल में अक्टूबर से मार्च तक बंद रहना। खिलाड़ी कहते हैं कि तैराकी की प्रतियोगिताएं सालभर होती हैं, लेकिन पूल मार्च से अगस्त तक ही खुलता है, जिससे उनकी तैयारियों में फर्क पड़ता है।
तैराक कुमकुम धपौला कहती हैं कि गत दिसंबर-जनवरी में दिल्ली में हुई एक राष्ट्रीय प्रतियोगिता में उन्होंने बिना प्रैक्टिस के हिस्सा लिया था, जिससे उनका खेल प्रभावित रहा। वह बताती हैं कि एक दिन की प्रैक्टिस नहीं करने से भी खिलाड़ी की टाइमिंग में फर्क आ जाता है।
आगामी 38वें राष्ट्रीय खेलों में स्विमिंग की ज्यादातर प्रतियोगिताएं यहीं होनी हैं लेकिन यहां ओवर टैंक तक नहीं बना है, जिससे बिजली जाने पर शावर से पानी नहीं आता। पूल के रख-रखाव के लिए तकनीकी स्टाफ होना चाहिए लेकिन यहां सारी जिम्मेदारियां केयरटेकर के भरोसे हैं। सुविधाओं की कमी के कारण बीते साल एक भी फैमली कार्ड नहीं बना। खेल विभाग के अधिकारी बजट का कमी व शीर्ष अधिकारियों को जानकारी देने की बात कहकर अपना पल्ला झाड़ लेते हैं।
मेरे दो बच्चे स्विमिंग करते हैं लेकिन स्टेडियम में पूल के ज्यादा समय तक बंद रहने से उनका खेल प्रभावित हो रहा है। 9 महीने पूल खोला जाना चाहिए।
- चंद्रशेखर जोशी, मोटाहल्दू
कुछ ही महीनों के लिए स्विमिंग पूल खोला जाता है, उसमें भी सरकारी छुट्टियों पर इसे बंद कर दिया जाता है। ऐसे में, उम्मीद करें कि खिलाड़ी पदक लाएं, यह संभव नहीं है।
- संजय धपोला, गौरापड़ाव
