लाठी खाई, जेल गए, अब राम मंदिर बना तो मिट गयी 32 साल पुरानी पीड़ा 

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करनैलगंज क्षेत्र के राम भक्तों ने सुनाई कारसेवा की दास्तां

रमेश पांडेय /करनैलगंज/ गोंडा, अमृत विचार। अयोध्या में राम मंदिर आंदोलन में अग्रणी भूमिका निभाने वाले करनैलगंज के कारसेवक लक्ष्मी चंद खेतान, श्री नारायण भट्ट व गणेश तिवारी मंदिर निर्माण और प्रभु श्री राम की प्राण प्रतिष्ठा से प्रफुल्लित हैं। इन कारसेवकों का कहना है कि अपने आराध्य के जिस मंदिर के लिए लाठी खायी, जेल गए आज वही मंदिर बन रहा है यह सुनकर पिछले 32 वर्षों की पीड़ा मिट गयी है‌। जीते जी भगवान काम के मंदिर का निर्माण देख लिया यह बड़े सौभाग्य की बात है। उम्र के आखिरी पड़ाव पर पहुंच चुके इन कारसेवकों ने रविवार को अमृत विचार से राम मंदिर आंदोलन से जुड़ी अपनी यादों को साझा किया। 

श्री राम जन्मभूमि आंदोलन में करनैलगंज के लोगों की अहम भूमिका थी। 2 नवंबर 1990 को अयोध्या के गोलीकांड में जेल काटकर 5 नवंबर 1990 को वापस लौटे नगर के सदर बाजार निवासी कारसेवक रमाशंकर सोनी, गांधीनगर निवासी लक्ष्मी नारायण खेतान व मंगल चंद खेतान का नगर वासियों ने माला पहना कर स्वागत किया था। रमाशंकर सोनी व मंगलचंद खेतान समेत कई कारसेवक तो स्मृति शेष हो गए, लेकिन कारसेवक लक्ष्मी चंद खेतान, श्री नारायण भट्ट व गणेश तिवारी अब भी मौजूद हैं। अयोध्या में प्रभु राम लला विराजमान होने जा रहे हैं, इस समाचार से वह सभी प्रफुल्लित हैं। नगर के बालूगंज निवासी श्री नारायण बताते हैं कि अयोध्या को लेकर 1985 से ही माहौल बनने लगा था। तमिलनाडु मीनाझीपुरम में हिंदूओं का जबरन धर्म परिवर्तन करा दिया गया था। उसी को लेकर यात्रा नगर में आई थी। जिसमें यह नारा लगा कि हिन्दू एकता जिंदाबाद, यदि भारत में रहना है तो वन्देमातरम कहना है, मगर नगर में कोई बोलने को तैयार नही हुआ। वह इस भरोसे पर की आज नही कल लोग अवश्य जुड़ेंगे अकेले नारा लगाते रहे। इसके बाद 1990 जुलूस में उनका यह नारा की रामजन्मभूमि, काशी, मथुरा, लेकर रहेंगे-लेकर रहेंगे, लोगों को अखर गया। नई बाजार में पथराव हो गया। माहौल खराब हो गया। पुलिस उन्हें पकड़ ले गई। कोतवाली ले जाकर राम के नाम पर पुलिस ने बर्बरता दिखाई। उन्हें 12-15 लाठी जमा दिया। 20 दिनों तक पड़े रहे। एक माह आठ दिन तक जेल की हवा भी खाई। जेल में तब पूर्व राज्यपाल सूर्यभान सिंह, सांसद सत्यदेव सिंह, दशरथ सिंह, तुलसीराय चंदानी, पूर्व गन्ना मंत्री हनुमंत सिंह मिलने गए। हौसला दिया। 

नगर के लक्ष्मी चंद खेतान बताते हैं कि श्री राम जन्मभूमि आंदोलन को लेकर मेरे पूरे परिवार ने कष्ट सहा, जेल काटा, लेकिन प्रभु श्री राम के भव्य मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा से अब सारे दर्द मिट गए हैं।

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जब आतंकी संगठन ने दी जान से मारने की धमकी
राम भक्त श्री नारायण भट्ट पुराने अखबार की कटिंग व पत्र दिखाते हुए कहते हैं कि तब वह विश्व हिंदू परिषद के नगर अध्यक्ष थे। 23 मई 1990 को डाकखाने से पत्र आया। भेजने वाले ने अपने आपको मुजाहिदीन फ्रंट बताते हुए कहा कि अगर तुमने एक महीने में इस्तीफा नही दिया, झंडा उठाकर जुलूस निकालना और रामजन्मभूमि के लिए जो बवाल करते हो वह बंद नहीं किया तो तुम्हे बम से उड़ा दिया जाएगा। यह सब करके  बाबरी मस्जिद का कुछ नही बिगाड़ सकते। ऐसा ही धमकी भरा पत्र पत्रकार व उस दौरान हिन्दू जागरण मंच के पदाधिकारी रहे राममोहन पाण्डेय को भी मिला। जिसमें कहा कि तुम सब काफिरों का रामजन्मभूमि बनाने का मंसूबा कभी पूरा नही होगा। नहीं मानने वाले कि आंखे निकाल ली जाएंगी। रामजन्म भूमि को लेकर आंदोलन किये तो जब तक पीएसी आएगी मौत तुम्हे खा जायेगी। पत्र से सब सहम गए। मगर राम की लगन ने रामकाज को रुकने न दिया। 

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सहयोग मांग कर 5 हजार राम भक्तों को कराया भोजन
श्री नारायण भट्ट ने बताया कि 1992 में रामकाज में लगे 5 हजार लोगों के भोजन की व्यवस्था कराने की जिम्मेदारी मिली। भोजन के लिए दूसरे घरों से सहयोग मांगना पड़ा । इसी दौरान अयोध्या में बाबरी विध्वंस की घटना हो गयी।सबकुछ बंद हो गया। पुलिस पीछे पड़ गई। पुलिस से बचने के लिए लखनऊ, बनारस, मथुरा में धर्मशाला को शरणस्थली बनाते रहे। 5 जनवरी चौकी के समीप अपने रेडीमेड की दुकान पर थे तभी चौकी प्रभारी राम नरेश यादव ने दबोच लिया कहा बहुत राम आंदोलन करते हो। पुलिस ने सरयू कटरा घाट से भारी संख्या में जुलूस लाकर सकरौरा चौराहे पर दूसरे समुदाय से भिड़ने का आरोप लगाकर मुकदमा किया। सभी संघर्ष रामलला के भव्य मंदिर बनने से पुण्य बन गए। मिले सभी दर्द अब प्रभु राम के आशीर्वाद लगते हैं।

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