कांग्रेस की मुश्किल
कांग्रेस की मुश्किलें खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहीं है। एक ओर कांग्रेस आगामी लोकसभा चुनाव के लिए गठबंधन की अगुवा बनकर भाजपा को हराने के लिए बैठक पर बैठक कर सबको एकजुट करके चुनाव में उतरने की तैयारी कर रही है। दूसरी ओर उसके नेता कांग्रेस का दामन छोड़ते जा रहे हैं।
रविवार को राहुल गांधी भारत जोड़ो न्याय यात्रा निकालने की तैयारी कर रहे थे, उससे ठीक पहले महाराष्ट्र कांग्रेस से जुड़े राहुल गांधी के करीबी माने जाने वाले मिलिंद देवड़ा ने पार्टी छोड़ने का एलान कर दिया। मिलिंद कांग्रेस से 55 सालों से जुड़े थे। लोकसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस के लिए यह किसी झटके से कम नहीं है। मिलिंद राहुल गांधी की टीम के विश्वसनीय नेता माने जाते थे। हालांकि यह पहली बार नहीं है जब कांग्रेस के किसी पुराने नेता ने पार्टी छोड़ी हो।
लोकसभा चुनाव 2019 के बाद से कई दिग्गज नेताओं ने कांग्रेस पार्टी को अलविदा कह दिया। इनमें कैप्टन अमरिंदर सिंह, गुलाम नबी आजाद, ज्योतिरादित्य सिंधिया, जितिन प्रसाद, झारखंड और छत्तीसगढ़ के प्रभारी रहे आरपीएन सिंह जैसे बड़े नेता शामिल रहे हैं। अब सवाल उठता है कि राहुल गांधी एक के बाद एक भारत जोड़ो यात्रा कर रहे हैं, लेकिन वह अपने ही कुनबे यानि पार्टी को जोड़े रखने में विफल साबित हो रहे हैं।
ऐसे में कांग्रेस पार्टी भाजपा से कैसे मुकाबला कर सकेगी? गठबंधन में भी उसकी स्थिति कोई बहुत अच्छी नहीं है। बीते शनिवार कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को इंडिया गठबंधन का अध्यक्ष भले ही बना दिया गया है, लेकिन कांग्रेस के साथ सीटों के बंटवारे को लेकर अन्य पार्टियों से कोई ठोस नीति नहीं बन सकी है।
कांग्रेस की यात्राओं पर गौर किया जाए तो पिछले वर्ष भी राहुल गांधी द्वारा भारत जोड़ो यात्रा की गई थी, लेकिन उसका भी कांग्रेस को कोई विशेष लाभ हासिल नहीं हुआ। यात्रा के बाद हुए पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में तीन राज्यों में कांग्रेस को हार का मुंह देखना पड़ा। इसमें दो राज्यों राजस्थान और छत्तीसगढ़ में वह अपनी सरकार बचाने में भी सफल नहीं हो सकी।
असल में पिछले वर्ष कांग्रेस द्वारा की भारत जोड़ो यात्रा देश के सामने कोई गंभीर विमर्श खड़ा करने में असफल रही। राहुल गांधी पूरी यात्रा में केन्द्र सरकार और प्रधानमंत्री को उन्हीं मुद्दों पर घेरने की कोशिश करते रहे, जिन मुद्दों को लेकर उन्होंने लोस चुनाव 2019 लड़ा था। रविवार से शुरू हुई भारत जोड़ो न्याय यात्रा कितनी सफल होगी यह भविष्य के गर्भ में है, लेकिन यह बात समझ से परे है कि टूटती कांग्रेस भारत को जोड़ कर कौन सा न्याय दिलाने की बात कर रही है?
यात्रा के दौरान एक बार फिर संविधान और लोकतंत्र को बचाने की बात जोर शोर से शुरू हो चुकी है,लोकिन यहां कांग्रेस को समझना होगा कि किसी ठोस रणनीति और पार्टी को एकजुट किए बिना, वह कोई भी गंभीर विमर्श खड़ा करने में सफल नहीं हो सकती।
