Exclusive: दो रैकों से असम भेजा गया 42 हजार कुंतल आलू हुआ खराब... व्यापारियों का चार करोड़ का हुआ नुकसान

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Edited By Amrit Vichar
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फर्रुखाबाद में आलू व्यापारियों का चार करोड़ का नुकसान हुआ।

फर्रुखाबाद में दो रैकों से असम भेजा गया 42 हजार कुंतल आलू पूरी तरह सड़ गया। व्यापारियों का चार करोड़ का नुकसान भी हुआ है।

फर्रुखाबाद, (चंद्रपाल सिंह सेंगर)। पिछले सप्ताह फर्रुखाबाद से दो रैकों से असम भेजा गया 42 हजार कुंतल आलू पूरी तरह से सड़ गया है।जिससे आलू मंडी सातनपुर के व्यापारियों को चार करोड़ का घाटा हुआ है।

आलू आढ़ती एसोसिएशन के अध्यक्ष सुधीर कुमार उर्फ रिंकू वर्मा बताते है कि मंडी समिति सातनपुर के व्यापारियों ने सामूहिक रूप से आलू खरीद कर दो रैकों से असम भेजा था। एक रैक में 42 डिब्बे होते हैं। एक डिब्बे में एक हजार पैकेट आलू लोड किया जाता है। एक पैकेट में 50 किलो आलू भरा जाता है।

इस तरह एक रैक में 21 हजार कुंतल लोड किया गया। दो रैक में 42 हजार कुंतल आलू व्यापारियों ने असम के जोराठ और सिल्चर भेजा। रैक पहुंचते पहुंचते दोनों रैकों में लोड पूरा आलू सड़ गया। आलू आढ़ती रिंकू वर्मा बताते है कि असम भेजे गए आलू के सड़ने की खबर पर व्यापारियों को भारी सदमा हुआ है। उनका मानना है कि व्यापारियों को तकरीबन चार करोड़ का घाटा हुआ है।

आलू सड़ने की खबर पर कई व्यापारी असम के लिए रवाना हो गए हैं। उनका कहना है कि व्यापारियों ने असम रैक ले जाने के लिए ऊंची कीमत में मंडी समिति  सातनपुर से किसानों का आलू खरीदा था। लेकिन असम तक आलू पहुंचते ही व्यापारियों की किस्मत धोखा दे गई।आलू आढ़ती अरविंद राजपूत का कहना है कि इस तरह की घटना पहली बार घटी है। गर्मियों की सीजन में भेजा जाने वाला आलू भी कभी रैक में नही सड़ा। आलू सड़ने से व्यापारियों  को जो घाटा हुआ है उसकी भर पाई दस साल तक नही हो पाएगी।

अरविंद बताते है कि आलू सड़ने की खबर पर कई  व्यापारियों के घर गम में चूल्हा नही जला है। जिला आलू विकास अधिकारी रामनरायन वर्मा का कहना है कि अभी आलू पूरी तरह से कच्चा है। कच्चे आलू को लोड करते समय बहुत सावधानी बरती जाती है।

पल्लेदार जिस तरह पटक पटक कर आलू की लोडिंग करते है उससे आलू चुटहिल हो जाता है। चुटहिल आलू पानी देने लगता है। नतीजतन वह पानी जिस आलू में लग जाता है वह भी सड़ जाता। कच्चे आलू को वाहर भेजना ही नही चाहिए। आलू विकास अधिकारी बताते हैं कि यह पहली बार हुआ है। व्यापारी तथा किसान दोनों को चाहिए कि वह कच्चा आलू रैक से वाहर न भेजे।

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