Exclusive News: आबोहवा में हो बदलाव तो जानो आया उन्नाव; सांस लेना हुआ मुश्किल, फैक्ट्रियों से निकलता प्रदूषित पानी कर रहा बीमार...
उन्नाव में चारों ओर औद्योगिक क्षेत्र होने से यहां की आबोहवा बेहद दूषित हो चुकी है।
वीरों, शहीदों व साहित्यकारों की धरती कहे जाने वाले उन्नाव की आबोहवा को जिले के प्रदूषणकारियों ने पूरी तरह से दूषित कर दिया है। हालात यह हैं कि वायु प्रदूषण से जिले में सांस लेना तक मुश्किल होता जा रहा है।
उन्नाव, (द्विजेंद्र मिश्रा)। वीरों, शहीदों व साहित्यकारों की धरती कहे जाने वाले उन्नाव की आबोहवा को जिले के प्रदूषणकारियों ने पूरी तरह से दूषित कर दिया है। हालात यह हैं कि वायु प्रदूषण से जिले में सांस लेना तक मुश्किल होता जा रहा है। फैक्ट्रियों से निकलने वाला प्रदूषित पानी और जहरीला धुआं लोगों को बीमार करने के लिए काफी है।
वहीं लगातार बढ़ती वाहनों की संख्या ने भी वायु प्रदूषण को खासा बढ़ाया है। जल प्रदूषण रोकने को सम्बंधित विभाग ने ऑनलाइन मॉनीटरिंग सिस्टम लगाकर रोकने के प्रयास जरूर किए लेकिन, वह भी समय बीतते धड़ाम हो गया। इससे अब ट्रेनों, बसों या अन्य साधनों से उन्नाव होकर निकलने वाले लोगों के मुंह यह अनायास ही यह निकल जाता है कि जब आबोहवा में हो बदलाव तो समझ जाना आ गया उन्नाव।
बता दें कि जिले में दही चौकी साइड-1 व 2, मगरवारा और अकरमपुर सहित हाइवे किनारे बंथर प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र हैं। यहां बड़ी संख्या में प्रदूषणकारी उद्योग संचालित हैं। जिन्हें प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड से एनओसी मिली हुई है। लेकिन, इनके अलावा बिना एनओसी के भी क्षेत्र में छोटी-बड़ी सैकड़ों फैक्ट्रियां संचालित हैं।
जो विभागीय अधिकारियों के रहमोकरम पर चलती हैं। इनमें सबसे अधिक चर्म इकाइयां व इनसे जुड़े अन्य कुटीर उद्योग हैं। यहां पहले से कुटीर उद्योग के रूप में ग्लू व मेन्योर भट्ठियां चलती रही हैं। जिनसे निकलने वाला दुर्गंध व प्रदूषणयुक्त धुआं जिले की आबोहवा को दूषित कर रहा है। जिससे शहर के अलावा आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में भी लोगों को सांस लेना तक दूभर हो रहा है।
हालात यह हैं कि जिले से होकर निकलने वाली ट्रेनों, बसों व अन्य वाहनों में सवार लोग उन्नाव आने पर नाक बंद करने को मजबूर हो जाते हैं। हालांकि, संबंधित विभाग के अधिकारी लगातार प्रदूषणमुक्त जिला बनाने के प्रयास किये जाने का दावा करते हैं। लेकिन, उनके सभी दावे सिर्फ कागजी ही साबित होते हैं।
इस बाबत उप्र प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी एके माथुर ने बताया कि जिले में वायु और जल प्रदूषण को कम करने के प्रयास विभाग द्वारा लगातार किये जा रहे हैं। इसकी लगातार मानिटरिंग भी की जा रही है।
