पीलीभीत: 72 घंटे बीते... दारोमदार निगरानी टीमों पर, अफसर झांकने तक नहीं पहुंचे

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

पीलीभीत अमृत विचार: आतंक का पर्याय बनी बाघिन 72 घंटे बीतने के बाद भी वन महकमे की पकड़ से बाहर है। खास बात यह है कि पिंजड़ा लगे चार दिन बीत चुके हैं, लेकिन इस दौरान वन अफसरों ने एक बार भी पलट कर झांकने की कोशिश तक नहीं की।  

बाघिन को पकड़ने का पूरा दारोमदार निगरानी टीमों के कंधों पर ही है। निगरानी टीमों से प्राप्त सूचनाओं को ही ऊपर बैठे अफसरों तक पहुंचाया जा रहा है। वहीं दहशतजदा ग्रामीण बाघिन को पकड़ने की आस में वन महकमे की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं। इधर बाघिन के पिंजड़े में कैद होता न देख अब उसे ट्रैंक्यूलाइज कर पकड़ने की रणनीति पर भी मंथन शुरू हो चुका है।  

शहर से सटी नगर पंचायत पकड़िया नौगवां के रिहायशी इलाके से करीब 150 मीटर दूरी पर बैठी बाघिन शनिवार को भी पकड़ में नहीं आ सकी। जंगल से बाहर निकली इस बाघिन को पकड़ने के लिए देवहा नदी की डबरी में 17 जनवरी को पिंजड़ा लगाया गया था। उसी रात बाघिन पिंजड़े के बाहर बंधी एक बकरी समेत एक पालतू कुत्ते को निवाला बनाने के बाद निगरानी टीम को चकमा देकर निकल गई थी। तबसे बाघिन पिंजड़े के आसपास ही मंडरा रही है। 

ग्रामीणों के मुताबिक बाघिन आसपास के 10 किमी की परिधि में घूमने के बाद पिंजड़े के पास आकर बैठ रही है। शनिवार सुबह से लेकर शाम तक बाघिन पिजड़े के पास डेरा जमाए देखी गई। बताते हैं कि रात में बाघिन ने पास के एक घर में दोबारा घुसने का प्रयास किया, लेकिन आहट पर जगे परिवार वालों के शोर-शराबे के बाद बाघिन वापस चली गई। बाघिन की लगातार चहलकदमी से पास के घरों में शनिवार को दहशत का माहौल देखा गया। 

शनिवार को सामाजिक वानिकी प्रभाग के डिप्टी रेंजर शेर सिंह के नेतृत्व में वन दरोगा मंगली प्रसाद, वनरक्षक फौजी समेत पांच सदस्यीय टीम बाघिन की मॉनिटरिंग में लगी रही। वहीं रात को डिप्टी रेंजर देवऋषि सक्सेना के नेतृत्व में टीम बाघिन की निगरानी में जुटी रही।  

ऐसे तो पकड़ में आने से रही बाघिन
बीते बुधवार को बाघिन को पकड़ने के लिए टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर नवीन खंडेलवाल की देखरेख में पिंजड़ा लगाया गया था। पिंजड़ा लगे चार दिन बीतने के बाद भी वन अफसरों ने एक बार भी मौके पर जाकर जांच पड़ताल करना मुनासिब नहीं समझा। बाघिन को पकड़ने की जिम्मेदारी महज निगरानी टीमों के कंधों पर डालकर अपने कर्तव्यों की इतिश्री की जा रही है।

ट्रैंक्यूलाइज करने की रणनीति पर शुरू हुआ मंथन
गांव अटकोना से 26 दिसंबर 2023 को रेस्क्यू की गई इस बाघिन के दोबारा रिहायशी इलाकों आने के बाद पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ ने बाघिन को रेस्क्यू करने की अनुमति दे दी थी, लेकिन बाघिन के अधिकतर मूवमेंट नदी-नालों के पास होने के चलते रेस्क्यू टीम उसे ट्रैंक्यूलाइज कर पकड़ने से कतराती आ रही है। रेस्क्यू टीम को इस बात का डर है कि कहीं बाघिन ट्रैंक्यूलाइज होने के बाद बेहोशी हालत में पानी में न चली जाए। मानव-वन्यजीव संघर्ष की आशंका को देखते हुए वन अफसरों ने अब बाघिन को ट्रैंक्यूलाइज कर पकड़ने की रणनीति पर मंथन करना शुरू कर दिया है।
 
बाघिन का मूवमेंट पिंजड़े के आसपास ही देखा जा रहा है। निगरानी टीमें लगातार मॉनिटरिंग क रही है। स्थिति पर लगातार निगाह रखी जा रही है। स्थिति को देखते हुए बाघिन को ट्रैंक्यूलाइज कर रेस्क्यू करने पर भी मंथन किया जा रहा है--- नवीन खंडेलवाल, डिप्टी डायरेक्टर, पीटीआर।

यह भी पढ़ें- पीलीभीत:  बाघिन की दहशत.. दो परिवारों की मुसीबत में जान, बिना दरवाजे के घर पर लगाए तख्त, जिम्मेदारों ने खाबड़ लगाई न किए सुरक्षा के इंतजाम

संबंधित समाचार