बरेली: विवादित ढांचा गिराने सबसे पहले पहुंची थी 'वानर सेना'! भर दिया था कारसेवकों में जोश

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

विकास यादव, बरेली, अमृत विचार। 22 जनवरी को अयोध्या में होने वाले भगवान श्रीरामलला के प्राण प्रतिष्ठा समारोह को लेकर देश में उत्साह देखने को मिल रहा है। इस शुभ दिन को देखने के लिए हजारों कार सेवकों ने अपने प्राण दांव पर लगा दिए थे, यहां तक की बड़ी संख्या कार सेवकों की जानें तक चली गई थीं। लेकिन आज इस शुभ दिन के करीब आने के साथ ही तमाम कार सेवक उत्साहित और प्रफुल्लित नजर आ रहे हैं। 

आपको बता दें कि अयोध्या में राम मंदिर को लेकर बरेली के भी कार सेवकों का योगदान रहा है। दरअसल, साल 1990 में बरेली से सैकड़ों कार सेवक अयोध्या में अपना योगदान देने गए थे। जिन्होंने वहां हुई विभीषिका को अपनी आखों से होते देखा था। आज भी उस दिन को याद करके उनके रोंगटे सिहर उठते हैं कि किस तरह उनकी आखों के सामने कार सेवकों पर गोलियां दागी गईं। 

वहीं 1992 में भी बरेली से सैकड़ों कार सेवकों ने विवादित ढांचे को ढहाने में अपना योगदान दिया और उस दिन के साक्षी बने। इसको लेकर आज तुलसी मठ में बरेली फोटो जर्नलिस्ट एसोसिएशन की तरफ से ऐसे ही कार सेवकों के लिए सम्मानित समारोह आयोजित किया। जिसमें बीजेपी के ब्रज क्षेत्रीय अध्यक्ष दुर्विजय सिंह शाक्य, महानगर अध्यक्ष अधीर सक्सेना और भानू भारद्वाज समेत तमाम कार सेवकों को सम्मानित किया गया। 

456545

इस मौके पर आरएसएस के पदाधिकारी अशोक शर्मा ने राम मंदिर दौर का जिक्र करते हुए कहा कि 4 दिसंबर 1992 को बरजंग दल की बैठक में निर्णय लिया गया कि बरेली से कौन-कौन अयोध्या जाएगा। वहीं 6 दिसंबर 1992 को उनके साथ करीब एक दर्जन राम सेवक अयोध्या के लिए रवाना हो गए। जहां विश्व हिंदू परिषद के नेता अशोक सिंघल ने घोषणा करते हुए कहा था कि सभी प्रतीकात्मक कार सेवा देंगे। जिसमें विवादित ढांचे के पास सरयू से रेत लाकर डाली जाएगी। 

वीएचपी नेता की घोषणा के तहत महाराष्ट्र के कार सेवकों का एक जत्था सरयू से बालू लाकर प्रतीकात्मक सेवा कर रहा था। इस दौरान तीन बंदर वहां पहुंचे। जिन्होंने बाबरी मस्जिद के गुंबद पर चढ़कर उसकी चोटी को हिलाना शुरू कर दिया। भगवान श्रीराम की वानर सेना को ऐसा करता देख रामभक्तों में जोश भर गया। इस दौरान किसी ने अफवाह उड़ा दी कि अयोध्या में बवाल हो गया है। 

यह खबर सुनते ही विश्व हिंदू परिषद के नेता अशोक सिंघल मौके पर पहुंचे, जहां जय श्रीराम के नारों के साथ माहौल राममय हो चुका था। इस दौरान कार सेवकों में वानर सेना ने जोश भर दिया। देखते ही देखते ढांचे को ढहाने का दौर चल गया। कार सेवकों के हौसले के आगे सीआरपीएफ समेत अन्य सुरक्षाबलों ने भी पीछे कदम खींच लिए और ढांचा ढहाने के बाद बरेली के कार सेवकों ने मिलकर वहां के मलवे को रातों-रात हटा दिया। इसके साथ ही अस्थाई मंदिर का निर्माण कर अगली सुबह चार बजे तक पुजारी ने पूजा-अर्चना कर दी। 

वहीं बीजेपी के ब्रज क्षेत्रीय अध्यक्ष दुर्विजय सिंह शाक्य ने बताया कि साल 2002 में शिवरात्रि के दिन वह और महानगर अध्यक्ष अधीर सक्सेना, भानू भारद्वाज समेत एक दर्जन कार सेवक अयोध्या जा रहे थे। जैसे ही कोतवाली पुलिस को पता चला तो उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। उन का व्रत होने के बाद भी उन्हें जेल में खाने को रोटी दी गईं। जिसे खाने से इनकार करने पर जेलर ने उन्हें जेल में आंदोलन करने पर सजा बढ़ाने की धमकी दी। 

क्षेत्रीय अध्यक्ष दुर्विजय सिंह शाक्य ने कहा कि 500 साल के संघर्ष के बाद आज यह दिन देखने को मिला है, इसके लिए लाखों रामभक्तों ने अपनी कुर्बानी दी हैं। जिन्हें भुलाया नहीं जा सकता है।

वह उसके बाद बजरंग दल से जुड़ गए। 4 दिसंबर 1992 को बरजंग दल की बैठक में निर्णय लिया गया कि कौन कौन अयोध्या जाएगा। 6 दिसंबर 1992 को उनके साथ करीब एक दर्जन लोग अयोध्या जाने के लिए तैयार हो गए। पांच तारीख की रात सभी अयोध्या रवाना हो गए। उसके बाद अशोक सिंघल ने घोषणा की, सभी प्रतिकात्मक कार सेवा देंगे। 

45645

सरयू से रेत लाकर वहां डाली जाएगी। महाराष्ट्र का जत्था सरयू से बालू लाकर प्रतिकात्मक सेवा कर रहा था।  इस दौरान तीन बंदर वहां आ  गए और वह बाबरी मस्जिद के गुंब्बद पर चढ़ गए और चोटी को हिलाना शुरू कर दिया। भगवान श्री राम की वानर सेना को ऐसा करता देख राम सेवकों में जोश भर गया। इस दौरान किसी ने अफवाह उड़ा दी कि अयोध्या में बवाल हो गया।  

अशोक सिंघल मंदिर के अंदर गए, तभी अचानक जय श्री राम के नारे के साथ माहौल राम मय हो गया। इस दौरान कार सेवकों में वानर सेना ने जोश भर दिया। देखते ही देखते ढांचे को ढहाने का दौर चल गया। कार सेवकों के हौसले के आगे सीआरपीएफ ने भी पीछे कदम खींच लिए और ढांचा ढहाने के बाद बरेली के कार सेवकों ने मिलकर वहां के मलवे को रातोंरात हटा दिया। अस्थाई मंदिर का निर्माण कर सुबह चार बजे पुजारी ने पूजा अर्चना की। 

वहीं अपने विचार साझा करते हुए ब्रज क्षेत्र के क्षेत्रीय अध्यक्ष दुर्विजय सिंह शाक्य ने बताया कि 2002 शिवरात्री के दिन वह और महानगर अध्यक्ष अधीर सक्सेना, भानू भारद्वाज समेत एक दर्जन लोग अयोध्या जा रहे थे। जैसे ही कोतवाली पुलिस को पता चला उन्हें गिरफ्तार कर लिया। 

उन का व्रत होने के बाद भी उन्हें जेल में खाने को रोटी दी गई। जिसे खाने से इनकार करने पर जेलर ने उन्हें जेल में आंदोलन करने पर सजा बढ़ाने की धमकी दी। पांच सौ साल के संघर्ष के बाद यह दिन देखने को मिला। साढ़े तीन सौ लाख लोगों ने अपनी कुर्बानी दी। जिसे भुलाया नहीं जा सकता है। इस मौके पर भाजपा के ब्रज प्रांत अध्यक्ष दुर्विजय सिंह शाक्य ने कार सेवकों को शॉल ओढ़ाकर और माला पहनकर  सम्मानित किया। 

इस अवसर पर भाजपा के महानगर अध्यक्ष अधीर सक्सेना, उपजा प्रेस क्लब  के अध्यक्ष डॉ पवन सक्सेना, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष संजय सिंह, महंत नीरज नयन  दास आदि ने सभी कर सेवकों को सम्मानित किया। कार्यक्रम का संचालन अजयराज शर्मा ने किया।

कार्यक्रम में मुख्य सहयोग अजय मिश्रा, पुत्तन सक्सेना, विवेक मिश्रा, विजय शर्मा, अनूप मिश्रा, शुभम ठाकुर, अशोक शर्मा, लोटा मुरादाबादी, अरविंदर  सिंह मिक्की, अभिषेक सिंह, अशोक गुप्ता, पंकज शर्मा, सुरेश रोचानी, राहुल सक्सेना, राकेश कश्यप, सलोनी कश्यप, दीपक गंगवार, वीके सक्सेना, अरविंद कुमार शाक्य का रहा।

यह भी पढ़ें- रामलला प्राण-प्रतिष्ठा: कारसेवकों को रक्तदान शिविर से दी जाएगी श्रद्धांजलि; अयोध्या में समारोह का एलईडी से होगा LIVE Telecast ...

संबंधित समाचार